
Ambuja took environmental clearance on the basis of wrong facts: MP Beniwal
नागौर. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने गुरुवार को संसद भवन में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके कार्यालय में मुलाकात की। सांसद बेनीवाल ने मंत्री के समक्ष नागौर जिले के मूण्डवा में निर्माणाधीन अंबुजा सीमेंट प्लांट द्वारा ली गई पर्यावरण अनापत्ति के संबंध में कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए गलत तथ्यों का विवरण देते हुए जांच करवाने की मांग की। साथ ही कंपनी की पर्यावरण अनापत्ति को निरस्त करने की भी मांग की। बेनीवाल ने मंत्री यादव से कहा कि गत 4 दशक से सीमेंट प्लांट बनाने के नाम पर किसानों से सस्ती दर पर जमीन अवाप्त कर ली तथा प्लांट निर्माण के लिए मूण्डवा शहर से गलत दूरी दर्शा कर व आसपास के गांव के संबंध में वहां की कृषि भूमि की स्थिति तथा जलाशयों व तालाबों की स्थिति, पशु-पक्षियों की स्थिति आदि के बारे में गलत ब्यौरा दिया है। इस दौरान सांसद ने कंपनी के कई झूठे तथ्यों, रोजगार में स्थानीय लोगों को अनदेखा करने सहित कई मामलों से मंत्री को अवगत करवाया तथा अपने मूल पत्र में लिखा कि निष्पक्ष संस्था द्वारा रिस्क एनालाइसिस एसेसमेन्ट करवाने, पर्यावरण संबंधी संस्तुति की विवेचना करने व भविष्य में होने वाली पर्यावरणीय हानि का आंकलन करने से पूर्व निर्माण पर रोक लगाते हुए ईसी को रद्द करने की मांग की, जिस पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री यादव ने सभी तथ्यों की जल्द से जल्द जांच करवाकर कार्रवाई करने का आश्वासन सांसद बेनीवाल को दिया।
यह मांग भी की
सांसद ने नागौर जिले में स्वीकृत ईएसआईसी डिस्पेंसरी को जल्द से जल्द शुरू करने की भी मांग की। गौरलतब है कि सांसद बेनीवाल की मांग पर ही गत वर्ष भारत सरकार ने नागौर में ईएसआईसी डिस्पेंसरी व ब्रांच कार्यालय की स्वीकृति प्रदान की थी।
राजस्थान में स्ट्रीट वेंडर एक्ट की पालना रिपॉर्ट संतोषजनक नहीं
लोकसभा में गुरुवार को स्ट्रीट वेंडर एक्ट से सम्बंधित जुड़े सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थान में अब तक 1,93,568 पथ विक्रेताओं की पहचान की गई है, जिसमे से 23,714 विक्रय प्रमाण पत्र जारी किए गए। वहीं 73,915 का पहचान प्रमाण पत्र जारी किया गया और कुल 1055 विक्रय जॉन अधिसूचित किए गए। सांसद ने अपने मूल सवाल में पथ विक्रेता अधिनियम की अनुपालना में भौतिक प्रगति का विवरण पूछा था। सांसद ने कहा कि इस अधिनियम के तहत अधिक से अधिक निर्धन रेहड़ी वालों को सूचीबद्ध करके उनके पहचान पत्र जारी करने की जरूरत थी, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, लेकिन राजस्थान की नगरीय इकाइयों ने उक्त एक्ट की पालना गंभीरता से नहीं की। बेनीवाल ने यह बात सवाल के जवाब का अध्ययन करने के बाद कही।
Published on:
05 Aug 2021 09:59 pm
