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नागौर जिले में हुई अतिवृष्टि से 1.42 लाख किसान प्रभावित, मुआवजे का इंतजार

आदान-अनुदान के लिए तहसीलदारों ने किया वेरिफिकेशन, जिले में अब भी कई किसान वेरिफिकेशन से वंचित, पोर्टल बंद होने से अटका काम, जानकारी के अभाव में पटवारियों को दस्तावेज नहीं दे पाए किसान - वर्ष 2024 में करीब 9 हजार किसानों को मिली थी सहायता

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पिछले साल जिले में अतिवृष्टि से खेतों में पानी भरने से मूंग की कटी हुई फसलें डूब गई थी

पिछले साल जिले में अतिवृष्टि से खेतों में पानी भरने से मूंग की कटी हुई फसलें डूब गई थी

नागौर. जिले में बीते खरीफ सीजन के दौरान हुई अतिवृष्टि और बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी। लगातार बारिश के चलते जिले की सिंचित और असिंचित दोनों तरह की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 1 लाख 42 हजार किसान अतिवृष्टि से प्रभावित हुए हैं, जिनकी फसलों में 33 प्रतिशत से अधिक खराबा दर्ज किया गया। ऐसे किसानों को राज्य सरकार की आपदा राहत योजना के तहत आदान-अनुदान राशि देने की प्रक्रिया चल रही है।

नियमानुसार प्राकृतिक आपदा से प्रभावित काश्तकारों को फसल नुकसान के आधार पर सहायता राशि दी जाती है। इसके तहत सिंचित फसलों के लिए 17 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर तथा असिंचित फसलों के लिए 8500 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से आदान-अनुदान का प्रावधान है। इस राशि का उद्देश्य किसानों को अगली फसल की बुआई के लिए संबल देना है, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।

जिला प्रशासन के अनुसार खरीफ 2025 में बाढ़ से प्रभावित किसानों का संबंधित तहसीलदारों की ओर से वेरिफिकेशन कार्य किया जा रहा है। अब तक 1.42 लाख काश्तकारों का वेरिफिकेशन किया जा चुका है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है। हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान ऐसे भी हैं, जो जानकारी के अभाव में समय पर पटवारियों को दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा पाए, जिसके कारण उनका अब तक वेरिफिकेशन नहीं हो पाया हैं।

पोर्टल बंद होने से वंचित रहे कई किसान

कई किसानों ने बताया कि पोर्टल बंद हो जाने के कारण उनके दस्तावेज अपलोड नहीं हो पाए। वहीं, कुछ क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में किसान समय पर पटवारियों को आवश्यक दस्तावेज नहीं दे सके। इससे वे सहायता की सूची में शामिल नहीं हो पाए। किसानों का कहना है कि यदि पोर्टल दोबारा खोला जाए और वेरिफिकेशन की अवधि बढ़ाई जाए तो शेष प्रभावित किसानों को भी राहत मिल सकती है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह सतत प्रक्रिया है, जल्द ही पोर्टल वापस चालू किया जाएगा, उस समय वंचित किसानों के दस्तावेज अपलोड कर दिए जाएंगे। यानी खरीफ 2025 में प्रभावित किसानों की संख्या और बढऩे वाली है।

2024 के किसान कर रहे सहायता राशि का इंतजार

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में खरीफ सीजन की बाढ़ से प्रभावित 9 हजार 94 काश्तकारों को करीब 11 करोड़ 40 लाख 50 हजार 508 रुपए की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि कई किसानों को अब भी सहायता राशि का इंतजार है, जो बजट के अभाव में जारी नहीं की गई है। वहीं रबी 2024 में ओलावृष्टि से डेह तहसील के 281 किसानों को 6 करोड़ 87 लाख 28 हजार 817 रुपए का आदान-अनुदान दिया गया था। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार की ओर से समय-समय पर राहत देने के प्रयास किए गए हैं।

सतत प्रक्रिया है

अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को आदान-अनुदान की राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया लगातार जारी है। जैसे-जैसे बजट जारी हो रहा है, किसानों के खातों में राशि जमा करवाई जा रही है। जहां तक पोर्टल बंद होने की बात है कि जल्द ही पोर्टल वापस खोला जाएगा, उस समय जो किसान वंचित रह गए, उनके दस्तावेज अपलोड करके वेरिफिकेशन कर दिया जाएगा।

- अरुण कुमार पुरोहित, जिला कलक्टर, नागौर