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मदन भैया की जीत, चंदन चौहान की ताजपोशी, कुंवर चैंपियन की सहारनपुर में एंट्री, पश्चिम में नया गुल खिलाएगी गुर्जर राजनीति?

पश्चिम यूपी में जाटों की राजनीति पर सबकी निगाह रहती हैं लेकिन फिलहाल जाटों से ज्यादा सियासी हलचल गुर्जरों के बीच है।

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खतौली विधायक मदन भैया (ब्लैक जैकेट में) चंदन चौहान(दाएं)

कॉपी- 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अभी एक साल से ज्यादा का वक्त है लेकिन इसकी आहट राजनीतिक गलियारों में सुनी जाने लगी है। पश्चिमी यूपी की राजनीति में काफी उठापटक देखने को मिलने लगी है। खासतौर से खतौली के उपचुनाव और उसके नतीजे ने पश्चिम के कई जिलों की सियासत में जो हलचल पैदा की है, वो अब रुकती नहीं दिख रही है।


पश्चिम यूपी को यूं तो जाटलैंड कहा जाता है लेकिन आजकल पश्चिम के जिलों में गुर्जरों के बीच सबसे ज्यादा सियासी हलचल है। सपा हो या रालोद, भाजपा हो या बसपा। सभी दलों के गुर्जर नेताओं के बीच काफी सक्रियता देखने को मिल रही है।


गुर्जरों के भाजपा के कमिटेड होने की छवि टूटी है
नोएडा से लेकर सहारनपुर तक गुर्जरों की एक बड़ी आबादी है। इसे देखते हुए यहां कोई भी दल इस जाति को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं लेता है। गुर्जरों को अपनी पहचान और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर मुखर रहने वाली जाति माना जाता रहा है। हालांकि यूपी में बीते करीब दो दशक में जो विधानसभा और लोकसभा चुनाव हुए। उनसे गुर्जरों की पहचान मौटे तौर पर भाजपा के कमिटेड वोटर के तौर पर बन गई।


'गुर्जर भाजपा का कमिटेड वोटर बन चुका है' इस छवि को तोड़ने का काम बीते साल दिसंबर में हुए खतौली के विधानसभा उपचुनाव ने किया है। इस चुनाव में आरएलडी ने गुर्जर जाति से आने वाले मदन भैया को चुनाव में उतारा। गुर्जर बहुल जिन गांवों से विधानसभा चुनाव में एकतरफा भाजपा को वोट मिले थे, उन्हीं गावों में उपचुनाव में आरएलडी के मदन भैया का जलवा दिखा और नतीजा ये रहा कि उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की।


खतौली उपचुनाव के बाद पश्चिम यूपी, खासतौर से सहारनपुर, बिजनौर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बागपत में गुर्जर राजनीति नई करवट लेती दिख रही है। गुर्जर नेताओं में कहीं बैचेनी तो कहीं उम्मीद दिख रही है। खासतौर से खतौली के नतीजों को गुर्जरों की भाजपा से नाराजगी को जोड़कर देखा जा रहा है।

खतौली जीतने के बाद जयंत ने चंदन पर लगाया दांव
हाल ही में जयंत चौधरी ने गुर्जर समाज से आने वाले मीरापुर विधायक चंदन चौहान को पार्टी के युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया है। इसे उनकी गुर्जरों को लुभाने की एक कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। उनको ये पद मिलने के बाद समर्थक दबी जुबान में ही सही उनको बिजनौर से लोकसभा का उम्मीदवार बनाने की बात भी कहने लगे हैं। बिजनौर से ही उनके पिता संजय चौहान भी सांसद रहे थे।


बिजनौर से इस समय भी गुर्जर जाति से ही आने वाले बसपा के मलूक नागर सांसद हैं। उनके एक बार फिर बिजनौर से लड़ने की अटकले हैं। वहीं बीजेपी की ओर से भी इस दफा 2019 में लड़े कुंवर भारतेंद्र की जगह गुर्जर उम्मीदवार आ सकता है। बीजेपी गुर्जरों के बीच सकारात्मक संदेश देने के लिए ऐसा कर सकती है। ऐसे में मुमकिन है कि बिजनौर से तीनों मुख्य दलों का कैंडिडेट गुर्जर हो।


सहारनपुर में सबसे ज्यादा खींचतान
इन दिनों सियासी हलचल सबसे ज्यादा सहारनपुर में देखने को मिल रही है। ये शुरू हुआ है कुवंर प्रवण चैंपियन के सहारनपुर से चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद। हरिद्वार की खानपुर सीट से पूर्व विधायक और उत्तराखंड सरकार में मंत्री रह चुके बीजेपी नेता कुवंर चैंपियन खुलकर कह रहे हैं कि वो सहारनपुर से चुनाव लड़ेंगे। अक्सर विवादों में रहने वाले चैंपियन ने सहारनपुर के गांवों का दौरा भी शुरू कर दिया है।


