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साढ़े छह साल बाद एक बार फिर जिला कलक्टर ने संपूर्ण जिले में डीजे पर लगाई पाबंदी

दुर्घटनाएं होने पर ही जागते हैं जिम्मेदार, डीजे से पशुओं में होता है गर्भपात, तत्कालीन कलक्टर व वर्तमान संभागीय आयुक्त वीणा प्रधान ने लगाई थी रोक

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DJ Ban in Nagaur district

डीजे बैन

नागौर. जिला कलक्टर एवं मजिस्ट्रेट डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने मंगलवार को आदेश जारी कर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के आमजन को प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में वातावरण शांतिमय बनाए रखने के लिए सम्पूर्ण जिले में तीव्र विस्तारक यंत्र डीजे के प्रयोग पर एक दिसम्बर से पूर्ण रूप से पाबन्दी लगा दी है।

कलक्टर की ओर से जारी आदेशानुसार जिले में डीजे के विभिन्न आयोजनों में उपयोग करने के परिणामस्वरूप शोरगुुल उत्पन्न होता है तथा अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से सामान्य व्यक्ति की शांतिभंग होती हैं एवं छात्र समुदाय की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है। रात्रि में वृद्ध बीमार व्यक्तियों को भी काफी असुविधा होती है।

आदेशानुसार कोई भी व्यक्ति या उनका समूह प्रतिनिधि किसी प्रकार का समारोह आयोजन के लिए तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग बिना अनुमति के नहीं करेगा। कोई व्यक्ति संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति प्राप्त करके ही इसका उपयोग कर सकेगा। यह अनुमति रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे के मध्य नहीं दी जाएगी। स्वीकृति पश्चात ध्वनि प्रदूषण का स्तर चारदीवारी में 10 डीबी से 75 डीबी से कम हो तथा किसी निजी स्वामित्व की ध्वनि प्रणाली का उपयोग 5 डीबी से अधिक नहीं होगा। साथ ही कोई भी व्यक्ति मोटरयान का अनाधिकृत रूप से तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्र डीजे के रूप में प्रयोग नहीं करेगा। ऐसा करता पाया जाने पर मोटरयान अधिनियम 1988 एवं मोटरयान अधिनियम 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत अर्थदंड या कारावास अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा। साथ ही आदेशों के उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188, राजस्थान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1963, मोटरयान अधिनियम 1986 एवं ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जिले में डीजे सीज करने का अभियान शुरू, पहले दिन चार डीजे सीज किए
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशानुसार परिवहन विभाग की ओर से जिले में अवैध रूप से चल रहे डीजे कारोबार पर शिकंजा कसने की कार्रवाई शुरू कर दिया है। इसे लेकर मंगलवार को अभियान की शुरुआत की गई।
जिला परिवहन अधिकारी ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि जिले में अवैध रूप से चल रहे डीजे वाहनों को जप्त करने के अभियान के पहले दिन चार डीजे सीज किए गए। उन्होंने बताया कि इसे लेकर गठित टीम ने जिला मुख्यालय पर डेह रोड सहित डीडवाना, मेड़ता तथा डेगाना क्षेत्र से भी एक-एक डीजे वाहन को सीज कर जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय लाया गया है। चौधरी ने बताया कि अवैध रूप से चलाए जा रहे डीजे वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सीज करने का अभियान जारी रखा जाएगा।

जिले में साढ़े छह साल पहले लग चुकी है डीजे पर रोक
नागौर. जिले में कानफोड़ू डीजे पर साढ़े छह पहले ही तत्कालीन कलक्टर व वर्तमान संभागीय आयुक्त वीणा प्रधान ने विशेष बैठक बुलाकर रोक लगा दी थी, लेकिन जिन अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी दी, वे उनके तबादले के साथ ही लापरवाह हो गए, जिसके चलते सोमवार को एक बार फिर नागौर एसपी श्वेता धनखड़ को डीजे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी करने पड़े।
दरअसल, मई 2014 में राजस्थान पत्रिका ने कुचामन क्षेत्र में डीजे के शोर से हुए पशुओं के गर्भपात को लेकर सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित किए थे, ग्राम पांचवा के राजकीय पशु चिकित्सालय के तत्कालीन प्रभारी वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. गोविन्दराम चौधरी के हवाले से बताया कि डीजे के ध्वनि प्रदूषण से पांचवा के 25 किमी क्षेत्र में 15 अप्रेल 2014 से लेकर 15 मई 2014 के बीच 126 पशुओं (भैंस-110 व गाय-16) का गर्भपात हो गया। एक भैंस की रीड की हड्डी टूटने से मर गई। पत्रिका में समाचार प्रकाशन के बाद पशुपालकों के साथ आमजन ने भी डीजे पर पाबंदी लगाने की मांग की थी, जिस पर तत्कालीन जिला कलक्टर वीणा प्रधान ने 20 मई 2014 को विशेष बैठक बुलाकर डीजे पर पाबंदी लगाई तथा जिले के एसडीएम एवं जिला परिवहन अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

पुलिस व परिवहन विभाग को सौंपी थी जिम्मेदारी
पूर्व कलक्टर ने विशेष बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर पुलिस अधीक्षक एवं जिला परिवहन अधिकारी को निर्देश दिए कि जिन वाहनों पर डीजे साउण्ड सिस्टम लगा हो अथवा जो ध्वनि प्रदूषण करते हो, उन्हें जब्त कर उनके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम एवं ध्वनि प्रदूषण अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाए। बिना अनुमति वाहनों में परिवर्तन कराने पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 191 का उल्लंघन तथा दण्डनीय अपराध मानते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

पशु चिकित्सक ने माना था यह कारण
पशु चिकित्सकों के अनुसार डीजे साउण्ड के अचानक तेज प्रदूषण से पशु को तनाव लगता है। इससे उसके मस्तिष्क से कोरटिकोस्टेरोइड रिलिजिंग फेक्टर्स स्टीमूलेट (प्रेरित) होते हैं। ये फेक्टर एक तरह के हार्मोन का स्त्राव करते हैं जो किडनी पर स्थित ऐडे्रनलिन ग्रन्थी को स्टोमूलेट (प्रेरित) करते हैं जहां से कोरटिकोस्टेरोइडस का स्त्राव होता हैं जो ईस्ट्रोजन हार्मोन में तब्दील होकर गर्भपात का कारण बनता है।

एसपी ने दिए डीजे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
जिले के रोल थाना क्षेत्र के छापड़ा के बाद सोमवार को मेड़ता रोड थाना क्षेत्र में डीजे से हुई युवक की मौत के बाद नागौर एसपी श्वेता धनखड़ ने आदेश जारी कर थानाधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसपी ने आदेश में बताया कि गत दिनों उन्होंने डीजे वाहनों के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण व एमवी एक्ट में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन रोल व मेड़ता रोड थाना क्षेत्र में हुई दुर्घटनाओं से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उक्त वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसलिए एक बार फिर निर्देश दिए जा रहे हैं कि अपने-अपने क्षेत्र में संचालित डीजे वाहनों के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण नियम, 2000 एवं मोटर वाहन अधिनियम के तहत अधिक से अधिक कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में डीजे वाहनों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण व दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। एसपी ने पुलिस अधिकारियों को चेताते हुए कहा है कि निर्देशों की अवहेलना पाई जाने पर सम्बन्धित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।