
As the festival of Deepotsav is approaching, Gulab Jauman, Rasgulla and Shakkarpara are being made in homes
-बच्चों एवं बुजुर्गों के साथ ही पूरे परिवार के लिए महिलाएं घर पर ही तैयार कर रही हैं मिठाइयां
-चिकित्सा विशेषज्ञों ने माना घर में निर्मित मिठाइयां लोगों के लिए सेहतमंद
-45-50 प्रतिशत लोगों का रूख घर में बनी मिठाइयों के प्रति बढ़ा
नागौर. हर कोई मिलावट की जगह शुद्ध खाना चाहता है। इसलिए अब दीपावली नजदीक आने के साथ ही अब घर में बनी मिठाइयों को अब तरजीह दी जाने लगी है। ज्यादातर ने तो बाजार की तर्ज पर अब मिठाइयां घर में ही बनानी शुरू कर दी है। हालांकि यह प्रचलन लगभग बंद हो गया था, क्यों कि दीपावली आते ही मिठाइयों का डिब्बा लाकर इसकी इतिश्री कर लेते थे, लेकिन पिछले दो से तीन सालों के दौरान अब लोग अपने स्वारूथ्य के प्रति जागरुक होने के साथ ही घरों में मिठाइयां बनाने को प्राथमिकता देने लगे हैं। इस संबंध में शहरवासियों से बातचीत के दौरान सामने आया कि अब 45-50 प्रतिशत लोगों का रूख घर में बनी मिठाइयों के प्रति बढ़ा है।
दीपोत्सव का पर्व निकट आने के साथ महिलाएं अब जोर-शोर से घर में मिठाइयांं बनाने में व्यस्त हो गई है। महिलाओं का कहना है कि पहले से ही मिठाइयां तैयार हो जाएगी तो अन्य कार्य को करने का समय भी मिल जाएगा। महिलाओं के इस कार्य में अवकाश के दिनों में पुरुष वर्ग भी मदद करने लगा है। इस संबंध में घर में मिठाइयां तैयार करने में जुटी महिलाओं से बातचीत हुई तो बताया कि आधी मिठाइयां तो अभी तैयार कर ली जाएगी। शेष को दीपावली के एक दिन पहले या फिर दीपोत्सव पर्व की सुबह तैयार किया जाएगा।
घरों में इस बार यह मिठाइयां बनेंगी
घरों में बनने वाली मिठाइयों में लापसी, आटे का सिरा, गुड़ की लापसी, भुजंवा लापसी, गुलाबड़ी, खिचन्दी, जलेबी, घेवर, गुलाब जामुन, रसगुल्ला व फीणी सरीखी मिठायां शामिल हैं। इसमें जल्द खराब नहीं होने वाली मिठाइयां पहले तैयार की जाएगी।
महिलाएं बोली
"दीपावली पर मिठाइयों को स्वास्थ्य की प्राथमिकता बनाने के लिए एक नई पहल की शुरुआत हुई है। इस दिन, घर में बनी मिठाइयों को खास तरीके से तैयार किया जा रहा है, जिसमें सुगर की कमी का ध्यान रखा जा रहा है। लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, और वे खाद्य सुरक्षा के महत्व को समझ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण पहल से, दीपावली को स्वास्थ्यपूर्ण और स्वादिष्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल
नीलू खड़लोया
घर पर बनाई जाने जाने वाली मिठाइयाँ स्वादिष्ट होती हैं। यह केवल स्वाद में ही बेहतर नहीं होती हे, बल्कि बहुत सारे लाभ भी प्रदान करती। पहले हमारे घरों में घर की बुजुर्ग महिलाएं सभी मिठाइयों को घर में ही तैयार करती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह चलन खत्म होने लगा है। वर्तमान समय में स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता में शामिल हो चुका है। इसलिए अब मिठाइयों को घर तैयार करेंगे, तभी सही रहेगा।
नंदनी
घर पर बनी मिठाइयां न केवल शुद्ध रहती है, बल्कि स्वच्छता के साथ ही उसमें स्नेह की भावना भी रहती है। घर पर बनाई गई मिठाइयाँ ताजगी का भी अहसास कराती हैं। स्वास्थ्य के लिए घर पर बनी मिठाइयाँ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती हैं। खासकर यदि आप शुगर या अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धित मुद्दों पर ध्यान देते हैं तो आपको घर पर ही मिठाइयां बनानी पड़ेगी। घर पर मिठाइयाँ बनाना और साझा करना पारिवारिक आदतों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो परिवार के सदस्यों के बीच मजबूत संबंधों को बढ़ावा देता है।
