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कलयुग के इस कांवड़ यात्रा में दिखा सतयुग का श्रवण कुमार, देखकर सभी रह गए हैरान

शामली पहुंचने पर लोगों ने किया जोरदार स्वागत

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शामली. सतयुग के श्रवण कुमार की कहानी आज तक आपने लोगों के मुंह से सुनी होगी और किताबों में भी पढ़ी होगी, लेकिन आज आप जो देख रहे हैं यह नजारा कलयुग के श्रवण कुमार का है। कलयुग का यह श्रवण कुमार अपने कावड़ में माता-पिता को बिठाकर हरियाणा के पानीपत जा रहे हैं। दरअसल, बुढ़ापे की इस उम्र में इनके माता-पिता की इच्छा हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर भगवान शिव को जलाभिषेक करने की थी। बस किया था कलयुक के ये श्रवण कुमार अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए कांवड़ में उन्हों बैठाकर निकल पड़े।

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कलयुग का श्रवण भगवान के दर्शन के बाद हरिद्वार से पवित्र कावड़ में गंगाजल के साथ अपने बूढ़े माता-पिता को कंधों पर लेकर अपने गंतव्य पानीपत जा रहे हैं। इन दोनों सगे भाइयों का नाम तेजवीर और पप्पन है, जो पानीपत के विद्यानगर कॉलोनी निवासी है। दोनों सगे भाई गत एक अगस्त को हरिद्वार से इस पावन कावड़ यात्रा में पवित्र गंगाजल लेकर अपने मां-बाप को कांवड़ में बैठा कर चले थे। यह दोनों भाई कावड़ लेकर शामली पहुंचे तो उन्हों देखने के लिए स्थानीय लोगों का तांता लगा रहा।

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दरअसल, इन दोनों युवकों ने एक बार फिर लोगों के जेहन में सतयुग के श्रवण कुमार की याद दिला ताजा कर दी है। अपने कंधों पर बूढ़े मां-बाप शुक्कन और विष्मती को लेकर जाते हुए बेटे तेजवीर ने बताया कि हमें हरिद्वार से चले हुए आज 5 दिन हो गए हैं और हमें बहुत अच्छा लग रहा है। अपने मां-बाप को अपने कंधों पर यात्रा करवाते हुए। वहीं, मां-बाप की जुबान से सिर्फ अपने बच्चों के लिए दुआएं निकल रही है। सतयुग के बाद कलयुग के श्रवण कुमार के रूप में अपने मां-बाप को कंधों पर लेकर शामली के कावड़ मार्ग पर पहुंचे तेजवीर और पप्पन को देख हर एक को अपने मां-बाप की याद आ रही थी और इन दोनों के इस जज्बे को हर कोई सराहता दिखा। इतना ही नहीं शहर में विभिन्न स्थानों पर इस विशेष कांवड़ का लोगों ने फूल मालाओं से भव्य स्वागत भी किया।