मुजफ्फरनगर दंगा मामला: मुश्किल में बीजेपी के ये नेता, गैर जमानती वारंट जारी, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

2013 मुजफ्फरनगर दंगा मामले में बीजेपी सांसद संजीव बालियान और विहिप नेता साध्वी प्राची सहित कई नेताओं के खिलाफ गैर जमानती वारंट

By: Ashutosh Pathak

Updated: 05 Jun 2018, 10:49 AM IST

मुज़फ्फरनगर। साल 2013 में पश्चिमी यूपी के मुज़फ्फरनगर में जो सांप्रदायिक हिंसा की आग भड़की थी, उसकी आंच अभी भी सूबे की फिजाओं में महसूस की जा सकती है। कभी चुनावी मौसम में तो कभी नेताओं की बयनाबाजी में अक्सर इस चिंगारी को उड़ाते हुए देखते हैं, और राजनीति दल अपने-अपने फायदे के हिसाब से इसे भुनाते रहते हैं। लेकिन इन सब के बीच दंगो में बीजेपी नेताओं की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। जहां सत्ता में बीजेपी सरकार के आने के बाद दंगों के सभी केस वापस लिए जाने की खबरें आ रही थीं। वहीं खबर है कि बीजेपी के आरोपी नेताओं के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर दिए गए हैं।

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31 अगस्त 2013 में नगला मंदौड़ में हुई पंचायत में भड़काऊ भाषण देने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित 14 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिसमे तभी से कोर्ट में तारीख लग रही है। जिसके तहत 29 मई 2018 को सभी आरोपी बीजेपी नेताओं को पेश होना था लेकिन कुछ बीजेपी नेता कोर्ट में पेश नही हुए। जिस कारण पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान बीजेपी विधायक उमेश मलिक व विहिप नेत्री साध्वी प्राची के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिए है। अब इन बीजेपी नेताओं को 22 जून 2018 में एसीजीएम सेकेंड के सामने कोर्ट में पेश होना है।

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बीजेपी नेताओं के वकील चन्द्रवीर सिंह ने बताया कि ये 31 अगस्त 2013 का मामला है जिसमे 29 मई 2018 को चार्ज फ्रेम करने के लिए निश्चित की गई थी, क्योंकि पिछले 5 सालो में अब तक चार्ज फ्रेम नहीं हो पाया।

वहीं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान का कहना है कि उन्हें 29 मई को कोर्ट में पेश होना था जो कैराना में हुए लोकसभा उपचुनाव में बिजी होने के कारण कोट में पेश नहीं हो सके वे कोर्ट का सम्मान करते हैं और अगली निर्धारित तारीख पर कोर्ट में पेश होंगे।

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आपको बता दें कि ये घटना गांव मलिकपुरा की है जहां एक युवती से छेड़खानी से किए जाने पर 27 अगस्त 2013 को पीड़िता के दो भाई ने आरोपी शहनवाज से मारपीट की थी, जिसमें उसकी मौत हो गयी। इश घटना के बाद इलाके की गुस्साई भीड़ ने युवती के दोनों भाईयों को भी पीट-पीट कर मार डाला था। जिसके बाद दो दो समुदायों के बीच तनाव फैल गया। मामले के हल के लिए नगड़ा में एक पंचायत भी की गई जिसमें भड़काऊ भाषण दिए जाने का आरोप है। जिसके बाद ही मुजफ्फरनगर में दंगा भड़क गया। जिसमें 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल भी हुए थे।

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