24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Light pollution : शहरों में रात की तेज रोशनी जीवन में कर रही अंधेरा!

प्रकाश प्रदूषण Light pollution से बदला इंसान और जीव-जंतुओं नींद चक्र- 80 फीसदी दुनियाभर की आबादी प्रकाश-प्रदूषण की चपेट में- 99 फीसदी लोग अमरीका और यूरोप के कई शहरों में प्रभावित- 2.2 फीसदी प्रति वर्ष वैश्विक भू-क्षेत्र पर बढ़ रहा प्रकाश प्रदूषण

3 min read
Google source verification

मुंबई

image

arun Kumar

Oct 01, 2022

LED Light : शहरों में रात की तेज रोशनी जीवन में कर रही अंधेरा!

LED Light : शहरों में रात की तेज रोशनी जीवन में कर रही अंधेरा!

अरुण कुमार

जयपुर. देश-दुनिया के बड़े शहरों में रोशनी से नहाई जगमग रातें भले ही लोगों को आकर्षित करती हैं लेकिन इनका स्याह सच पर्यावरण के साथ इंसान और जीव-जंतुओं को तबाह कर रहा है। आर्टिफिशियल लाइट एट नाइट : स्टेट ऑफ द साइंस 2022 के अध्ययन के अनुसार 2012 के बाद से प्रकाश प्रदूषण Light pollution की तेजी और भू-क्षेत्र को कवर करने की गति औसतन 1.8 फीसदी और 2.2 फीसदी प्रति वर्ष बढ़ रही है। शोध में कहा गया है कि दुनिया की 80 फीसदी आबादी प्रकाश-प्रदूषित वातावरण में रह रही है। अमरीका-यूरोप के कई शहरों में प्रकाश प्रदूषण 99 फीसदी तक है। इसी तरह ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों से निष्कर्ष निकाला है कि यूके, इटली और आयरलैंड में सर्वाधिक जबकि ऑस्ट्रिया, जर्मनी और बेल्जियम में कम एलईडी रोशनी दिखाई देती है। सितंबर 2022 में साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि सोडियम लाइट की तुलना में एलईडी कम तरंग दैध्र्य पर तेज प्रकाश उत्सर्जित करती है, जो पर्यावरण के नुकसान के साथ मानव और जीव-जंतुओं का नींद चक्र खराब कर रहा है। आंखे अंधेरे में कम देख पा रही हैं। श्रीर में मेलाटोनिन हार्मोन बनना बंद हो रहा है, इससे रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो रही है और कोलेस्ट्राल तेजी से बढ़ रहा है।

मेट्रो शहरों में तेजी से टूट रहा नींद चक्र
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार रात में सोने से 30 मिनट पहले मोबाइल को छोड़ देना ही बेहतर है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरु, चेन्नई, कोलकाता, पुणे, हैदराबाद और गोवा में सड़कों, फ्लाईओवर और सार्वजनिक स्थानों पर एलईडी रोशनी से इंसान और जीव-जंतुओं का नींद चक्र टूट रहा है। इससे आखों की रोशनी कम, माइग्रेन, हार्ट डिजीज, डॉयबिटीज, मोटापा, कैंसर, नपुंसकता बढ़ रही है। प्रकाश प्रदूषण शरीर में कई विटामिन्स और पोषक तत्वों को भी तेजी से कम कर रहा है।

पालतू जानवर हो रहे ज्यादा आक्रामक
एलईडी और तेज सोडियम लाइटों के चलते देश के मेट्रो शहरों से जुगनू और कई प्रजातियों की मधुमक्खियां गायब हो गई हैं। समुद्र के किनारे कछुए हैचलिंग नहीं कर पा रहे हैं। कौए, गौरैया, बगुले व अन्य पक्षी शहर छोड़ रहे हैं। प्रवासी पक्षी आकाश में तेज रोशनी से रास्ता भटक कर मर रहे हैं। पालतू कुत्ते-बिल्लयों में काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। दुधारू पशुओं की नींद न पूरी होने से दूध कम हो रहा है।

फूलों की खुशबू 40 फीसदी तक हुई कम
प्राकृतिक प्रकाश पौधों के जीवन को बढ़ाता है, लेकिन कृत्रिम प्रकाश से पौधे ठिगने, पत्तियों का झडऩा, फूलों का छोटा होना, रातरानी और कैक्टस के फूलों में कमी और कई फलों के स्वाद बदल रहे हैं। प्रकाश पदूषण के चलते गुलाब, रातरानी, बेला आदि फूलों में खुशबू 40 फीसदी तक कम हुई है।

देश-दुनिया में सक्रिय हो रहे हैं लोग
- 2022 में पेन्सिलवेनिया शहर ने कम रोशनी वाले बल्बों का प्रयोग पुलों और सड़कों पर करना शुरू किया है।
- 2021 में उत्तरी कैरोलिना ने अध्यादेश जारी कर रेस्तरां व होटलों के बाहर तेज रोशनी प्रतिबंधित कर दी है।
- 2020 में जर्मनी ने कीटों पर संकट के चलते शाम से फ्लडलाइट पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- 2017 में मुंबई की कार्यकर्ता सुमैरा अब्दुलाली ने जुहू समुद्र तट पर एलईडी लाइटों के खिलाफ आवाज उठाई।
- 2016 में मुंबई के नीलेश देसाई ने फ्लड लाइटों का विरोध किया। सरकार ने 2018 में लाइटें बंद कर दीं।

हमारी लापरवाही को पीढिय़ां भुगतेंगी
प्रकाश प्रदूषण के बारे में लोगों की जानकारी बेहद कम है। प्रकाश प्रदूषण को मापने की कोई विधि अभी तक नहीं खोजी गई है मगर यह पर्यावरण और मानव जीवन को प्रभावित कर रहा है। हम इसे रोक भले नहीं सकते मगर कुछ सावधानियों से दुष्प्रभावों को खत्म या कम कर सकते हैं, अन्यथा इसका खामियाजा आने वाली पीढिय़ां भुगतेंगी।
- डॉ वेंकटेश दत्ता, पर्यावरण वैज्ञानिक, बीबीएयू, लखनऊ