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प्रदेश में 100 साल का रिकॉर्ड टूटा, नागौर जिले में मई तक 169 एमएम बारिश

Record of 100 years was broken in the Rajasthan : मई माह में सामान्यत: होती है 18.9 एमएम बारिश, इस बार 118.9 एमएम हुई, पश्चिमी विक्षोभ का असर, गर्मी के तेवर भी किए ठंडे

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169 mm of rain in May in the Nagaur district

169 mm of rain in May in the Nagaur district

नागौर. प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के बार-बार सक्रिय होने से पिछले दो-तीन महीने में हुई बारिश ने एक ओर जहां गर्मी के तेवर ठंडे किए, वहीं गर्मी के दिनों में नाडी-तालाबों में पानी भरने का काम भी किया है। इस बार मई माह में हुई 62.4 एमएम औसत बारिश ने पिछले 100 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग जयपुर के अनुसार इससे पहले वर्ष 1917 में 71.9 एमएम औसत बारिश प्रदेश में हुई थी। सामान्य तौर पर मई माह में 13.6 एमएम बारिश रिकॉर्ड की जाती है।

नागौर जिले की बात करें तो इस बार जिले में जनवरी से अब तक 169.3 एमएम औसत बारिश हुई है, जबकि अकेले मई माह में 118.9 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। नागौर जिले में मई माह सामान्यत: 18.9 एमएम बारिश होती है, लेकिन इस बार बार-बार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से यह अंतर देखने को मिला है। बारिश के साथ आंधी, तूफान व ओलावृष्टि होने से इस बार गर्मी के तेवर भी अब तक काफी ठंडे रहे।

नागौर जिले में बारिश एक नजर

तहसील - औसत बारिश - पिछले 5 साल में औसत - गत वर्ष मई तक - इस बार अब तक

नागौर - 309.9 - 349.2 - 22 - 112

मूण्डवा - 309.9 - 449.6 - 37 - 117

खींवसर - 309.9 - 365.4 - 17 - 120

जायल - 325.4 - 438.5 - 44 - 83

डेह - 325.4 - - - - 131

मेड़ता - 418.6 - 726.4 - 49 - 173

रियांबड़ी - 418.6 - 645 - 96 - 121

डेगाना - 372 - 480 - 69 - 179

सांजू - 372 - - - - 162

डीडवाना - 309.9 - 576.2 - 45 - 186

मौलासर - 309.9 - - - - 197

लाडनूं - 331.4 - 455.8 - 53 - 200

परबतसर - 389.3 - 614.2 - 87 - 321

मकराना - 389.3 - 714.8 - 112 - 262

नावां - 460.8 - 658.2 - 70 - 164

कुचामन - 460.8 - 563 - 65 - 171

जिले का औसत - 363.3 - 541.3 - 47.9 - 169.3

किसानों ने शुरू की बुआई की तैयारी

जिले में 25 व 26 मई को हुई तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया। इसके बाद 29 मई को भी नागौर सहित आसपास की तहसीलों में बारिश हुई। मई में अच्छी बारिश होने के बाद अब किसान खरीफ की बुआई की तैयारी में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि जयेष्ठ माह में बोया जाने वाला बाजरा यदि पनप जाए तो अच्छी पैदावार होती है। अब तो जयेष्ठ बीत रहा है, ऐसे में बाजरा व मूंग की बुआई की जा सकती है। वहीं जिले में बोई गई कपास की फसल को भी इस बारिश से काफी फायदा होगा।