
(पत्रिका ब्यूरो,मुंबई): केंद्र सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने मंगलवार को एक बार फिर भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला बोला। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में संपादकीय के जरिए कहा कि राम मंदिर मामले में अदालत की ओर संकेत करना स्थिति से मुंह मोड़ने जैसा है। देश भर में मंदिर के निर्माण के लिए प्रदर्शन अदालत से अनुमति लेने के बाद शुरू नहीं हुए थे। केंद्र जब तीन तलाक और अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून पर अदालत के आदेशों को दरकिनार कर अध्यादेश जारी कर सकता है, तो वह राम मंदिर निर्माण और समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए अध्यादेश क्यों जारी नहीं कर सकता?
बाबरी मस्जिद को शिवसेना कार्यकर्ताओं ने गिराया था। यहां तक कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने तो इसकी जिम्मेदारी भी ली थी। अब आपकी (भाजपा की) सरकार सत्ता में है, फिर ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा? अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनता है तो भाजपा को 'झूठी' कहा जाएगा और उसे सत्ता से बेदखल कर दिया जाएगा।
भाजपा पूरा नहीं कर सकी अपना वादा
संपादकीय में कहा गया कि बीजेपी के लिए भगवान राम तो 'अच्छे दिन' लेकर आए, लेकिन पार्टी मंदिर बनवाने का अपना वादा पूरा नहीं कर सकी। बीजेपी केंद्र समेत कई राज्यों में सत्ता में है और आसानी से राम मंदिर का निर्माण कर सकती है।
मंदिर निर्माण को लेकर एक शब्द नहीं कहते पीएम
मुखपत्र के जरिए मोदी पर हमला बोलते हुए कहा गया है कि मुख्य पुजारी ने हाल ही में कहा कि पीएम मोदी केवल जय श्रीराम के नारे देते हैं, लेकिन मंदिर निर्माण के लिए एक भी शब्द नहीं बोलते। यूपी में चुनाव के दौरान ऐसा माहौल था कि मानो बीजेपी की सत्ता आई, तो आसानी से राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा, लेकिन सत्तारूढ़ पार्टी ने इसके लिए आवाज उठाने वालों को ही परेशान करना शुरू कर दिया।
Published on:
9 Oct 2018, 9:26 PM IST
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