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प्राइवेट कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बढ़ जाएगी 10 गुना तक पेंशन

इस फैसले के बाद ज्यादा हिस्सा ईपीएस वाले फंड में जाएगा मौजूदा समय में ईपीएफओ 15,000 रुपए वेतन की सीमा के साथ गणना करता है 1 सितंबर 2014 से काम करने वाले कर्मचारी फुल सैलरी पर ले सकेंगे पेंशन का लाभ
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Saurabh Sharma

Apr 02, 2019

Supreme court

प्राइवेट कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बढ़ जाएगी 10 गुना तक पेंशन

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए करोड़ों प्राइवेट कर्मचारियों को खुश कर दिया हैै। अब रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में इजाफा हो जाएगा। यह इजाफा कुछ नहीं बल्कि 10 गुना होने तक उम्मीद है। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जो केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। केरल हाईकोर्ट ने ईपीएफओ को आदेश दिया था कि वह रिटायर हुए सभी कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के हिसाब से पेंशन दे। मौजूदा समय में ईपीएफओ 15,000 रुपए वेतन की सीमा के साथ ईपीएफ की गणना करता है। इस फैसले के बाद प्रोविडेंट फंड में कमी आएगी क्योंकि अब ज्यादा हिस्सा पीएफ की जगह ईपीएस वाले फंड में जाएगा, लेकिन नए नियम से पेंशन इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी तो वह गैप भर ही जाएगा। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है।

ऐसे हुई ईपीएस की शुरूआत
ईपीएस यानी इंप्लाय पेंशन स्कीम की शुरुआत 1995 में हुई थी। कंपनी अपने कर्मचारी की सैलरी का अधिकतम सालाना 6,500 का 8.33 फीसदी ही इंप्लाॅय पेंशन स्कीम के लिए जमा कर सकता था। उसके करीब एक साल के बाद मार्च 1996 में इस नियम में बदलाव हुआ। बदलाव होने के बाद अगर कर्मचारी फुल सैलरी के हिसाब से स्कीम में योगदान देना चाहे और कंपनी भी राजी हो तो उसे पेंशन भी उसी हिसाब से मिलनी चाहिए।

फिर 18 साल के बाद हुआ नियम में बदलाव
ईपीएस के नियम में करीब 18 के साल के फिर से बदलाव किया गया। सितंबर 2014 में अधिकतम 15 हजार रुपए का 8.33 फीसदी योगदान को मंजूरी मिली। वैसे साथ में यह नियम भी रखा गया कि अगर कोई कर्मचारी फुल सैलरी पर पेंशन लेना चाहे तो उसकी पेंशन वाली सैलरी पिछली पांच साल की सैलरी के हिसाब से तय होगी। इससे पहले तक यह पिछले साल की औसत आय सैलरी पर तय हो रहा था। इससे कई कर्मचारियों की सैलरी काफी कम हो गई।

कोर्ट में पहुंचा मामला
सैलरी कम होने के बाद इस तरह के मामले कोर्ट में पहुंचे। केरल हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2014 को हुए बदलाव को रद्द करते हुए पुराना सिस्टम दोबारा चालू कर दिया। जिसके बाद पेंशन वाली सैलरी पिछले साल की औसत सैलरी पर तय होने लगी। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ से कहा कि इसका फायदा उन लोगों को भी दिया जाए जो पहले से फुल सैलरी के बेस पर पेंशन स्कीम में योगदान दे रहे थे। इस फैसले से कई कर्मचारियों को फायदा हुआ। खास बात ये है कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले प्रवीण कोहली की पेंशन 2,372 रुपए से 30,592 रुपये हो गई। जिसके बाद उन्होंने बाकी कर्मचारियों में भी इसकी जागरुकता फैलाई

ईपीएफओ ने की आनाकानी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ईपीएफओ ने आनाकानी शुरू कर दी। संस्था ने उन कंपनियों इस फायदा देने से इंकार कर दिया तो ट्रस्ट द्वारा संचालित होते हैं। ताज्जुब की बात तो ये है कि देश की नवरत्न कंपनियों में शामिल ओएनजीसी, इंडियन ऑयल कंपनियों का अकाउंट भी ट्रस्ट ही मेंटेन करता था। तब तक देश के कई राज्यों के हाईकोर्ट में केसों की बाढ़ आ गई। जिसमें सबने इस स्कीम में शामिल करने के लिए कहा। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि यह मामला अब पूरी तरह सुलझ गया है।