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सरकारी पौधों से आमजन दूर सिर्फ राज की जमीन होगी हरी-भरी

- फ्लोराइडयुक्त पानी के कारण नहीं हो सके विभिन्न किस्मों के पौधे तैयार -टैंकरों से करवाई सिंचाई जलदाय विभाग ने नहीं दिया पानी कनेक्शन

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सरकारी पौधों से आमजन दूर सिर्फ राज की जमीन होगी हरी-भरी

सरकारी पौधों से आमजन दूर सिर्फ राज की जमीन होगी हरी-भरी

गोपाल कुमावत
कुचामनसिटी (nagaur). शहर की एकमात्र नर्सरी फ्लोराइडयुक्त पानी की वजह से सरकारी क्षेत्र में लगाए जाने वालों पौधों की नर्सरी ही बन कर रह गई है। सरकारी व वन विभाग रेंज क्षेत्र में कांटेदार व छायादार पौधे लगाए जाते हैं। नर्सरी ने ज्यादातर वह ही पौधे इस वर्ष तैयार किए हैं। पूर्व में शहर के डीडवाना रोड पर स्थित आनंदपुरा नर्सरी में छायादार, फलदार, फूलदार सभी तरह के पौधे तैयार कर कुचामनवासियों व किसानों को न्यूनतम दर पर वितरित किए जाते थे। लेकिन इस वर्ष नर्सरी की ट्यूबवेलों में पानी फ्लोराइडयुक्त होने से बबूल, खेजड़ी, रोझ, बेर, शीशम, करंज, नीम, टोटलीस, चूरेल के २ लाख २० हजार पौधे ही तैयार कर वितरित किए जा रहे हैं। फलदार पौधों में अमरूद, जामुन, आंवला ही तैयार किए हैं। इन पौधों को किसान अपने खेतों में लगाते हैं तथा सरकारी व पहाड़ी रेंज में सरकार की ओर से इन्हें लगाया जा रहा है।

प्राईवेट नर्सरी से पौधे लेना मजबूरी
कुचामन व आसपास के क्षेत्र के लोगों का पौधों के प्रति रूझान बढा है, लेकिन उनके मनपंसद के पौधे सरकारी नर्सरी में नहीं मिलते हैं। इसके कारण प्राइवेट नर्सरी से महंगे दाम पर खरीदना मजबूरी बन गया है। आम, चीकू, पपीता, सेब, अंगूर, सहित सभी फलों की किस्म व फूलदार पौधे शहर में विभिन्न स्थानों पर अस्थाई लगाई हुई नर्सरी में मिल रहे हैं।

फ्लोइराइड पानी में नही उगते पौधे
वन अधिकारी ज्ञानाराम सोऊ ने बताया कि नर्सरी की ट्यूबवेल में पहले पानी मीठा था। अब पानी फ्लोराइडयुक्त हो गया है। जिससे कुछ कांटेदार, छायादार, फलदार पौधे ही तैयार होते है। उनमें भी अन्य स्थानों से टैंकर मंगवाकर पानी सींचते है, अन्यथा ये पौधे भी तैयार नहीं होते। इस प्रकार सरकार के टैंकारों से पानी डलवाने का खर्चा भी ज्यादा आता है, लेकिन फिर भी पर्याप्त पौधे भी तैयार नहीं कर पा रहे हैं।

वन विभाग के पास नहीं है संसधान

सरकार पर्यावरण संरक्षण व क्षेत्र को हरा-भरा रखने के लिए कागजों में ही प्रयास व दावे कर रहा है। कुचामन नर्सरी की स्थिति तो यही बयां कर रही है। यहां वन अधिकारी, वन रक्षक, वनपाल, सहायक वनपाल, सहित २२ जनों का स्टॉफ है, लेकिन संसाधन के नाम पर एक पुरानी थार गाड़ी है, वो भी पहाड़ी क्षेत्र में जाने में हांफ जाती है। नर्सरी में सरकार की ओर से टैंकर व अन्य मशीने उपलब्ध करा दी जाए तो लाखों रुपए प्राईवेट टैंकरों को नहीं देने पड़े।

शहर में है एक दर्जन से अधिक प्राईवेट नर्सरियां

शहर के डीडवाना रोड, बूडसु रोड, स्टेशन रोड, पांचवां रोड सहित अन्य जगहों पर करीब १ दर्जन से ज्यादा नर्सरियां लग चुकी है, जो अपनी मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं। शहरवासी भी मजबूरी में पौधों की भारी रकम दे रहे है।

वन विभाग करेगा सिर्फ सरकारी जमीन को हरी-भरी

वन विभाग ने २ लाख २० हजार पौधे तैयार किए है। इन पौधों में फलदार व छायदार पौधे कम होने के कारण आमजन इनमें रुचि कम ले रहे हैं। प्राईवेट नर्सरियों से फलदार, फूलदार, छायदार पौधे खरीद रहे है। वन विभाग के तैयार पौधे सिर्फ सरकारी जमीन को ही हरी-भरी करेगें। उसके अलावा लोगों को अपनी निजी जमीन को हरी-भरी करने के लिए प्राईवेट नर्सरी से पौधे खरीदने होंगे।
इनका कहना----
हमने नर्सरी मेंं पौधे तैयार करने के लिए जलदाय विभाग में पेयजल आपूर्ति कनेक्शन के लिए मांग की थी। जिसकी फाइल विभाग में जमा करवाई थी, लेकिन जलदाय विभाग ने फाइल तो जमा कर ली पर कनेक्शन नहीं दिया।

ज्ञानाराम सोहू
क्षेत्रीय वन अधिकारी, कुचामनसिटी