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18 दिन बाद शुरू होगा रामदेव पशुमेला, अब तक रेलवे ने नहीं दिया जवाब

राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेले के लिए चलानी है ट्रेन, ताकि पशुपालक ले जा सके पशु- पशु परिवहन के लिए ट्रेन चलाने को लेकर सांसद बेनीवाल व कलक्टर समारिया लिख चुके हैं पत्र

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रामदेव पशुमेला

रामदेव पशुमेला

नागौर. जिला मुख्यालय पर आगामी 22 जनवरी से आयोजित राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेले के दौरान पशु परिवहन के लिए ट्रेन (मालगाड़ी) चलाने को लेकर अब तक हरी झंडी नहीं मिली है, जबकि 18 दिन बाद मेला शुरू होना है। खास बात यह है कि मेले के दौरान मालगाड़ी चलाने को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल व जिला कलक्टर पीयूष समारिया रेलवे के अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। साथ ही गत दिनों जयपुर में हुई उत्तर पश्चिम रेलवे की जेडआरयूसीसी की बैठक में भी सांसद ने इस मुद्दे को उठाया था। इस पर रेलवे के अधिकारियों ने सकारात्मक आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक स्वीकृति जारी नहीं हुई है, ऐसे में पशुपालकों में संशय बना हुआ है।

गौरतलब है कि नागौर के रामदेव पशु मेले में नागौरी बैलों को खरीदने के लिए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य प्रदेशों के किसान व पशुपालक आते हैं । किसान अच्छे दामों पर बैल खरीदते भी हैं, लेकिन वापस सड़क मार्ग से लौटते समय उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही ट्रकों से पशुओं को ले जाने पर उन्हें भाड़ा भी काफी अधिक देना पड़ता है। ऐसे में यदि पहले की तरह ट्रेन से पशुओं का परिवहन हो जाए तो न केवल बाहर से आने वाले पशु व्यापारियों को सुविधा होगी, बल्कि मेले की रौनक भी बढ़ जाएगी। पशुओं के खरीदार अधिक होंगे तो स्थानीय पशुपालकों को दाम भी अच्छे मिलेंगे।

लावारिस गोवंश से मिल सकती है निजात

सरकार यदि नागौर सहित प्रदेश के बड़े पशु मेलों को जीवित करने पर ध्यान दे तो लावारिस गोवंश की समस्या से निजात पाई जा सकती है। खासकर नागौर में इस समस्या का समाधान होने की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि नागौरी नस्ल की गाय ज्यादा दूध नहीं देती है, लेकिन नागौरी नस्ल का बैल खेती के साथ बोझा ढोने में सबसे मजबूत है, इसलिए बाहरी राज्यों के किसान नागौरी बैलों को पसंद करते हैं। साथ ही धान की खेती में आज भी बैलों की उपयोगिता है, ऐसे में जैसे ही बैलों का परिवहन सुलभ होगा, बाहरी राज्यों के पशुपालक अधिक संख्या में नागौर आने लगेंगे। इधर, जब बैल बिकने लगेंगे तो स्थानीय पशुपालक भी गायों को पालना शुरू कर देंगे।

मेरा प्रयास पशु मेलों का अस्तित्व बचा रहेमैंने आज वापस रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से नागौर के विख्यात रामदेव पशु मेले को लेकर पशुपालकों व किसानों की सुविधा के लिए ट्रेन शुरू करने की मांग दोहराई है। पशुओं के परिवहन के लिए कम से कम शुल्क पर जल्द ट्रेन शुरू की जाएं, ताकि मेले में आने के इच्छुक किसान व पशु व्यापारियों का रुझान बढ़ सके। पूर्व में कोरोना तथा हाल ही में लंपी स्कीन डिजीज ने किसानों व पशुपालकों की कमर तोड़ दी है, ऐसे में जल्द से जल्द ट्रेन शुरू करने के आदेश मेला प्रारंभ होने से पूर्व ही करना आवश्यक है। गत दिनों जयपुर में हुई जेडआरयूसीसी की बैठक में भी इस मु्द्दे को लेकर मांग रखी थी व महाप्रबंधक को व्यक्तिगत रूप से अवगत करवाया था। हमारा प्रयास है कि पशु मेलों का अस्तित्व बचा रहे, क्योंकि यह मेले पशुपालकों व किसानों की आर्थिक उन्नति के साथ हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।

- हनुमान बेनीवाल, सांसद, नागौर