
Shakti Mill gangrape convicted for hanging
मुंबई .शक्ति मिल बलात्कार मामले में सुनाए गए फांसी की सजा को मुंबई उच्च न्यायलय ने कायम रखते हुए आरोपियों की याचिका को रद्द कर दी। न्यायमूर्ति भूषण धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते -डेरे ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए कहा की सजा कानून के दायरे में दी गई है इसके अनुसार गैंगरेप करने वाले तीनों आरोपी फांसी की सजा लायक ही हैं। महालक्ष्मी के शक्ति मिल में 2013 में एक महिला फोटो ग्राफर के साथ गैंगरेप किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने महिला के दोस्त को बंधक बनाकर महिला फोटोग्राफर के साथ बलात्कार किया। इसके बाद महिला ने इसकी शिकायत पुलिस में की थी। जिसके बाद एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला था की आरोपियों ने इस से पहले भी इसी तरह एक दूसरी महिला के साथ भी गैंगरेप किया था। महिला ने समाज में बदनामी के डर से शिकायत नहीं की थी। महिला पत्रकार का मामला सामने आने के बाद पुलिस को शिकायत दर्ज कराई गई।
सत्र न्यायलय ने भी फांसी की सजा सुनाई थी
मामले में 2014 में सत्र न्यायलय ने विजय जाधव, कासीम बंगाली, सलीम अंसारी को फांसी की सजा सुनाई थी। फांसी की सजा को लेकर आरोपियों ने मुंबई उच्च न्यायलय में याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा था की जो सजा सुनाया गई है, वह इस कानून के दायरे में नहीं आती है। इसके लिए जरूरी है कि इसमें संसोधन किया जाए। इस मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति भूषण धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते -डेरे कहा की आरोपी दी गई सजा के हकदार हैं। बार बार बलात्कार जैसे घोर अपराध को अंजाम देने वाले ऐसे लोगो को छोडऩा भी भयंकर अपराध है। लिहाजा याचिका रद्द की जाती है।
Published on:
03 Jun 2019 11:16 pm
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