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10 रुपये में भरपेट खाना! शिव भोजन थाली योजना नहीं होगी बंद, फडणवीस सरकार देगी 55 करोड़

Shiv Bhojan Thali scheme: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने सप्लीमेंट्री बजट में शिव भोजन योजना के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Feb 25, 2026

Devendra Fadnavis Maharashtra

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Photo: X/CMO)

महाराष्ट्र सरकार ने गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही 'शिव भोजन थाली' (Shiv Bhojan Thali) योजना को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। बुधवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने स्पष्ट किया कि यह योजना जारी रहेगी और इसके लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

शिव भोजन योजना के लिए 55 करोड़ और

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा पेश किए गए अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) में शिव भोजन थाली योजना के लिए 55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि यह आवंटन महायुति सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें वह बिना किसी वित्तीय बाधा के इस कल्याणकारी योजना को आगे ले जाना चाहती है।

गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में पहले ही 70 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। जबकि योजना के पूर्ण संचालन के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।

एनसीपी के वरिष्ठ मंत्री भुजबल ने कहा कि इस आवंटन से शिव भोजन योजना (Shiv Bhojan scheme) के समर्थकों को भरोसा मिलेगा और यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि सरकार इस योजना को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या है शिव भोजन थाली योजना?

शिव भोजन थाली योजना की शुरुआत 26 जनवरी 2020 को तत्कालीन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाडी (MVA) सरकार ने की थी। इस योजना के तहत सिर्फ 10 रुपये में भरपेट भोजन दिया जाता है। थाली में दो रोटी, एक कटोरी सब्जी, एक कटोरी दाल और चावल शामिल होते हैं।

इसका मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों, छात्रों और बेसहारा लोगों को किफायती दर पर पोषक भोजन उपलब्ध कराना है।

शिव भोजन थाली रोजाना सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित केंद्रों पर मिलती है। सरकार ने अधिकृत केंद्रों को योजना संचालित करने की अनुमति दी है।

महाराष्ट्र भर में लगभग 1,900 केंद्रों के माध्यम से रोजाना 1.7 लाख से अधिक थालियां परोसी जा रही हैं। भले ही यह आम जनता को 10 रुपये में मिलती है, लेकिन इसकी वास्तविक लागत शहरी क्षेत्रों में 50 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 रुपये प्रति थाली है। इस अंतर की राशि सब्सिडी के तौर पर सरकार सीधे केंद्र संचालकों को देती है।

दरअसल पिछले कुछ समय से फंड की कमी के कारण इस योजना के बंद होने की अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन बजट में किए गए ताजा प्रावधानों ने उन सभी आशंकाओं पर विराम लगा दिया है।