
समुद्री सुरक्षा के लिए शिवाजी ने बनाई थी ताकतवर नौसेना, बेड़े में थे 500 जहाज
मुंबई. बीजापुर सल्तनत के खिलाफ बिगुल फूंक महाराष्ट्र में हिंदवी स्वराज्य की स्थापना करने वाले मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की बहादुरी को हर भारतीय गर्व से नमन करता है। बुद्धि बल से बादशाह औरंगजेब को मात देने वाले गुरिल्ला युद्ध में बेजोड़ मराठा योद्धा की आज 393वीं जयंती है। 19 जनवरी, 1630 को उनका जन्म शिवनेरी किले (पुणे) में हुआ था। उनकी मां का नाम जीजा बाई था। पिता शाहजी भोसले बीजापुर सल्तनत के दरबार में अहम ओहदे पर थे। रायगड किले में 6 जून, 1674 को शिवाजी के राज्याभिषेक के साथ मराठा साम्राज्य की शुरुआत हुई। 1680 में स्वर्गवास से पहले शिवाजी ने कई लड़ाई लड़ीं। कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा में उन्होने दर्जनों किले जीते। सत्ता-प्रशासन को चलाने के लिए शिवाजी ने रायगड, सिंधु दुर्ग, प्रतापगड जैसे कई किले बनवाए। सुरक्षा के लिए शिवाजी के पास लड़ाकों की सेना तो थी ही, ताकतवर नौसेना भी बनाई थी। भारतीय नौसेना को पिछले साल जो स्वदेशी झंडा मिला है, उसमें शिवाजी की मुहर (अष्टकोणीय डिजाइन) शामिल है। खास यह कि शिवाजी के नौसेना बेड़े में 500 जहाज थे। दूरदर्शी शिवाजी मानते थे-जलमेव यस्य, बलमेव तस्य यानी जिसके पास ताकत होगी वही समुद्र पर शासन करता है।
समुद्री लुटेरों को खदेड़ा
राज्याभिषेक से पहले ही शिवाजी ने नौसेना बना ली थी। विदेशी ताकतों से उन्होंने भारतीय जल क्षेत्र की हिफाजत की थी। हथियारों व तोपों से लैस उनकी सेना ने समुद्री लुटेरों को खदेड़ दिया था। खास तौर पर प्रशिक्षित उनकी नौसेना दुश्मनों पर त्वरित प्रहार करती थी। इतिहासकारों के अनुसार उस समय अरब, पुर्तगाली, ब्रिटिश और समुद्री लुटेरे कोंकण व गोवा के समंदर के रास्ते हिंदुस्तान में घुसना चाहते थे। शिवाजी महाराज उनकी चाल समझ गए थे।
तटीय क्षेत्रों में बनाए किले
कोंकण के तटीय क्षेत्रों में मराठा शासकों ने कई किले बनाए। इनमें जयगढ़, विजय दुर्ग, सिंधु दुर्ग आदि शामिल हैं। जब मराठों ने कोंकण में प्रवेश किया, तो पुर्तगाली वहां पैर जमाना चाहते थे। मराठों ने 1654 में पहला युद्धक जहाज तैयार किया। शिवाजी ने कान्होजी आंग्रे की मदद से पुर्तगालियों के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी के चलते पुर्तगाली गोवा से आगे नहीं बढ़ पाए। शिवाजी की नौसेना में दो स्क्वाड्रन थी। प्रत्येक में 200 जहाज तैनात थे।
नौसेना ने दिया सम्मान
भारतीय नौसेना ने मराठा जल सेना को सम्मान दिया है। लोणावला में प्रशिक्षण संस्थान को शिवाजी नाम दिया गया है। मुंबई में रसद आपूर्ति-प्रशासनिक केंद्र को कान्होजी आंग्रे के नाम से जाना जाता है। नौसेना बनाने का मकसद व्यापारिक हितों की रक्षा भी करना था। मराठा नौसेना के बेड़े में गुरब, तारंडे, गलबत, शिबाद जैसे जहाज शामिल थे।
कर्नाटक में पहली जीत
ए हिस्ट्री ऑफ द मराठा नेवी एंड मर्चेंटशिप के अनुसार, शिवाजी की नौसेना ने कुंडापुरा के पास बसुरु (कर्नाटक) पर 85 जहाजों के साथ हमला किया था, जिसमें पहली जीत मिली थी। शिवाजी के बनाए कई किले अजेय रहे हैं।
Published on:
18 Jan 2023 08:02 pm
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