
जीएन साईबाबा नहीं होंगे रिहा! सुप्रीम क्कोर्ट का बड़ा फैसला
GN Saibaba Maoist Case: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High) को प्रोफेसर जीएन साईबाबा (GN Saibaba) के माओवादियों से कथित संबंध मामले में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) के पूर्व प्रोफेसर साईबाबा और पांच अन्य को बरी करते हुए उनकी रिहाई का फैसला सुनाया था। कोर्ट के निर्णय को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए आज शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को ही रद्द कर दिया जिसमें कथित माओवादी संबंध के लिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जीएन साईंबाबा और अन्य अभियुक्तों को आरोपमुक्त किया गया था। यह भी पढ़े-Maharashtra: 'मैं किसी के बाप से नहीं डरता', अजित पवार और संजय राउत में बढ़ी रार
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले की नए सिरे से सुनवाई करने और चार महीने के भीतर फैसला सुनाने का भी निर्देश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से साईंबाबा और अन्य की अपील उसी पीठ के समक्ष नहीं रखने के लिए कहा है, जिसने उन्हें बरी किया था। इस मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष भेजने का आदेश दिया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने बीते साल अक्टूबर महीने में यूएपीए (UAPA) केस में जेल में बंद कथित नक्सल विचारक (Naxal Ideologue) जीएन साईबाबा और उनके पांच सहयोगियों को प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों से संबंध रखने के आरोप से बरी कर दिया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए जीएन साईबाबा और पांच अन्य की रिहाई पर रोक लगा दी थी।
GN साईबाबा पर क्या है आरोप?
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की एक अदालत ने 2017 में उन्हें और अन्य को माओवादियों से संबंध रखने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसी गतिविधियों में संलिप्तता के लिए सजा सुनाई थी। तब से वह नागपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। इस मामले में उन्हें 2014 में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तारकिया गया था।
साईबाबा की पत्नी वसंता कुमारी के मुताबिक, साईबाबा ह्रदय और किडनी रोग समेत कई अन्य रोगों से ग्रस्त हैं। साईबाबा 90 फीसदी विकलांग हैं और व्हीलचेयर पर चलते हैं। माओवादियों से कथित संबंध के चलते उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज (Ram Lal Anand College) ने सहायक प्रोफेसर के पद से बर्खास्त कर दिया है।
Published on:
19 Apr 2023 02:26 pm

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