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नागौर जिले में 79 हजार प्रवासी श्रमिकों की बनी सूची, 23942 हजार ने मांगा काम, अब तक 3 को मिला रोजगार

लॉकडाउन के दौरान जिले में आए थे एक लाख से अधिक श्रमिक, कलक्टर के निर्देश पर कुशल व अकुशल श्रमिकों की सूची तो बनी, लेकिन रोजगार दिलाने में सफल नहीं हुए अधिकारी, मनरेगा के बाद खेती में जुट गए प्रवासी श्रमिक, आधे चले गए वापस परदेश

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migrant workers

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नागौर. कोरोना वायरस के संक्रमण से फैली महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू होने के कारण बंद हुए काम-धंधों के बाद जिले में लौटे प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की योजना सफल नहीं हो पाई है। जिला कलक्टर के निर्देश के बावजूद अधीनस्थ अधिकारियों की लापरवाही के चलते योजना का हश्र यह हुआ कि जिले में मात्र तीन प्रवासियों को रोजगार मिल सका।

श्रम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लॉकडाउन व अनलॉक-1 के दौरान जिले में आने वाले 18 से 60 वर्ष तक उम्र के प्रवासियों की संख्या 79 हजार 490 थी, जिसमें से 23 हजार 942 ने उपखंड अधिकारी कार्यालयों के माध्यम से पूछने पर स्किल अपडेट करवाते हुए रोजगार की इच्छा जताई थी, जबकि 55 हजार 548 प्रवासी ऐसे भी हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर काम करने में रुचि नहीं दिखाई। जिन 23942 ने काम की इच्छा जताई, उनमें से 31 अबस्त तक मात्र तीन लोगों को ही रोजगार मिल पाया। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों ने इस कार्य को कितनी गंभीरता से लिया।

गौरतलब है कि अन्य प्रदेशों से एक लाख से अधिक श्रमिक पलायन कर जिले में आए थे, जिनमें पुरुषों के साथ महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल थे। जिले के व्यापारियों एवं उद्यमियों की मांग तथा प्रवासी श्रमिकों का दुबारा पलायन नहीं हो, इसके लिए प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने तत्कालीन जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने गत 10 जून को श्रम विभाग नागौर के सहायक श्रम आयुक्त को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए रोजगार विभाग व जिला उद्योग केन्द्र के अधिकारियों को सहयोग करने के निर्देश दिए थे। कलक्टर ने प्रवासी श्रमिकों की सूचना संकलित करने के साथ जिले में औद्योगिक क्षेत्रों व अन्य विनिर्माण गतिविधियों में श्रमिकों की मांग प्राप्त करने और मांग के अनुरूप इन क्षेत्रों को श्रमिक उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों की नींद उड़ती, इससे पहले जून के अंतिम सप्ताह में सरकार ने राज कौशल पोर्टल लॉन्च कर दिया।

बातें बड़ी-बड़ी, हश्र बुरा
राज्य में कोई भी बेरोजगार न रहे और श्रमिक को उसकी योग्यता के अनुसार काम और पारिश्रमिक मिले। श्रमिक चाहे कुशल हो या अद्र्धकुशल, राज्य सरकार ने इन्हें रोजगार प्रदान करने के लिए संचार क्रांति को माध्यम बनाते हुए राज कौशल पोर्टल शुरू किया। दावा किया गया कि राज पोर्टल एप श्रमिकों और नियोक्ता के बीच सेतू का काम करेगा। लेकिन जिले में मात्र तीन श्रमिकों को रोजगार मिल पाया और 8 नियोक्ताओं ने पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल को अपलोड किया। रेलवे ने भी श्रम विभाग से 50 श्रमिकों की सूची मांगी, लेकिन सूची देने के बाद उन्हें रोजगार दिया या नहीं, इसको लेकर कोई सूचना वापस रेलवे ने नहीं दी।

2.67 लोगों का पंजीयन, 1.48 की स्किल पहचान
राज कौशल पोर्टल राजस्थान में उपलब्ध सभी श्रेणियों की जन शक्ति/श्रमिक व नियोक्ताओं का एक मास्टर डाटा बेस है। राज्य सरकार के पास उपलब्ध विभिन्न प्रकार की जन शक्ति(संनिर्माण श्रमिक, कोविड प्रवासी श्रमिक, पंजीकृत बेरोजगार, आरएसएलडीसी प्रशिक्षित, आईटीआई प्रशिक्षित आदि) के डाटा को एक स्थान पर लाया गया है। इसमें श्रम विभाग ने जिले के कुल 2 लाख 67 हजार 754 लोगों का डाटा उपलोड किया, जिसमें 64 हजार 531 का प्रोफाइल अपडेट किया गया, वहीं 316 नए पंजीकृत हुए और एक लाख 48 हजार 972 की स्किल पहचान की गई। वहीं एक लाख 18 हजार 782 ऐसे लोग हैं, जिनकी स्किल पहचान करनी शेष है।

जानिए, कहां कितने श्रमिकों का पोर्टल पर हुआ पंजीयन
ब्लॉक - कुल प्रवासी - स्किल अपडेट
भैरूंदा - 1642 - 401
डेगाना - 8434 - 2230
डीडवाना - 6613 - 1124
जायल - 7700 - 647
खींवसर - 2206 - 1537
कुचामन सिटी - 1960 - 526
लाडनूं - 6343 - 2649
मकराना - 8854 - 2927
मौलासर - 483 - 121
मेड़ता - 4568 - 712
मूण्डवा - 2414 - 1273
नागौर - 9894 - 2157
नावां - 7642 - 1220
परबतसर - 5643 - 2018
रियां बड़ी - 1149 - 193
उपलब्ध नहीं - 7642 - 4207
कुल - 79490 - 23942

स्थितियां सुधारने का प्रयास कर रहे हैं
पोर्टल पर जो आंकड़े अपलोड हैं, उनमें रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या कम होने के दो कारण हैं। पहला, इस योजना में हमें उद्यमियों का पूरा सहयोग नहीं मिला, जिन्हें प्रवासी मजदूरों को रोजगार देना था और दूसरा कारण यह भी है कि जिन नियोक्ताओं ने रोजगार दिया, उन्होंने पोर्टल पर अपडेट नहीं किया। हमारा लगतार प्रयास है कि जो प्रवासी आए हैं, उन्हें अधिक से अधिक रोजगार मिले, उम्मीद है आने वो दिनों में स्थितियां सुधरेगी।
- नीरज के. पवन, श्रम सचिव, श्रम विभाग, जयपुर