
एनसीपी में कोई टूट नहीं हुई है- सुप्रिया सुले
NCP Sharad Pawar: वरिष्ठ नेता शरद पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख के पद से इस्तीफा देकर खुद अपनी पार्टी के बड़े नेताओं को झटका दिया। जिनमें वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल भी शामिल हैं। एनसीपी के दोनों दिग्गज आमतौर पर पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं, लेकिन वें पवार के इस्तीफे से अनजान थे। हालाँकि, जिस तरह से पवार ने पार्टी प्रमुख के रूप में अपने इस्तीफे की घोषणा की, उससे पता चलता है कि अनुभवी राजनेता ने बहुत विचार-विमर्श के बाद ही अपना निर्णय लिया है।
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में अपनी आत्मकथा के संशोधित संस्करण के विमोचन के अवसर पर 1999 में बनाई गई अपनी पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान किया। इस दौरान वहां पवार की पत्नी प्रतिभा पवार भी मंच पर थीं। जबकि कार्यक्रम में एनसीपी के लगभग सभी बड़े नेता मौजूद थे। शरद पवार का भाषण खुद उनकी बेटी और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और उनके पति सदानंद भालचंद्र सुले (Sadanand Bhalchandra Sule) ने लिखा था। कहा जा रहा है कि बेटी के अलावा दामाद भी अपने ससुर के फैसले को जानते थे। यह भी पढ़े-NCP में रार: मुंबई कन्वेंशन से 'छोटे पवार' नदारद, शरद पवार और सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार को घेरा
82 वर्षीय शरद पवार के इस्तीफे की घोषणा के कुछ दिन पहले ही सुप्रिया सुले ने कहा था कि अगले 15 दिनों के भीतर "दिल्ली और महाराष्ट्र में दो भूकंप आएंगे"। सुप्रिया के बयान के 13वें ही दिन शरद पवार ने इस्तीफा दे दिया।
पवार ने खुद भी कुछ दिनों पहले की गई एक रहस्यमयी टिप्पणी में अपने इस्तीफे का संकेत दिया था। पार्टी की यूथ विंग को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा था, 'किसी ने मुझसे कहा कि रोटी सही समय पर पलटनी चाहिए। अगर न पलटी जाए तो वह खाने में कड़वी हो जाती है।"
वहीँ, दोनों नेताओं के बीच भविष्य में किसी भी तरह की दरार (विवाद) को रोकने के लिए शरद पवार ने अपने भतीजे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार को भी अपने फैसले के बारे में न केवल बताया बल्कि उन्हें विश्वास में भी लिया।
अपने इस्तीफे की घोषणा करने के कुछ हफ्ते पहले ही शरद पवार अन्य विपक्षी दलों के मुद्दों पर अपने "अप्रत्याशित" रुख को दिखाया और सुर्खियां बटोरते भी नजर आये थे। उद्धव गुट के नेता संजय राउत की मानें तो शरद पवार ने उद्धव ठाकरे से कहा था कि उनकी पार्टी कभी भी बीजेपी से हाथ नहीं मिलाएगी, भले ही उनकी पार्टी के विधायक चले जाये। जो बीजेपी में शामिल भी होंगे तो यह उनका निजी फैसला होगा।
उन्होंने विपक्ष के अपने साथियों के विपरीत जाकर उद्योगपति गौतम अडानी का समर्थन किया और अडानी समूह को लेकर अमेरिका के हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया, साथ ही संसदीय जांच (JPC) के लिए विपक्ष के अभियान को भी नकार दिया। बाद में अडानी के आवास पर दोनों में करीब दो घंटे की मुलाकात हुई।
एकनाथ शिंदे के तख्तापलट के बाद शिवसेना नेता द्वारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के मुद्दे को भी शरद पवार ने उठाया और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की आलोचना की। पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने उनसे और अपने सहयोगी दलों से परामर्श किए बिना सीएम पद छोड़ने का निर्णय लिया था. जिसने महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को सत्ता से हटा दिया। शरद पवार की पार्टी एनसीपी महाविकास आघाडी की घटक है, जिसमें शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और कांग्रेस भी शामिल हैं। यह भी पढ़े-उद्धव ठाकरे ने CM पद छोड़ने से पहले रांकपा-कांग्रेस से नहीं की थी चर्चा, शरद पवार का बड़ा खुलासा
एनसीपी के संस्थापक ने अपनी पार्टी के विधायकों के खिलाफ भी खुला रुख अपनाया, जो बीजेपी से हाथ मिलाने का कथित तौर पर दबाव बना रहे थे। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपने लंबे समय से चले आ रहे ‘विरोधी’ बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते हैं। पवार ने उनके द्वारा स्थापित पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी चेतावनी दी थी।
शरद पवार के इस्तीफे की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने उनसे कहा कि उन्हें उनमें से कुछ के साथ अपने फैसले पर चर्चा करनी चाहिए थी। इस पर, पवार ने उन्हें जवाब दिया कि अगर वह उन्हें अपने एनसीपी सुप्रीमों के पद को छोड़ने की इच्छा के बारे में बताते तो वह उन्हें रोकने की कोशिश करते।
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए शरद पवार ने यह भी ऐलान किया कि पार्टी की एक समिति बनाई गई है जो अगले पार्टी प्रमुख का फैसला करेगी। पॉलिटिकल पंडितों का मानना है कि शरद पवार के मन में उनके उत्तराधिकार से लेकर पार्टी की आगे की कार्यशैली कैसी होगी, इसकी सारी योजना है और वह राजनीति में सक्रिय रहते हुए इसे क्रियान्वित होते भी देखना चाहता है।
शरद पवार ने अपने इस्तीफे के भाषण में कहा था कि वह महाराष्ट्र और देश के मुद्दों पर काम करना जारी रखेंगे, लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे। वह सक्रीय राजनीति से खुद को दूर रखना चाहते है, लेकिन उनका भाषण यह इंगित करता है कि यदि एनसीपी अजीत पवार की कथित इच्छाओं के अनुरूप बीजेपी के रास्ते पर चलती है, तो शरद पवार अपने भतीजे के फैसले से असहमत भी हो सकते हैं। यह भी पढ़े-Maharashtra: बीजेपी नहीं, रांकपा के साथ हूं, अजित पवार ने बगावत की अटकलों पर लगाया विराम
Published on:
04 May 2023 01:57 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
