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शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा रैली को लेकर ठनी

उद्धव को बीएमसी से अब तक नहीं मिली मंजूरी, शिंदे गुट भी कर रहा तैयारी कोरोना पाबंदी के कारण दो साल बाद फिर हो रहा सार्वजनिक आयोजन

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शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा रैली को लेकर ठनी

शिवाजी पार्क में शिवसेना की दशहरा रैली को लेकर ठनी

मुंबई. बगावत के बाद दो फाड़ शिवसेना की दशहरा रैली को लेकर पार्टी के दोनों गुटों में ठन गई है। शिवाजी पार्क में रैली के लिए उद्धव ठाकरे ने अर्जी लगाई है, जिसे मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) से मंजूरी नहीं मिली है। वहीं भाजपा के सहयोग में सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का खेमा दशहरा रैली की तैयारी में है। खुद को असली शिवसेना बताने वाला शिंदे खेमा भी इसके लिए बीएमसी से अनुमति मांग सकता है। गेंद अब बीएमसी के पाले में है। जिसे मंजूरी मिलेगी, वही दशहरा रैली संबोधित करेगा।

बालासाहेब ठाकरे की है परम्परा
विदित हो कि शिवसेना कार्यकर्ताओं के लिए दशहरा रैली अहम है। पूरे राज्य के शिवसैनिक इसमें शामिल होते हैं। पार्टी के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने इसकी शुरुआत की थी। उनके निधन के बाद उद्धव ठाकरे दशहरा रैली को संबोधित करते रहे हैं। कोरोना पाबंदियों के चलते दो साल यह रैली नहीं हुई। शिवसेना पर कब्जे की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। चुनाव आयोग में भी मामला है। पार्टी की कमान किसे मिलेगी, इसका फैसला संविधान पीठ करेगी।

धनुष बाण पर शिंदे गुट का भी दावा
अगले कुछ महीनों में बीएमसी सहित कई महानगर पालिकाओं के चुनाव होने हैं। इसे लेकर भी खींचतान बढ़ गई है। दोनों ही गुट एक-दूसरे को कोस खुद को सही बता रहे हैं। पार्टी के 55 में से 40 विधायक और 18 में से 12 सांसद (लोकसभा) शिंदे गुट के साथ हैं। शिंदे गुट बड़ी संख्या में पूर्व विधायकों-पार्षदों के समर्थन का भी दावा कर रहा है।

इसी का हवाला देते हुए शिंदे गुट ने चुनाव आयोग में शिवसेना के चुनाव चिन्ह धनुष-बाण पर दावा किया है। शिवसेना की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक इस बाबत कोई भी फैसला करने से चुनाव आयोग को मना किया है।