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Video : जाट समाज से शिक्षा को अपनाने व कुरीतियों को त्यागने का आह्वान

प्रतिभा सम्मान समारोह में जाट समाज की 242 प्रतिभाओं को किया सम्मानित

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प्रतिभा सम्मान समारोह में जाट समाज की 242 प्रतिभाओं को किया सम्मानित

प्रतिभा सम्मान समारोह में जाट समाज की 242 प्रतिभाओं को किया सम्मानित

नागौर. जाट समाज समन्वय समिति, नागौर की ओर से रविवार को 'जाट समाज प्रतिभा सम्मान-2023' के दौरान सरकारी सेवा क्षेत्र में चयनित तथा सामाजिक, शैक्षणिक व खेलकूद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त करने वाली कुल 242 प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। शहर के किसान छात्रावास में आयोजित सम्मान समारोह में अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, सैन्य सेवा तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने वक्ताओं के रूप में प्रतिभाओं व उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। जन-मन के आराध्य लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

मुख्य वक्ता के रूप में जयपुर संभागीय आयुक्त डॉ. आरुषि मलिक ने वर्तमान परिवेश में शिक्षा और सामाजिक चेतना को बहुमुखी विकास का आधार बताते हुए विद्यार्थियों के लिए सुविधायुक्त छात्रावास एवं श्रेष्ठ पुस्तकों से समृद्ध पुस्तकालयों की जरूरत बताई। डॉ. मलिक ने मृत्युभोज, बाल विवाह व नशाखोरी जैसी कुरीतियों के उन्मूलन व सामूहिक विवाह जैसे मितव्ययी नवाचारों को अपनाने का आह्वान करते हुए समय के साथ चलने की सीख दी। डॉ. मलिक के आह्वान पर समाज के श्रीराम गोदारा, मेहराम धौलिया व शिवनारायण इनाणियां ने आगामी आखातीज के अवसर पर खरनाल में प्रस्तावित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सादगीपूर्ण तरीके से अपने पुत्र-पुत्री के विवाह का संकल्प लिया। आईएएस अधिकारी नथमल डिडेल ने श्रोताओं एवं प्रतिभाओं को छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से लक्ष्य संधान की प्रेरणा देते हुए वैयक्तिक उत्थान से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को समझाया। साथ ही व्यक्ति व समूह के अन्योन्याश्रित अंतर्सम्बंधों को रेखांकित किया। आरएएस अधिकारी सुखराम पिंडेल ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों और अनुभवों को साझा करते हुए विषम परिस्थितियों में राह दिखाने वाले आदर्श शिक्षकों को अपना पथप्रदर्शक व प्रेरक बताया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्ति के लिए सतत प्रयत्न एवं कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

बलदेवराम मिर्धा राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना हो : डॉ. खोजा
कर्नल बलदेवसिंह सारण ने खेती-किसानी वाली पारंपरिक सोच में वैज्ञानिक चिंतन के समावेश को जरूरी बताते हुए समाज के उत्थान में किसान केसरी बलदेवराम मिर्धा व स्वामी केशवानंद जैसी विभूतियों के योगदान को याद किया। कर्नल बिरमाराम हुड्डा ने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के आकर्षण व भटकाव से बचने का सुझाव दिया। डॉ. सोहन खोजा ने अंग्रेजी शिक्षा एवं तकनीकी ज्ञान का महत्व बताते हुए महिला शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही। डॉ. खोजा ने कहा कि हमें आगे आकर यथाशीघ्र बलदेवराम मिर्धा राष्ट्रीय संग्रहालय एवं ट्रस्ट की स्थापना करनी चाहिए।

खेती में करें उन्नत तकनीक का उपयोग : डॉ. रलिया

नैनो यूरिया टेक्नोलॉजी के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमेश रलिया ने यूरोप एवं अमेरिका से भारतीय शैक्षिक संस्थाओं की तुलना करते हुए समयानुकूल उन्नत तकनीक के उपयोग से कृषि को लाभदायक बनाने के तरीकों तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रोजगार की नवीन संभावनाओं की जानकारी दी। नागौर के राजस्व अपील अधिकारी रिछपालसिंह बुरड़क ने व्यक्तिगत एवं सामाजिक प्रतिकूलताओं को जीवन का अनिवार्य पहलू मानते हुए कहा कि संघर्ष जितना बड़ा होगा, सफलता भी उतनी ही शानदार होगी। महंत जानकीदास ने लोक देवता तेजाजी के जीवन चरित को सत्य और वीरता की जीवंत प्रतिमूर्ति बताया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शंकरलाल जाखड़ ने शिक्षा को सामाजिक चेतना का संवाहक बताते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक उन्नयन में प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से सहभागी बनने वाले अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. भूपेश बाजिया ने किया। प्रतिभा सम्मान समारोह के प्रयोजनार्थ डॉ. रणवीर चौधरी ने एक लाख रुपए का अंशदान दिया। इससे पहले भी दो बार यह राशि दे चुके है।
ये रहे मौजूद
समारोह में समाजसेवी डॉ. रामकरण डूकिया, नाथूराम मिर्धा मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष मेहराम नगवाडि़या, सांई सेवा समिति के अध्यक्ष परमाराम जाखड़, कृषि मंडी सचिव रघुनाथराम सिंवर, जिला साक्षरता अधिकारी अर्जुनराम लोमरोड़, माणक चौधरी, ओमप्रकाश इनाणियां, देवेंद्र सांगवा, शैतानराम चांगल, हरदेव गारू, डॉ. ओमप्रकाश पूनिया, हनुमान फूलफगर, दरियाव चौधरी, एडवोकेट गोविंद कड़वा, प्रहलाद जाजड़ा, घनश्याम सदावत, धनराज खोजा, धर्मपाल डोगीवाल, बहादुर खिलेरी, रामप्रकाश बिशु, पवन मांझू, रामचंद्र धुंधवाल, सुरजाराम सिंवर, खेराज जाखड़, देवेंद्र कुड़ी, डॉ. प्रेमसिंह बुगासरा, चंदाराम सियाग, जोधाराम जाजड़ा, महावीर काला, डॉ. रामेश्वर सांगवा, सुरेश जाखड़, रामप्रकाश बाना, रामनिवास धेडू, रिडमल सियाग, नरसिंह बसवाना, हरिराम धायल, रामेश्वर डिडेल, रणजीत धौलिया, राकेश सिरोही, मोहन पोटलिया, देवकरण चांगल, उम्मेदाराम जाजड़ा, प्रेमसुख जाजड़ा, दौलत सारण, जेठाराम बागड़िया सहित क्षेत्र व समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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