
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी 19 मई को अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं।
Nawazuddin Siddiqui Birthday: बॉलीवुड की दुनिया में अपने अभिनय से लाखों दिलों पर राज करने वाले एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) बॉलीवुड के सबसे टैलेंटेड एक्टर्स में से एक हैं। नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी 19 मई को अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। एक्टर ने अपने करियर में यहां तक पहुंचने के लिए कई पापड़ बेले हैं। उनके स्ट्रगल की कहानी भी किसी फिल्म से कम नहीं है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Happy Birthday Nawazuddin Siddiqui) का जन्मदिन है
करियर में एक लंबा संघर्ष करने के बाद नवाजुद्दीन ने धीरे धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है। अब वह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। आज हिंदी सिनेमा के मज़बूत स्तंभ नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Happy Birthday Nawazuddin Siddiqui) का जन्मदिन है।
19th May 1974 को उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर डिस्ट्रिक्ट के एक छोटे से गाँव बुढ़ाना में जन्मे नवाज़ुद्दीन की ज़िंदगी में कई उतार चढ़ाव आए मगर उनके सपनों के बीच में कोई नहीं आ सका। आज बर्थडे के खास मौके पर आइए जानते हैं नवाज की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ अहम और (Unknown Facts about Nawazuddin Siddiqui) अनसुनी बातों को जो बहुत कम लोग ही जानते होंगे...
पैसों के लिए एक खिलौने की फैक्ट्री में किया काम
नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के बारें में जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने काफी संघर्ष का सामना किया हैं। जी हां एक छोटे से शहर से आने वाले नवाज़ुद्दीन ने पैसों के लिए एक खिलौने की फैक्ट्री में एक सिक्योरिटी मैन तक की नौकरी की, जो उनके बेहद मुश्किल अनुभव रहा है।
नौकरी से निकाल दिया गया
एक इंटरव्यू के दौरान जब नवाज़ुद्दीन से एक सुरक्षाकर्मी के रूप में उनकी नौकरी की कहानी के बारे में पूछा गया, तो जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "मैंने नौकरी के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट का भुगतान करने के लिए पैसे का इंतजाम करने के लिए गहनों पर लोन लिया और सोचा कि एक बार जब मुझे नौकली मिल गई तो मैं ये चुका दूंगा। लेकिन मुझे नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि मैं बहुत कमजोर था।"
मन कितनी बार टूटा पर हमारे सामने कोई विकल्प नहीं था
नवाजुद्दीन ने कहा, 'धूप लगी थी तो मैं बेहोश होकर गिर गया। और जितनी बार भी गिरा, मालिक ने देखा इत्तेफाक से। बोले किस मरे हुए सिपाही को लेके आए हो। इसको हटाओ। मेरी जमा राशि देने से भी उन्होंने मना कर दिया। मन कितनी बार टूटा पर हमारे सामने कोई विकल्प तो था नहीं। हमारे ग्रुप धीरे-धीरे बनना शुरू हुए, जैसे राजपाल, विजय राज और हमारे सीनियर्स सौरभ शुक्ला और मनोज बाजपेयी। एक चीज रहती थी कि हमारे साथ थिएटर करने वाला बंदा जब वहां जा सकता है तो हम भी जा सकते हैं। एक ऐसा ही विश्वास था।
Published on:
19 May 2023 03:27 pm
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