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चंदन चौहान का कद बढ़ाकर गुर्जरों को लुभा रहे या अखिलेश को चिढ़ा रहे जयंत?

अखिलेश ने चंदन को आरएलडी में भेज तो दिया लेकिन अब उनकी वापसी के रास्ते बंद होते नजर आ रहे है।

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चंदन चौहान के साथ आरएलडी मुखिया जयंत चौधरी (काली जर्सी में)

कॉपी- मुजफ्फरनगर से सटी और बिजनौर लोकसभा में आने वाली मीरापुर विधानसभा से राष्ट्रीय लोकदल के विधायक हैं चंदन चौहान। इसी हफ्ते पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 34 साल के चंदन को आरएलडी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया है।


अपनी पार्टी के युवा विधायक को संगठन में बड़ा पद देना एक आम खबर है लेकिन जब आप चंदन चौहान की राजनीति के बारे में जानेंगे तो समझ आएगा कि ये इतना सीधा नहीं है। अक्टूबर 2014 में जब चंदन के पिता संजय चौहान की हार्ट अटैक के बाद मौत हुई तो वो आरएलडी में ही थे। चंदन चौहान भी युवा रालोद में पदाधिकारी थे लेकिन 2014 में जिस तरह से अजित सिंह ने संजय चौहान की जगह जया प्रदा को बिजनौर से उम्मीदवार बना दिया था, उसने एक दूरी रिश्तों में ला दी थी।

संजय चौहान की मौत के बाद चंदन ने अखिलेश को माना अपना नेता
संजय चौहान की मौत के बाद 25 साल के चंदन के पास ना सिर्फ तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव बल्कि मुलायम सिंह यादव का भी फोन पहुंचा। रालोद में होने के बावजूद करीब 15 मिनट तक जिस तरह से पहले अखिलेश यादव और फिर मुलायम सिंह ने उनसे बात की। अखिलेश ने जिस तरह से साथ का भरोसा दिया, उसने चंदन को अखिलेश का बना दिया।


सपा सरकार में ही साल 2016 में चंदन सिंह ने अपने दादा, यूपी के पूर्व सीएम नारायण सिंह और पिता पूर्व सांसद संजय सिंह की याद में एक कार्यक्रम किया। नसीरपुर गांव में हुए इस कार्यक्रम में अखिलेश यादव खुद पहुंचे। अखिलेश यादव ने चंदन चौहान के घर जाकर उनकी दादी जगवती के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। चंदन की मां अनुराधा चौहान पति को याद कर भावुक हुईं तो अखिलेश ने कहा कि उनके होते हुए चंदन को अकेला ना समझें। अखिलेश के इस बर्ताव से बाबू नारायण सिंह का परिवार उनका मुरीद हो गया।

अखिलेश यादव ने जाते-जाते चंदन चौहान को चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा। इसके बाद उनको खतौली से चुनाव मैदान में उतारा। 2017 में भाजपा की लहर में चंदन चौहान चुनाव हार गए। इसके बावजूद वो अखिलेश यादव के करीबियों में बने रहे। 2022 में चंदन चौहान ने मीरापुर से टिकट मांगा तो अखिलेश ने उनकी बात मान ली लेकिन निशान मिला आरएलडी का नल।


भरोसे के चलते अखिलेश ने दिलाया था आरएलडी से टिकट
बीते साल हुए विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद के गठबंधन ने एक प्रयोग किया था। मुजफ्फरनगर, मेरठ में कई सीटों पर सपा ने अपने नेताओं को आरएलडी के टिकट से चुनाव में उतारा था। इसमें एक चंदन चौहान भी थे।


अखिलेश के चंदन को आरएलडी में भेजकर चुनाव लड़ाने की एक वजह ये भी मानी गई कि वो उन पर भरोसा करते हैं। चुनाव लड़ने तक की बात तो ठीक थी लेकिन अब जयंत ने अपनी पार्टी के तमाम नेताओं को दरकिनार कर चंदन को संगठन के युवा मार्चा का अध्यक्ष बना दिया है।

