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मुजफ्फरनगर: कावंड़ियों के रंग में रंगा मुस्लिम समाज भी, श्रद्धालुओं पर जमकर बरसाए फूल

मुजफ्फरनगर में कांवड़िए पहुंचे तो यहां कई जगहों पर मुस्लिम समाज के लोग भी उनकी सेवा करते दिखे। साथ ही पानी पिलाकर कांवड़ियों की प्यास बुझाई।

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कांवड़ यात्रा 14 जुलाई से शुरू हो गई है। कोरोना के बाद से करीब दो साल बाद शुरू हुई कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। ऐसा ही एक दृश्य यूपी के मुजफ्फरनगर में देखने को मिला जहां शुक्रवार को हरिद्वार से चलकर कांवड़िए जब शहर में पहुंचे तो यहां हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम समाज के लोगों ने भी उन पर पुष्प की बारिश की और फूलों की माला पहाकर कांवड़ियों का स्वागत भी किया। वहीं मुस्लिम समाज के लोगों की अनूठी पहल से हिंदुओं में भी जोश और उत्साह देखने को मिला। गौरतलब है कि सावन के दौरान लोग पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान से कांवड़ लेने लोग हरिद्वार आते हैं। यहां से कांवड़ लेकर वह फिर पैदल मार्ग से होते हुए अपने घर की तरफ जाते हैं।

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कांवड़ यात्रा के लिए मुजफ्फरनगर अहम पड़ाव

आपको बता दें कि शिवरात्रि के दिन कांवड़ से लाए जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। कांवड़िए हरिद्वार से होकर रूढ़की होते हुए पहले मुजफ्फरनगर और फिर मेरठ होते हुए आगे बढ़ते हैं। यहीं कारण हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर को अहम पड़ाव माना जाता है। ऐसे में जब शुक्रवार को कांवड़िए मुजफ्फरनगर शहर पहुंचे तो यहां कई जगहों पर मुस्लिम समाज के लोग भी उनकी सेवा करते दिखे। साथ ही पानी पिलाकर कांवड़ियों की प्यास बुझाई।

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कांवड़ियों की सेवा के लिए कैंप की होती है व्यवस्था

इसके अलावा कांवड़ियों के कांवड़ रखने की जगह भी बनाई। क्योंकि कांवड़ को एक बार उठा लेने के बाद उसे जमीन पर नहीं रखा जाता है। ऐसे में कांवड़ को बल्ली या बांस के सहारे टिकाकर रखा जाता है। इसके बाद वहीं पर कांवड़ियों के लिए खाने-पीने और उनके आराम की भी व्यवस्था की जाती है। कांवड़ियों के रूट पर हजारों की तादात में ऐसे कैंप होते हैं जिन्हें लोग कांवड़ियों की सेवा के लिए लगाते हैं।

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