साल 2018 में इनकम टैक्स ऐक्ट में हुए ये 6 बड़े बदलाव, आपकी जेब पर ऐसे होगा असर

पत्रिका आपको बीते एक वर्ष में इनकम टैक्स से जुड़े तमाम बदलावों के बारे में अवगत कराएगा, ताकि आपको किसी प्रकार की दिक्कत का सामना ना करना पड़े।

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Updated: 24 Dec 2018, 05:42 PM IST

नई दिल्ली। साल 2018 के आम बजट में टैक्स से जुड़े कई बदलावों की घोषणा की गई थी जो अप्रैल से ही लागू भी हो गए थे। इनकम टैक्स रिटर्न भरने का समय पास आ रहा है। ऐसे में पत्रिका आपको बीते एक वर्ष में इनकम टैक्स से जुड़े तमाम बदलावों के बारे में अवगत कराएगा, ताकि आपको किसी प्रकार की दिक्कत का सामना ना करना पड़े।


लेट से ITR फाइल करने पर जुर्माना

लेट से इनकम टैक्स फाइलिंग पर पेनल्टी की घोषणा 2017 के बजट में ही गई थी, लेकिन ये 2018 से लागू हुआ। दरअसल इनकम टैक्स ऐक्ट में एक नया सेक्शन 234 एफ जोड़कर ऐक्ट को संशोधित किया गया था, जिसके अनुसार, करदाता द्वारा ड्यू डेट के बाद आईटीआर फाइल करने से उसपर अधिकतम 10,000 रुपए की पेनल्टी लगाई गई थी। हालांकि, जिनकी आय एक वित्त वर्ष में 5 लाख रुपए से कम है, उन्हें इस पेनल्टी में राहत दी गई थी। छोटे करदाताओं की पेनल्टी रकम केवल एक हजार रुपए ही रखी गई थी।


सेस में हुआ था इजाफा

इस साल टैक्स के भुगतान पर सेस में एक फीसदी की बढ़ोतरी भी की गई थी। यह पहले तीन फीसदी थी, जो अब बढ़कर चार फीसदी हो गई है। 1 अप्रैल 2018 को सेस में किए गए इस बदलाव का नाम 'एजुकेशन ऐंड हेल्थ सेस' रखा गया था।


आईटीआर में संशोधन के लिए समय-सीमा

अप्रैल 2018 से अगर कोई करदाता इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करता है, तो वह उस वित्त वर्ष के अंत तक ही इसमें हुई किसी तरह की गलती का संशोधन कर सकता है। इस तरह, अगर कोई रिटर्न असेसमेंट ईयर 2018-19 में फाइल किया गया है, तो टैक्सपेयर के पास इसमें संशोधन के लिए 31 मार्च 2019 तक का ही वक्त होगा।


सिनियर सिटिजंस के लिए बड़ी छूट

सीनियर सिटिजंस को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स ऐक्ट में एक नया सेक्शन 80 टीटीबी भी जोड़ा था। इस सेक्शन के तहत इंट्रेस्ट से कमाई गई 50 हजार रुपए की तक की आय पर टीडीएस नहीं लगेगा। सिनियर सिटिजंस इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इसका लाभ उठा सकते हैं।


मेडिकल रिंबर्समेंट और ट्रांसपोर्ट अलाउंस की जगह स्टैंडर्ड डिडक्शन

इतना ही नहीं, इस साल के बजट में मेडिकल रिंबर्समेंट और ट्रांसपोर्ट अलाउंस की जगह स्टैंडर्ड डिडक्शन लाया गया है। करदाता इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त सैलरी से हुई आय के लिए मेडिकल रिंबर्समेंट और ट्रांसपोर्ट अलाउंस की जगह 40 हजार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ उठा सकते हैं।


एलटीसीजी टैक्स को लाया गया

2018 के बजट में इक्विटी शेयर और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड की बिक्री पर फिर से एलटीसीजी (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) टैक्स को लाया गया था। इसके तहत, शेयर या शेयर आधारित म्यूचुअल फंड को एक साल से अधिक समय तक रखकर उसकी बिक्री से हुई एक लाख रुपए से अधिक की आय पर 10 फीसदी की दर से एलटीसीजी टैक्स लगेगा।

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