खुशबु मनिहार
यह सही है कि अब आजकल हर चीज बाजार में से मिल जाती है। सुविधाएं बढ़ी हैं तो इसके साथ विभिन्न प्रकार की विसंगतियां भी होने लगी है। वर्तमान समय की व्यस्तता की दौड़ में मिठाइयां बनाने के लिए समय निकालना वास्तव में बेहद मुश्किल है, लेकिन गुणवत्ता चाहिए तो फिर से हमें घर पर मिठाइयां आदि बनाने की परंपरा को बनाए रखना होगा। अन्यथा विवशता में गुणवत्ता से तो समझौता करना ही पड़ेगा।
केसर पारिक
जलेबी एवं शक्करपारा एवं फेणी आदि के साथ काजू कतली भी अब घर में तैयार होने लगी है। घर पर मिठाइयां बनेगी तो फिर इसमें गुणवत्ता भी उच्च स्तर की रहेगी। यह विशेषकर बच्चों एवं बुजुर्ग महिलाआं के लिए काफी बेहतर रहेगा। पहले तो मिठाइयां सीमित बनती थी, लेकिन अब तो इंटरनेट के माध्यम से आप अपने घरों के अंदर ही एक से बढकऱ एक मिठायां तैयार कर सकते हैं। आपको स्वस्थ रहना है तो फिर यह करने के लिए आपको समय निकालना पड़ेगा।
कांता बजाज
मैं तो घर मिठाइयां बनाने को लेकर ज्यादा क्रेजी हूं, क्यों कि यह मिठाइयां न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहती है, बल्कि आपको खाने में भी इसकी ताजगी का एहसास होता रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि आपको इन मिठाइयों में यानि की घर में बनी मिठाइयों को लेकर कोई किन्तु-परन्तु नहीं नहीं करना पड़ता है। घर में बनी मिठाइयां आप बेहिचक खाने के साथ ही दूसरों को भी खिला सकते हैं।
कला टांक
घर में बनी मिठाइयां सीमित मात्रा में बनती है, जबकि बाजार में तो बड़ी संख्या में मिठाइयां तैयार की जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि घर में बनी मिठाइयों में किसी भी प्रकार का कोई केमिकल आदि नहीं मिलाया जाता है उसे ताजा रखने के लिए। जबकि घर के अतिरिक्त अन्य मिठाइयों की गुणवत्ता के बारे में कोई कुछ भी पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हो सकता है। इसलिए मेरी नजर में तो घर में मिठाइयां बनाना ज्यादा अच्छा है। इससे आप भी सेहतमंद रहेंगे।
शोभा सारडा
चिकित्सा विशेषज्ञ: घर की मिठाई ही सेेहत के लिए अच्छी
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सहदेव चौधरी से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि घर में बनी मिठाइयां न केवल प्रत्येक प्रकार की गुणवत्ता से परिपूर्ण रहती है, बल्कि यह पूरी तरह से सेहतमंद होती है। घर की बनी मिठाइयों में न तो पाम आयल का इस्तेमाल होता है, और न ही ज्यादा तौर पर घी आदि का। इसमें किसी भी प्रकार के केमिकल आदि के मिलावट की भी कोई गुजांइश नहीं रहती है। कहने का अर्थ यह है कि इन कारणों से घर में निर्मित मिठाइयां पूरी तरह से स्वास्थ्यवद्र्धक होती हैं। विशेषकर बच्चों एवं बुजुर्गों की हालत कई बार बिगड़ जाती है, लेकिन घर की बनी मिठाइयां तो न केवल उनके लिए सुरूचिपूर्ण होती है, बल्कि उनकी सेहत भी बनाए जाने का काम करती है। इसलिए एक चिकित्सक की दृष्टि से भी घर में बनी मिठाइयां लोगों के स्वास्थ्य के बेहद फायदेमंद है।
डॉ. सहदेव चौधरी, वरिष्ठ फिजीशियन जेएलएन हॉस्पिटल
Published on:
07 Nov 2023 09:46 pm
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