सवाल ये उठता है कि अपने नेताओं को नजरअंदाज कर अखिलेश के करीबी को संगठन में इतना बड़ा पद देकर जयंत किस राजनीति को साध रहे हैं।

जयंत ने 2 वजह से बनाया जयंत को युवा मोर्चा का अध्यक्ष
जयंत ने चंदन को संगठन में पद देकर एक तीर से दो निशाने साध लिए हैं। इसमे एक संदेश सहयोगी सपा के लिए है तो दूसरा अपनी पार्टी के लिए।


पहला- गुर्जर वोटों पर निशाना
चंदन चौहान एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। 1978-79 में यूपी के उप मुख्यमंत्री रहे उनके दादा बाबू नारायण सिंह कई जिलों में राजनीतिक दखल रखते थे। खासतौर से कैराना, बिजनौर, मुजफ्फरनगर के गुर्जरों में उनका असर था। उनके पिता संजय चौहान भी विधायक और सांसद रहे। चंदन का कद भले ही अभी पिता या दादा जैसा नहीं है लेकिन उनका भी एक पकड़ अपने सजातीय वोटों पर हैं। मुजफ्फरनगर में आज भी उनका परिवार गुर्जर नेताओं में एक बड़़ा परिवार है।


जंयत जानते हैं कि सिर्फ जाट और मुस्लिमों के दम पर आज के समय में चुनाव नहीं जीते जा सकते हैं। ऐसे में दलित और गुर्जर वोटबैंक की ओर देख रहे हैं। दलितों को साथ लेने के लिए उन्होंने चंद्रशेखर को साथ जोड़ा है। वहीं खतौली से मदन भैया को उतारकर तो अब चंदन को संगठन में बड़ा पद देकर वो गुर्जरों को लुभा रहे हैं। जाहिर है कि अगर जाट मुसलमान के साथ दलित और गुर्जर वोटों में जयंत सेंध लगा लेते हैं तो एक बड़ी ताकत पश्चिम यूपी में बन जाएंगे। चंदन को पद देने के पीछे यही कोशिश समझ आती है।

यह भी पढ़ें: मदन भैया की जीत, चंदन चौहान की ताजपोशी, कुंवर चैंपियन की सहारनपुर में एंट्री, पश्चिम में नया गुल खिलाएगी गुर्जर राजनीति?


दूसरा- अखिलेश को और सपा से आए नेताओं को संदेश
जयंत की पार्टी आरएलडी के इस समय 9 विधायक हैं। इसमें चंदन चौहान के अलावा, सिवालखास से गुलाम मोहम्मद और पुरकाजी से अनिल कुमार ऐसे हैं, जो विधानसभा से ठीक पहले तक सपा में थे। अखिलेश यादव ने इनको आरएलडी में भेजकर उम्मीदवार बनवाया।


जयंत चौधरी की ओर से चंदन को संगठन में पद देकर कहीं ना कहीं एक संदेश इन तीनों विधायकों के लिए दिया गया है। इन लोगों को वो बताना चाहते हैं कि कल सपा से उनका कोई टकराव हो तो उनको घबराने की जरूरत नहीं है। उनको आरएलडी में भी पूरा सम्मान मिलेगा।


जयंत ने अपने इस कदम से अखिलेश यादव को भी एक संदेश देने का काम किया है। उन्होंने अखिलेश को भी बता दिया है कि आप अपने उम्मीदवार भेजकर हमारी पार्टी से उम्मीदवार बनाएंगे तो हम उनको इतना अपना बना लेंगे कि वो हमारे ही हो जाएंगे। अखिलेश को उन्होंने जता दिया है कि उनके 9 विधायकों में कोई हिस्सेदारी वो ना समझें।

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