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नागौर एनएच ऑफिस को बनाया पंगू, जिले के 75 फीसदी एनएच दूसरे जिलों के अधीन

नागौर एनएच ऑफिस के पास नागौर जिले की 469 में से मात्र 124 किमी सडक़- दूसरे जिलों के अधीन सडक़ें होने का दंश भोग रहे नागौरवासी

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दूसरे जिलों के अधीन सडक़ें होने का दंश भोग रहे नागौरवासी

दूसरे जिलों के अधीन सडक़ें होने का दंश भोग रहे नागौरवासी

नागौर. नागौर जिला मुख्यालय पर खोले गए एनएच खंड नागौर कार्यालय को एक साजिश के तहत पंगू बनाने का खेल खेला जा रहा है। जिले में कुल 469 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग सडक़ें हैं, जिनमें से नागौर एनएच खंड कार्यालय के अधीन मात्र 124 किमी ही है, इसमें भी नागौर बायपास व नागौर सिटी का भाग शामिल है। अंदर की बात यह भी है कि नागौर-जोधपुर एनएच सडक़ को भी जोधपुर खंड के अधीन करने की तैयारी उच्चाधिकारी कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से भी लगाया जा सकता है कि नागौर में पिछले चार महीने से स्थायी अधिकारी नहीं है, जबकि नागौर में स्वीकृत दो फोरलेन का काम कराने के साथ रिंग रोड के शेष कार्य को पूरा कराने सहित अन्य महत्वपूर्ण काम हैं।

जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त
अजमेर-नागौर रोड का 90 प्रतिशत हिस्सा नागौर जिले में है, फिर भी यह रोड एनएच खंड अजमेर के अधीन है। इस रोड में गड्ढ़े हो या फिर टूट-फूट, अजमेर में बैठे अधिकारियों को न तो दिखाई देते हैं और न ही वे समय पर उन्हें ठीक कराने की जहमत उठाते हैं। नागौर शहर के मूण्डवा चौराहे से अठियासन की तरफ 200 मीटर तक सडक़ में पिछले साल भर से जगह-जगह जानलेवा खड्ढ़े हो रखे हैं, लेकिन अधिकारी उन्हें ठीक कराना तो दूर भरवाना भी उचित नहीं समझ रहे हैं। इसी प्रकार रेण रेलवे फाटक के दोनों तरफ व रेण कस्बे में सडक़ की स्थिति जर्जर हो चुकी है। फाटक के पास एक-एक फीट गहरे खड्ढ़े बने हुए हैं, जहां कई बार वाहनों में बड़ी हानी होती है और छोटी-छोटी दुर्घटनाएं भी आए दिन होती हैं, इसके बावजूद एयर कंडिशनर कमरों में बैठे अधिकारी मस्त हैं। दुबारा ठेका होने के बावजूद मूण्डवा का बायपास पिछले एक साल से अधूरा पड़ा है।

यह है जिले से निकलने वाले एनएच रोड की स्थिति
नागौर जिले से चार एनएच हाइवे निकल रहे हैं। पहला एनएच 58 है, जिसका एक भाग अजमेर से नागौर तक तथा दूसरा भाग नागौर से सीकर तक है। अजमेर से नागौर वाले भाग में 132 किमी हमारे जिले में है, दोनों जिलों के बीस इस पूरी सडक़ का 90 प्रतिशत हिस्सा नागौर जिले हैं, इसके बावजूद यह सडक़ एनएच खंड अजमेर के अधीन है। इसी वजह से जिले में इस सडक़ की मरम्मत को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। एनएच-58 नागौर-सीकर में 99 किमी नागौर जिले में है, लेकिन यह सडक़ भी एनएचएआई यूनिट सीकर के अधीन है। एक सडक़ एनएच-62 जोधपुर-नागौर-बीकानेर की है, जिले में इसकी लम्बाई 124 किमी है, केवल यह सडक़ एनएच खंड नागौर के अधीन है। इसका 75 किमी बीकानेर जिले का तथा 70 किमी जोधपुर जिले का भी नागैर के अधिन है। वहीं एनएच-458 सांजू-तरनाऊ-लाडनूं का 114 किमी भाग नागौर जिले में है, लेकिन यह सडक़ भी एनएचएआई यूनिट अजमेर के अधीन है। इस सडक़ की भी स्थिति जर्जर हो चुकी है।

जिले के जनप्रतिनिधि मौन
जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों को दूसरे जिलों के अधीन करने के कारण न तो समय पर मरम्मत हो रही है और न ही देखभाल। दूसरों जिलों के अधिकारी अपने कार्यालयों में कुंडली मारे बैठे हैं। रेण फाटक पर जहां सात साल पहले आरओबी बन जाना था, वहां आज भी लोग घंटों फाटक खुलने का इंतजार करते हैं। मूण्डवा का बायपास जहां छह साल पहले बनना था, वो आज भी अधूरा है। क्योंकि अजमेर से लेकर नागौर के मूण्डवा चौराहा तक की सडक़ अजमेर कार्यालय के अधीन है, यही वजह है कि मूण्डवा चौराहा पर शहीद स्मारक होने के बावजूद पिछले एक साल से गड्ढ़े तक नहीं भरे गए। इसके बावजूद जिले के जनप्रतिनिधि मौन भी हैं और बेखबर भी।

दोनों सरकारों को लिखेंगे पत्र
यह गंभीर मुद्दा है कि जिले से निकलने वाले एनएच दूसरे जिलों के अधीन है। नागौर जिले से निकलने वाले एनएच को नागौर एनएच खंड कार्यालय के अधीन करने को लेकर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को पत्र लिखेंगे।
- हनुमान बेनीवाल, सांसद, नागौर