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सबसे बड़ा शत्रु है अहंकार

पवई में पंडित तुलसी शरण ने कहा

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Mumbai

सबसे बड़ा शत्रु है अहंकार

मुंबई, भगवान राम की महिमा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पवई के आईआईटी स्थित चैतन्य नगर के परिसर में मानस मित्र मंडल के तत्वावधान में आयोजित राम कथा में पंडित तुलसी शरण ने कहा मनुष्य के आंतरिक शत्रु काम क्रोध लोभ और मद अर्थात अहंकार में सबसे बड़ा शत्रु अहंकार होता है। महाराज ने कहा अहंकार जिस मनुष्य को हो जाय, उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है और उसका विनाश हो जाता है।
काम को अहंकार हो गया कि जब वे शिवजी को अपनी कामशक्ति से पराजित कर दिए तो मनुष्य के रूप में जन्मे राम की क्या विसात। काम और राम में युद्ध होता है जिसमें राम काम को आसानी से पराजित कर देते है। जहाँ काम समाप्त होता है वहा राम नाम प्रारम्भ होता है। जहां लोभ क्रोध नही होता, वहां राम विराजमान होते है। राम का नाम तभी हृदय में स्थापित होगा जब मनुष्य काम क्रोध लोभ मद और मत्सर अर्थात ईष्र्या पर विजय प्राप्त कर सके और इन पर विजय रामकथा के श्रवण से ही संभव है। राम कथा श्रवण से ही मनुष्य की आसुरी मनोवृत्तियां बदल कर दैवीय हो जाएंगी।