कुवंर चैंपियन के ऐलान के बाद देवबंद के मिरगपुर गांव के वीरेंद्र गुर्जर ने इस पर एतराज जता दिया है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद काफी चर्चा में रहे हिन्दूवादी छवि के भाजपा नेता वीरेंद्र का कहना है कि अगर गुर्जरों से किसी को सहारनपुर से टिकट मिलता है तो वो खुद इसके ज्यादा हकदार हैं।


उन्होंने साफतौर पर कहा कि चैंपियन को लड़ना है तो हरिद्वार से लड़ें, सहारनपुर में गुर्जर नेताओं की कमी नहीं है। दोनों भाजपा नेताओं ने खुलकर चुनाव लड़़ने की इच्छा जता दी है तो पार्टी किसके टिकट देगी, ये देखने वाली बात होगी।


फिलहाल सहारनपुर से कुरैशी बिरादरी से आने वाले फजलुर्रहमान सांसद हैं। उनके फिर से लड़ने के मजबूत दावे के बावजूद बसपा के गुर्जर नेताओं की निगाह भी सहारनपुर की सीट पर लगी हुई है। सपा-रालोद से भी गुर्जर नेता सहारनपुर से लड़ने वालों की लाइन में हैं। ऐसे में हो 2024 के लिए सहारनपुर के टिकट बंटवारे में गुर्जर को साधना सभी दलों की चुनौती रहेगी।

कैराना से भी कई उम्मीदवार
गुर्जरों के मजबूत गढ़ कैराना से सहारनपुर के कद्दावर गुर्जर नेता रहे पूर्व मंत्री चौधरी यशपाल के बेटे चौधरी इंद्रसेन चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। कैराना शामली जिले में आता है लेकिन कैराना लोकसभा में सहारनपुर शहर से सटी गंगोह विधानसभा भी आती है। सपा नेता इंद्रसेन गंगोह से बीता विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वो चुनाव लड़ने के लिए किस तरह तैयारी कर रहे हैं। उसका अंदाजा इससे लगा लीजिए कि एक इंटरव्यू में वो यहां तक कह चुके हैं कि टिकट ना मिलने की कोई गुंजाइश नहीं है, इलेक्शन मुझे लड़़ना ही है।


कैराना से सपा के सबसे मजबूत उम्मीदवार विधायक नाहिद हसन हैं। नाहिद भी गुर्जर जाति से ही आते हैं। नाहिद हसन या उनकी मां तबस्सुम हसन का टिकट अगर सपा से होता है तो मुमकिन है कि गंगोह के रहने वाले इंद्रसेन को सपा सहरानपुर से लड़ा दे। ऐसा होता है तो सहारनपुर में समीकरण और ज्यादा दिलचस्प हो सकते हैं।


बात कैराना की ही करें तो कैराना से भाजपा के मौजूदा सांसद प्रदीप गुर्जर फिर से चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका और उनके भतीजे अनिल चौधरी भी टिकट की दौड़ में हैं। भाजपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह की निगाह भी कैराना सीट पर है। वो अपने बेटे मनीष भी कैराना से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ये सभी नेता गुर्जर जाति से ही आते हैं।

मुजफ्फरनगर या बागपत में गठबंधन लगा सकता है गुर्जर उम्मीदवार पर दांव
मुजफ्फरनगर और बागपत के मौजूदा सांसद जाट समुदाय से आते हैं। बागपत से भाजपा के सत्यपाल सिंह तो मुजफ्फरनगर से संजीव बालियान सांसद हैं। 2019 में संजीव बालियन ने अजित सिंह तो सत्यपाल सिंह ने जयंत चौधरी को हराया था। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी फिर से उन उम्मीदवारों को 2024 में दोहरा सकती है।


वहीं गठबंधन से मुजफ्फरनगर में जाट या मुस्लिम उम्मीदवार आने की सबसे ज्यादा संभावना है। मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक का नाम चर्चा में भी है। हालांकि खतौली के बाद ऐसे भी कयास हैं कि गठबंधन संजीव बालियान के सामने गुर्जर नेता पर भी दांव लगा सकता है।

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अजित सिंह के निधन और जयंत चौधरी के राज्यसभा जाने के बाद बागपत से इस बार चौधरी चरण सिंह परिवार से बाहर का उम्मीदवार आने की भी संभावना है। अगर जयंत की पत्नी चारू चौधरी बागपत से चुनाव मैदान में नहीं उतरती हैं तो 1977 के बाद पहली बार चरण सिंह परिवार का सदस्य बागवत से चुनाव मैदान में नहीं होगा। नोएडा से मिलती हुई बागपत सीट से भी कई गुर्जर नेता सक्रिय हैं। बागपत में बसपा से गुर्जर नेता को लड़ाए जाने की संभावना सबसे ज्यादा है।

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