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shravan vishesh : बाबुलनाथ मंदिर में सावन भर होगी घी महा पूजा

श्रावण मास शुरू, शिव मंदिरों में बहेगी आस्था की अविरल धारा बाबुलनाथ मंदिर का निर्माण सन 1806 में हुआ था, जो अब बड़ा तीर्थ का रूप ले चुका है। गिरगांव चौपाटी के उत्तरी छोर पर मलबार हिल्स की पहाड़ी पर स्थित भगवान बाबुलनाथ का मंदिर अलौकिक अनुभूति कराता है।

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मुंबई

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Binod Pandey

Jul 17, 2019

patrika mumbai

shravan vishesh : बाबुलनाथ मंदिर में सावन भर होगी घी महा पूजा

मुंबई. देश के प्राचीनतम मंदिरों में शामिल बाबुलनाथ मंदिर में सावन के दौरान प्रति दिन भक्तों का तांता लगा रहता है। बाबुलनाथ मंदिर का निर्माण सन 1806 में हुआ था, जो अब बड़ा तीर्थ का रूप ले चुका है। गिरगांव चौपाटी के उत्तरी छोर पर मलबार हिल्स की पहाड़ी पर स्थित भगवान बाबुलनाथ का मंदिर अलौकिक अनुभूति कराता है।


बाबुलनाथ शिवलिंग के प्राकट्य की पौराणिक कथाओं के अनुसार करीब दो सौ साल पहले मलबार हिल्स पर घना जंगल और चरागाह हुआ करता था। अधिकांश जमीन धनवान सोनार पांडुरंग की थी। पांडुरंग के पास अनेक गायें थीं, जिनकी देखभाल बाबुल नामक एक चरवाहा करता था। झुंड में कपिला नाम की भी एक गाय थी। वह हरी घास अधिक खाती थी और अन्य गायों की अपेक्षा अधिक दूध देती थी। एक शाम कपिला ने दूध का एक भी बूंद नहीं दिया। पांडुरंग के पूछने पर बाबुल ने कहा कि कपिला गाय प्रतिदिन गोचर के एक निश्चित स्थान पर जाती है और वही उसका दूध अपने आप बाहर बह जाता है। सेठ पांडुरंग को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, दूसरे दिन वह खुद गोचर स्थल पर जाकर उक्त घटना को देखा तो अचम्भित हो गया। सेठ पांडुरंग ने उसी स्थान पर खुदाई करवाई तो वहां काले पत्थर का मनोहारी शिवलिंग निकला। सेठ पांडुरंग ने स्वयंभू शिवलिंग के लिए मंदिर का निर्माण कराया।


बाबुलनाथ मंदिर के नामकरण में ऐसा भी कहा जाता है कि शिवलिंग के पास एक बबूल का वृक्ष था जिसे मराठी में बाभूल या बाबुल कहा जाता है इसलिए इस शिवलिंग का नाम बाबुलनाथ पड़ गया। तीसरा तर्क यह भी बताया जाता है कि बाबुल या बाबा शब्द का अर्थ पिता होता है और भगवान शंकर त्रिभुवन के पिता हैं जो उनके नाम के लिए सर्वथा सुसंगत व यथार्थ भी है।


कार्यक्रम
श्रावण मास में आरती का समय प्रति सोमवार को सायं छह बजे होगा, अन्य दिनों में आरती का समय रात आठ बजे होता है। श्री बाबुलनाथ महादेव देवालय संस्था के प्रबंधक भरत मार्फेटिया ने बताया कि सावन महीने में मंदिर में विशेष घृत-पूजा होगी। इस अवसर पर झांकी के दर्शन होंगे। 17 जुलाई को श्री गणेश पार्वती का शिव पूजन,19 को श्री राम लक्ष्मण का रामेश्वर पूजन, 22 को कैलाश में शिव परिवार, 24 को वीर अर्जुन को शिवजी का पशुपतास्त्र प्रदान, 26 को शिवजी का कुम्भ स्नान, 29 को ओम शिवजी का आनंद तांडव नृत्य, दो अगस्त को शिवपार्वती युगल दर्शन, 4 को शिवजी द्वारा मार्कण्डेय उद्धार, पांच को श्री हरिहर एक स्वरूप,7 को विराट शिवमुख दर्शन, 9 को शिवजी का निर्गुण रूप,10 को श्री शिव परिवार का नौका विहार,12 को शिव पार्वती का झूला विहार,15 को पार्वती का शिवपूजन और तपस्चर्या, 17 को शिव पंचायतन दरबार, 19 को श्री चंद्रदेव की शिव आराधना, 21 को विराट शिवमुख दर्शन, 24 को जन्माष्टमी, 26 को निर्गुम शिव के दर्शन, 29 को गंगा अवतरण, 30 को शिवजी की कैलाश सवारी झांकी के दर्शन होंगे।