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आम आदमी के संघर्ष की कहानी है ‘वो 3 दिन’

पत्नी-बेटी की खुशी के लिए मुसीबतों से घिरा रिक्शा चालक3 दिन में 3 हजार कमाने के चक्कर में बुरे फंसे रामभरोसे

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आम आदमी के संघर्ष की कहानी है 'वो 3 दिन'

आम आदमी के संघर्ष की कहानी है 'वो 3 दिन'

Mumbai. खुशहाल परिवार हर किसी की चाहत होती है। अपनों के चेहरे पर खुशी देखने के लिए लोग खून-पसीना एक कर देते हैं। 30 सितंबर को देश भर में रिलीज हो रही फिल्म 'वो 3 दिन' woh-3-din आम आदमी के संघर्ष की कहानी है। इस फिल्म में वो सब कुछ है, जो गरीबी के मारे परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है। कहानी उत्तर प्रदेश के दूर-दराज के गांव से शुरू होती है। नायक राम भरोसे (Sanjay Mishra) परिवार के गुजारे के लिए रिक्शा चलाता है। पत्नी-बेटी को खुश देखने के लिए वह खूब पैसे कमाना चाहता है। इसी कशमकश के बीच पुलिस (Rajesh Sharma) की इंट्री होती है। वह किसी का नाम-पता पूछता है। मन टटोल रिक्शा चालक को तीन दिन में 3000 रुपए rupees देने का लालच देता है। दिली ख्वाहिश पूरी होते देख राम भरोसे खुश हो जाता है। सवारी बिठा वह रिक्शा चलाने लगता है। सड़क पर आगे बढ़ते ही नदी है। पुल पार करते ही दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। परिवार की जिंदगी संवरने की आस लिए आगे बढ़ा राम भरोसे खुद मुसीबतों के चक्रव्यूह में घिर जाता है। जान पर बन आती है। राम भरोसे का संघर्ष देख कई लोग भावुक हो सकते हैं। वह बार-बार कहता है कि मैं दोबारा इस तरह का काम नहीं करूंगा...मैं मेहनत से कमाता हूं साहब। तमाम परेशानियों से राम भरोसे कैसे उबरता है, इसके लिए तो फिल्म देखनी होगी। दर्शकों के मनोरंजन के लिए सस्पेंस, थ्रिलर, ड्रामा और भय ही नहीं पारिवारिक रिश्तों का भावुक ताना-बाना भी है इसमें। संदेश सकारात्मक है। कहानी दमदार है। संवाद असरदार है। फिल्म में तीन गाने हैं, जिन पर आंचलिकता की छाप है।

कहानी तय करती है किरदार
निर्देशक राज आशू Raj Ashu ने कहा कि कहानी अपना किरदार खुद तय करती है। इसमें सभी किरदार जमीन से जुड़े हैं। बड़े स्टार इसमें फिट नहीं बैठते हैं। रामभरोसे की मंशा गलत नहीं है। वह बेटी को पढ़ाना चाहता है ताकि बेहतर जिंदगी जी सके। अधेड़ होने के बावजूद वह मेहनत से नहीं भागता। परेशानी की वजह है समाज की सोच। टैक्सी का किराया भले लोग दो-तीन हजार दे देते हैं। मगर, रिक्शा चालक से 5-10 रुपए के लिए सौदेबाजी करते हैं।

कैसा रिस्पांस मिल रहा?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमें अच्छा रिस्पांस मिला है। फॉल्कन इंटरनेशनल फेस्ट (लंदन) और लैटीट्यूड फिल्म्स से गोल्ड अवॉर्ड मिल चुका है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर जारी किया है। इसे अच्छी सराहना मिली है। सभी कलाकारों ने किरदार में जान डालने के लिए पसीना बहाया है। हमें उम्मीद है कि दर्शकों का प्यार मिलेगा। कहानी काल्पनिक जरूर है, मगर आम इंसान के साथ गहरा नाता है।

जमीन से जुड़ी कहानी
निर्माता पंचम सिंह Pancham Singh ने कहा कि कहानी जमीन से जुड़ी है। देश में काफी विकास हुआ है। गांवों में भी जीवन स्तर सुधरा है। रहन-सहन का तरीका बदला है। बावजूद इसके हर गांव में रामभरोसे जैसे लोग मिल जाएंगे। हमारी कोशिश है कि युवा पीढ़ी खूब तरक्की करे, मगर जमीन और जड़ों से जुड़ी रहे।


निर्देशक: राज आशू
निर्माता: पंचम सिंह
कलाकार: संजय मिश्र, राजेश शर्मा, चंदन रॉय सान्याल, राकेश श्रीवास्तव, पायल मुखर्जी, पूर्वा पराग व अन्य
कहानी-संवाद: सीपी झा