
नागौर.भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं को अब पार्टी बैठकों व कार्यक्रमों के लिए अस्थाई ठिकानों की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि नागौर में सबसे पहले कार्यालय नहीं होने की पीड़ा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जताई थी। अस्सी के दशक में नाागौर आए वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं से पूछा था कि अपना घर भी है क्या?
बीस साल पहले शुरू हुए प्रयास
नागौर नगर पालिका में १९९६ में पहली बार भाजपा का बोर्ड बनने पर अध्यक्ष जीवण मल भाटी के कार्यकाल में भाजपा के तत्कालीन मंडल अध्यक्ष द्वारा पार्टी कार्यालय भवन बनाने के लिए प्रयास शुरू हुए, लेकिन करीब २० साल बाद यह सपना पूरा हुआ है। हालांकि पार्टी पदाधिकारी एक बार फिर सक्रिय हुए और गत तीन साल से प्रयास कर रहे थे। गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रवास के बाद नागौर नगर पालिका के चुनाव में भाजपा के 8 पार्षद एक साथ चुनकर आए और पार्टी का दायरा बढ़ा। इसके बाद भाजपा ने नागौर में उत्तरोतर वृद्धि की।
युवाओं में किया उत्साह का संचार
शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि देश में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी पहचान बना रही भारतीय जनता पार्टी को नागौर में खड़ा करने का काम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। १९७९-८० में नागौर प्रवास पर आए वाजपेयी ने पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करते हुए कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार किया था। पूर्व सभापति बिरदीचंद सांखला ने बताया कि जब वाजपेयी नागौर आए उस समय उनके (सांखला) पास भाजपा शहर महामंत्री की जिम्मेदारी थी। वाजपेयी दो दिन रुके और सभी कार्यकर्ताओं से मिले।
कार्यकर्ताओं में रही चर्चा
वाजपेयी के जन्म दिन पर आयोजित कार्यक्रम में भी वाजपेयी के पार्टी कार्यालय का सपना पूरा होने की चर्चा रही। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष महेन्द्र सुराणा, जीवणमल भाटी, बिरदीचंद सांखला, महावीर सांदू, जहांगीर खान, सुरेश ललवानी, रामचन्द्र उत्ता, पदम सारस्वत, रामकुमार, मनीष बंसल, कृपाराम देवड़ा, राशिद खान, शोभा कंवर, तनूजा, नरेन्द्र गहलोत, भोमसिंह बाराणी, सुरेश चारण, महेन्द्र पहाडिय़ा,रूपसिंह पंवार, समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। उधर, पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य कार्यक्रम के बाद दूसरे स्थान पर वाजपेयी का जन्म दिन मनाने को लेकर भी चर्चा रही।
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