
Exclusive- 'ठाकरे' से खुश नहीं है शिवसेना, शिवसैनिक ने खोला चौंकाने वाला राज- देखे वीडियो
प्रवेश मलिक, मुजफ्फरनगर। महाराष्ट्र के हिंदूवादी नेता बाल ठाकरे पर आधारित फिल्म 'ठाकरे' (Thackeray) 25 जनवरी को देशभर के सिनेमाघरों में हिंदी और मराठी भाषा में रिलीज हो गई है। इसे देखने के लिए लोग भी काफी उत्सुक दिखाई दिए। 25 जनवरी को रिलीज होते ही लोगों ने फिल्म की काफी सराहना की। मुजफ्फरनगर की बात करें तो दर्शक तो फिल्म को पसंद कर रहे हैं लेकिन शिवसेना फिल्म को लेकर दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है। पार्टी आलाकमान फिल्म के समर्थन में है और चाहती है कि इस फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोग देखें।
गृह जनपद में काफी लोगों में उत्साह
नवाजुद्दीन सिद्दीकी को लेकर उनके गृह जनपद में लोगों में काफी उत्साह है। मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना के रहने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बाला साहब ठाकरे का किरदार निभाया है। फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे के मूल निवासी हैं। उनका पूरा बचपन कस्बा बुढ़ाना में ही बीता है। इसके बाद वह मुंबई चले गए। वहां बेहतरीन फिल्में देने के बाद नवाजुद्दीन ने फिल्म जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी गिनती एक मंझे हुए कलाकार में होती है।
खुश नजर नहीं आ रही है शिवसेना
ठाकरे फिल्म को लेकर मुजफ्फरनगर की शिवसेना खुश नजर नहीं आ रही है। वह आलाकमान की वजह से इस फिल्म का विरोध भी नहीं कर सकती है। आपको बता दें कि दो साल पहले नवाजुद्दीन सिद्दीकी बुढ़ाना में रामलीला में मरीच का मंचन करना चाहते थे। इसके लिए समय और डेट भी निर्धारित कर दी गई थी मगर शिवसेना ने इसका विरोध कर दिया था। जिससे नवाजुद्दीन सिद्दीकी का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। अब ऐसे में शिवसेना के पास चुप बैठने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
अफसोस जताया
शिवसेना के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ललित मोहन शर्मा ने पत्रिका संवाददाता से बातचीत में कहा कि बाला साहब ठाकरे ने पूरा जीवन हिंदुओं के लिए काम किए हैं। लोगों में उस फिल्म को देखने के लिए जोश और उत्साह है। इस पिक्चर में हिंदू हृदय सम्राट की तमाम नीतियां और उनके द्वारा हिंदुत्व के लिए किए गए कार्यों को दिखाया गया है। वे भी चाहते हैं कि इस फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोग देखें और शिवसैनिक भी देखें। नवाजुद्दीन सिद्दीकी द्वारा रामलीला में मंचन और शिवसेना द्वारा विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है क्योंकि बाला साहब बाल ठाकरे जीवन भर कट्टरवादी ताकतों के खिलाफ बोलते रहे हैं। अफसोस की बात है। अगर किसी हिंदू कलाकार द्वारा बाला साहब का किरदार निभाया जाता तो अच्छा था। नवाजुद्दीन सिद्दीकी पर स्थानीय स्तर पर बहुत गंभीर मुकदमे भी दर्ज हैं। शिवसेना ने रामलीला मंचन के दौरान विरोध भी किया था, जिस कारण नवाजुद्दीन अभिनय भी नहीं कर पाए थे। पार्टी हाईकमान द्वारा निर्णय लिया गया तो इस काम खुलकर विरोध भी नहीं कर सकते।
सरकार फिल्म को सराहा
उन्होंने कलाकार को लेकर कहा कि इससे पहले सरकार फिल्म भी आई है। उसमें अमिताभ बच्चन का बहुत अच्छा रोल रहा है जिसमें तरीके से बाला साहब ठाकरे का ही रोल था। पता नहीं क्यों पार्टी हाईकमान ने इस फिल्म के लिए नवाज़ुद्दीन को ही चुना। इसके साथ ही उन्होंने नवाजुद्दीन को समाजवादी पार्टी का समर्थक भी बताया। इसको भी उन्होंने विरोध का एक कारण बताया।
Updated on:
27 Jan 2019 01:05 pm
Published on:
27 Jan 2019 09:46 am
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