महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे की इस हिन्दूवादी संगठन ने धूमधाम से मनाया बलिदान दिवस

गोडसे के लिए की भारत रत्न और धरती पुत्र सम्मान की मांग

By: Iftekhar

Published: 15 Nov 2018, 08:41 PM IST

मुजफ्फरनगर. अखिल भारत हिंदू महासभा ने गुरुवार को अपने पार्टी कार्यालय पर नाथू राम गोडसे का 69वां बलिदान दिवस मनाया। इस अवसर पर हिंदू महासभा कार्यकर्ताओं ने नाथूराम गोडसे को देश का अमर सपूत बताते हुए उनके नाम से मेरठ जिले का नाम बदलने की मांग की। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर रखने की मांग की। हिंदू महासभा कार्यकर्ताओं ने इस दौरान नाथूराम गोडसे के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

इस अवसर पर अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा ने कहा कि आज पार्टी के कैंप कार्यालय पर नाथूराम गोडसे का बलिदान दिवस मनाया गया। उनके बलिदान दिवस पर हिंदू महासभा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती है और उनके पदचिह्नों पर चलकर इस देश को बचाने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे ने केवल देश सेवा के लिए गांधी का वध किया था। अगर गांधी का वध नहीं होता तो देश के अनेक टुकड़े हो जाते और भारत कई भागों में बांट कर रह जाता। महात्मा गांधी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण ही देश गुलामी की ओर बड़ा था और इसी कारण मजबूर होकर उन्होंने गांधी का वध का निर्णय लिया और गांधी का वध किया।

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उन्होंने कहा कि देशवासियों को भी उन्हीं के पदचिह्नों पर चल कर आगे देश बचाना चाहिए, क्योंकि गांधी की नीतियों पर चलकर केवल देश गुलाम हो सकता है। आजादी नहीं मिल सकती और न ही देश को बचाया जा सकता। इसलिए सभी देशवासियों से हिंदू महासभा महसूस करती है। गोडसे की नीतियों पर चलें और गोडसे की नीतियों पर चलकर देश की रक्षा करें। इसके अलावा हिंदू महासभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि हम सभी अगर नाथूराम गोडसे को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो मेरठ शहर का नाम उनके नाम पर गडसे शहर रखा जाए और मुजफ्फरनगर का जो पुराना नाम है लक्ष्मीनगर, उसका भी पुनः मुजफ्फरनगर से बदलकर लक्ष्मी नगर रखा जाए। उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे को भारतरत्न या धरतीपुत्र की उपाधि दी जाए।

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भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना कुमार शर्मा ने कहा कि आज पंडित नाथूराम गोडसे की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन अंबाला जेल में पंडित नाथूराम गोडसे को अंबाला जेल में फांसी पर लटकाया गया था। आप सबको पता है कि गोडसे ने इतना बड़ा बलिदान क्यों दिया, क्योंकि भारत का विभाजन हो गया। गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने अंग्रेजों और मुस्लिम लीग के इस प्रस्ताव को स्वीकार करके और भारत का विभाजन करा दिया। भारत माता के टुकड़े कर दिए। गोडसे को लगा कि जब तक गांधी रहेगा, तब तक यह देश सुरक्षित नहीं है और देश के और भी टुकड़े होंगे और इसके साथ-साथ भारत के विभाजन के समय पाकिस्तान से जो हिंदू हिंदुस्तान आए थे, उनकी स्थिति बड़ी खराब थी। उन पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही थी। उसी के लिए गांधीजी ने कभी कोई आवाज नहीं उठाई। 55 करोड़ रुपए जो भारत को पाकिस्तान को देना था। उसके लिए उन्होंने अनशन कर दिया कि भारत सरकार जल्दी से जल्दी पाकिस्तान को वह राशि दे। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान भारत पर हमला कर रहा था। उसकी सेना हमारे सैनिकों को मार रहे थे। हमारी भूमि पर कब्जा किया जा रहा था और गांधी कह रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए दें। उन्होंने बताया कि इस तरह से कई ऐसे मुद्दे थे, जिससे गोडसे को लगा कि अगर गांधी जिंदा रहा तो यह देश सुरक्षित नहीं रह पाएगा। देश के टुकड़े-टुकड़े होने से बचाने के लिए मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने गांधी की हत्या का फैसला लिया और 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला हाउस में गांधी को गोली मारकर हत्या कर दी। उसी के आरोप आज ही के दिन उनको फांसी पर लटकाया गया था, जबकि हिंदुस्तान के लिए यह गर्व की बात है। गोडसे ने देश के लिए अपनी जान दी। युवा पीढ़ी उनको अपना आदर्श मानता है। इसीलिए अखिल भारत हिंदू महासभा गोडसे के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी को बताने के लिए हर वर्ष जन्मदिनऔर बलिदान दिवस मनाता है।

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