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हजूरी बाबा की दरगाह पर तीन दिवसीय उर्स 20 से

ऐतिहासिक दरगाह-एक शाह की बादशाहत

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Mumbai news

हजूरी बाबा की दरगाह पर तीन दिवसीय उर्स 20 से

ठाणे.

ठाणे शहर वागले इस्टेट स्थित हजूरी इलाके में हजूरी बाबा के नाम से प्रसिद्ध दरगाह है। यह दरगाह लगभग दो सौ से ढाई सौ साल पुरानी दरगाह है। इस दरगाह में एक वली है जिनका नाम हाजी अमानुलाह शाह बाबा है। इनके नाम से बस्ती का नाम हजूरी पड़ा। सालों पहले यहा बियाबान जंगल था। बाबा उसी समय से यहां अपना स्थान बनाकर रहते थे और वली इस्लाम की तबलीग व अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते व भटके हुए को सही राह दिखात़े थे। इनकी दुनिया से रूकसदि के बाद बाबा का पहला उर्स दिनांक 12 रजब 1124 व अंगे्रजी सन् 1703 को मौजूदा मुजावर अनीश मुजावर के परदादा अब्दुल रहमान मुजावर ने मनाना शुरू किया।
दरगाह में जायरीनों की भीड़ व जरूरत को देखते हुए एक मुसाफिर खाना व मस्जिद 1909 में बनाई गई। उर्स में संदल और मेला का आयोजन आज भी यह परंपरा ट्रस्ट की ओर से चल रही है।
इस पवित्र धार्मिक मेले में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के महिला और पुरुष बड़ी संख्या में शामिल होकर बाबा का दर्शन करने के साथ मेले का आनंद लेते हैं।
ट्रस्टी अनीस मुजावर ने बताया कि हमारे समाज की महिलाओं को घर से बाहर निकलना बंधनकारी होता है, लेकिन बाबा के इस मेले में उनको भी घूमने का मौका मिलता है और बाबा के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने पर सारी मनोकामना पूर्ण होती है। उर्स के इस मौके पर मुजावर परिवार और ट्रस्ट कि ओर से बाबा का लंगर (भंडारा) भी रखा जाता है। इसके पहले दरगाह और ट्रस्ट की देेेख- रेेेख वर्तमान ट्रस्ट के अध्यक्ष अनीस के पिता स्वर्गीय अब्दुल कादिर व दादा रमजानी मुजावर ने भी बड़ी खि़दमत की और आज बाबा के करम से इस बियाबान जंगल में विशाल रहिवासी इलाके के रूप में बन गया और अब यहां कई मस्जिद और मंदिर स्कूलों का निर्माण किया गया है।


तीन दिवसीय उर्स की तैयारी


20 मार्च को दर्गाह की ओर संदल निकाला जाता है और 21 व 22 मार्च को ट्रस्ट और रहवासियों की ओर से निकाला जााता है। यह धार्मिक उर्स का मेला हिन्दू व मुस्लिम समुदाय के एकता की मिसाल कायम करता है। इसमें राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भी बाबा का दर्शन करने के लिए आते है।
इस मेले में बाबा का दर्शन करने के लिए नए कपड़े सिलाने की परंपरा है कि दर्जी को सिलाई करने के लिए फुर्सत नहीं मिलती है। आगामी 20 मार्च को सुबह नमाजे फजर गुसल, नमाजे जोहर कुरानखानी, नमाजे मगरीब के साथ कार्यक्रम सम्पन्न होता है।