
मीठी नदी का होगा कायाकल्प
मुंबई. मनपा ने मीठी नदी का कायाकल्प करने का निर्णय लिया। बीएमसी की यह योजना है मीठी नदी का विकास कर उसे पर्यटन के योग्य बनाया। इस कार्य के लिए बीएमसी प्रशासन ने सलाहकार की नियुक्ति करने का निर्णय लिया। बीएमसी ने मीठी नदी के विकास के लिए सलाहकार की नियुक्ति करने के लिए ई निविदा निकाली थी। निविदा प्रक्रिया में स्वीडन की एक कंपनी को चुना गया। यह कंपनी निविदा की शर्तों और नियमों के अनुकूल है। यह कंपनी को स्वीडन में बेहतर काम का अनुभव है। कंपनी का नाम वी एल स्वीडिश एनवायरमेंटल रिसर्च इंस्टीयूट कंपनी है। बीएमसी इस सलाहाकर कंपनी पर तकरीबन 21 करोड़ रुपए खर्च करेगी।
नदी की कुल लंबाई तकरीबन 17.84 किमी
मीठी नदी पवई और विहार से तालाब के ओवरफ्लो पानी से बनी हुई है। यह सिप्ज,मरोल अंधेरी से मुंबई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के रनवे के नीचे से होकर, बैल बाजार कुर्ला, बांद्रा-कुर्ला काम्प्लेक्स होते हुए अंत में माहिम की खाड़ी के पास अरब समुद्र में मिलती है। मीठी नदी की कुल लंबाई तकरीबन 17.84 किमी है। उगम स्थान से लेकर 11.84 किमी बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आता है,जबकि बाकी 6 किमी एमएमआरडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है। मुंबई में वर्ष 2005 में आई भयानक बाढ़ के बाद लोगों को मीठी नदी के बारे में पता चला। बाढ़ में सैकड़ों लोगों की जान गई और बहुत नुकसान हुआ।
तीसरे चरण में आने वाले मल प्रवाह को रोकने के लिए कार्य
इसके बाद राज्य सरकार ने मीठी नदी को सुधारने और साफ करने का निर्णय लिया। बीएमसी ने मीठी नदी का विकास करने के लिए सलाहकर नियुक्त करने का निर्णय लिया, जिसके बाद सलाहकार ने चार चरणों मे मीठी नदी को साफ कर विकसित करने की सलाह दी थी, जिसके तहत पहले चरण में फिल्टरपाड़ा से पवई जल विभाग यार्ड तक 2 किमी नदी के पास सर्विस रोड बनाने,दूसरे चरण में पवई जल विभाग यार्ड से सीएसटी पुल, कुर्ला तक मल प्रवाह बदलने का रास्ता तैयार करने, मल जल को शुद्ध करने का केंद्र और नदी के पास सर्विस रोड बनाना तथा तीसरे चरण में मीठी नदी में आने वाले मल के प्रवाह को रोकने का काम करना है। चौथे चरण में बापट नाला से नए घाटकोपर तक पंपिंग केंद्र तक मलजल बोगदा बनाना है। इस कार्य के बाद मीठी नदी मुंबई में आकर्षण का केंद्र होगी।
Published on:
30 May 2019 07:05 pm
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