मेरठ। कैराना प्रकरण में भाजपा विधायक संगीत सोम की निर्भय यात्रा शुरू तो हुई, लेकिन कुछ दूर जाकर खुद सोम ने धारा 144 का हवाला देते हुए यात्रा को रोक दिया। साथ ही सोम ने अखिलेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर 15 दिन के अंदर पलायन कर चुके लोग कैराना नहीं लौटे तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। बता दें कि प्रशासन की इजाजत के बगैर शुरू हुई यात्रा में सोम अपने समर्थकों के साथ अपने आवास से कैराना की तरफ निकले। रास्ते में पुलिस द्वारा रोके जाने पर सोम और समर्थक खेतों के रास्ते आगे बढ़ गए।

बताया जा रहा है कि सोम समर्थकों के हाथ में गंडासे, लाठी-डंडे और हथियार भी हैं। हालांकि सोम ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वह हथियार न रखें। उल्लेखनीय है कि मेरठ और कैराना प्रशासन ने सोम को इस निर्भय यात्रा की इजाजत नहीं दी थी। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के जवान जगह-जगह बेरिकेडिंग करके रास्ता रोके हुए हैं। सरधना जाने वाले सभी रास्तों को ब्लाक कर दिया गया है और सघन चेकिंग चल रही है, लेकिन सोम समर्थक रात में ही उनके आवास और आसपास जमा हो गए थे।

बता दें कि आगामी यूपी चुनाव से पहले कैराना प्रकरण पर सियासत तेज हो चली है। पहले कैराना सांसद हुकुम सिंह ने पौने दो लाख की आबादी में से बीते बीस सालों में पलायन करने वाले 346 हिंदू परिवारों की सूची जारी की थी। इस सूची पर तमाम सवाल भी उठ रहे हैं। इसके बाद कांधला के 63 परिवारों की सूची जारी की गई जिसे जनता ने ही खारिज कर दिया। गुरुवार को देवबंद से पलायन करने वाले 40 परिवारों की सूची दी जारी की गई है।
पलायन का मुद्दा उठने के बाद संगीत सोम ने ऐलान किया था कि वह कैराना को कश्मीर नहीं बनने देंगे और हिंदुओं के मन का भय निकालने के लिए वह अपने समर्थकों के साथ सरधना से कैराना तक पद यात्रा करेंगे। शुक्रवार को गहमागहमी के बीच सोम की पदयात्रा शुरू तो हुई, लेकिन कुछ दूर जाकर ही सोम ने अपना फैसला वापस ले लिया और यात्रा की समाप्ति की घोषणा कर दी। हालांकि इस दौरान उन्होंने अखिलेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 15 दिन में कैराना से पलायन कर गए लोगों को वापस नहीं लाया गया तो आगे इससे भी बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।