
पति-पत्नी के बीच मनमुटाव की वजह कुछ भी हो आरोप दहेज प्रताडऩा का ही लग रहा है। महिला थाना ही नहीं जिलेभर के अन्य थानों में भी दहेज प्रताडऩा के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है।
नागौर . पति-पत्नी के बीच मनमुटाव की वजह कुछ भी हो आरोप दहेज प्रताडऩा का ही लग रहा है। महिला थाना ही नहीं जिलेभर के अन्य थानों में भी दहेज प्रताडऩा के मामलों में बढ़ोत्तरी हो रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद भी महिला सलाह केन्द्र की समझाइश भी अधिकांश मामलों में कारगर साबित नहीं हो पा रही। झगड़े की वजह ढेर सारी हो गई हैं पर नाम दहेज प्रताडऩा का ही सामने आता है। पिछले करीब पांच साल के दौरान दर्ज दहेज प्रताडऩा के करीब सत्तर फीसदी मामले झूठे/गलत निकले।
सूत्रों के अनुसार दहेज प्रताडऩा के 21 मामले तो अकेले महिला थाने में दर्ज हुए हैं। वो तो तब जबकि यहां स्थापित महिला सलाह केन्द्र की ओर से समझाइश कर कुछ मामलों में तो रजामंदी हो जाती है। जिलेभर के अन्य थानों में भी इस तरह के मामले आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक हर दूसरे दिन दहेज प्रताडऩा का एक मामला दर्ज हो रहा है। जनवरी से अब तक इनकी संख्या साठ से अधिक बताई गई है। मजे की बात यह कि दहेज प्रताडऩा के मामलों में से अधिकांश जांच में झूठे पाए जा रहे हैं। पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट की वजह कोई भी हो, विवाहिता अपनी रिपोर्ट में दहेज मांगने के साथ मारपीट का आरोप लगाते हुए सिर्फ पति को ही नहीं ससुराल के सभी सदस्यों का नाम दर्ज करवाने में भी पीछे नहीं रहती जबकि कई मामले तो ऐसे भी निकले की पति-पत्नी उनसे अलग रहते थे। सूत्र बताते हैं कि पढ़े-लिखे और आर्थिक स्थिति से सु²ढ़ परिवारों के मामले भी इनमें कम नहीं हैं। कुछ मामले तो ऐसे भी सामने आए जिनमें पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकर यानी रुपए-पैसे या फिर दहेज मांगने जैसी कोई स्थिति नहीं। बावजूद इसके महिला कर्मी ने अपने पति पर दहेज के लिए प्रताडि़त करने का मामला दर्ज करा दिया। एक अन्य मामले की असल वजह तो यह थी कि पत्नी गांव में नहीं रहना चाहती थी जबकि पति ने उसकी बात नहीं मानी तो उसने रिपोर्ट दर्ज करा दी।
विवाद की बहुत सारी वजह होती है। बदले माहौल में छोटी-छोटी बातें बड़ा रूप ले लेती है। मसलन नवविवाहिता कभी शहर में रहने की जिद करती है तो कभी अलग रहने की। घर के काम-काज से लेकर सामाजिक स्टेटस, किसी तरह की पाबंदी बर्दाश्त नहीं करने जैसे और भी कारण हैं जो विवाद की वजह बनते हैं। हालांकि महिला सलाह केन्द्र के जरिए बहुत से मामलों में रजामंदी हो जाती है पर कई मामले कोर्ट तक पहुंच ही जाते हैं। इनकी समझाइश को पुरुष तो मान लेते हैं पर महिलाओं को राजी करना मुश्किल काम है।
सूत्रों का कहना है कि पिछले पांच साल के दौरान दर्ज मामलों से यह सामने आया कि शादी के चंद दिन अथवा महीनों में ही ये थाने तक पहुंच रहे हैं। इससे इतर शादी के पंद्रह-बीस साल बाद की विवाहिताएं भी दहेज प्रताडऩा के नाम से पति व ससुराल वालों के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने में पीछे नहीं हैं।
Updated on:
20 May 2023 09:54 pm
Published on:
20 May 2023 09:54 pm
