
सांभर झील में बिन पानी सब सून
चौसला. विश्व विख्यात खारे पानी की सांभर झील में बनगढ के पास नाममात्र का पानी रहा है। इससे उसके अस्तित्व पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है। यदी इस बार भी यहां अच्छी बारिश नहीं हुई तो पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो जाएगा। इससे यहां अब प्रवासी पक्षी आना भी कम हो गए है। लोगों का कहना है कि वर्ष 2017 में कम बरसात के कारण झील में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हुई। अप्रेल के पहले पखवाड़े में ही झील सूखने लगी है। कई किलोमीटर लम्बे-चौड़े पाट की इस झील में गत वर्ष जून से अगस्त तक अच्छी बरसात नहीं होने से पानी का भराव पांच साल की तुलना में सब से कम हुआ था। अभी मानसून आने में करीब तीन माह का समय शेष है। ऐसे में सारस,बगुले सहित अन्य पक्षियों का जीवन खतरे में है वहीं सैकड़ों की तादाद में नील गाय का भविष्य इस झील के पानी पर निर्भर है। इनके भी हालात खराब है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि यदि चालू वर्ष में अच्छी बरसात नहीं हुई तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। झील व आस-पास के तालाबों में बरसात का पानी अप्रेल मई माह तक भरा रहता है और विदेशी पक्षी साइबेरियन, सारस, कुरजा सहित अन्य देशी विदेशी पक्षी शीतकालीन प्रवास के लिए आते है लेकिन इस बार जनवरी तक गिनती के पक्षी ही दिखाई दिए। पानी की कमी के कारण प्रवासी पक्षियों का यहां मन उछट गया और वे पलायन कर गए। अब इस वीरान पड़ी झील में केवल नमक उद्यमी छाती छलनी करते नजर आ रहे है। झील में सांभर के निकट कुछ हिस्से में यहां थोड़े गंदले पानी में जल मुर्गी बत्तखें ही जल क्र ीड़ा करते दिखाई देती है।
संकष्ट चतुर्थी व्रत आज
चौसला. वैशाख की संकष्ट चतुर्थी व्रत को लेकर मंगलवार को सुहागीनें पति की दीर्घायु के लिए निराहार रहकर व्रत रखेगी। संकष्ट चतुर्थी व्रत के तहत महिलाओं में उत्साह है। सोमवार को मुख्यालय की दुकानों व लूणवां के बाजार में महिलाओं ने सुहाग की वस्तुएं एवं कपड़ों खरीदारी की। इस दिन महिलाएं दिनभर निराहार रहकर मंदिरों में चौथ माता की कथाए सुनेगी। रात्रि चन्द्रमा के अघ्र्य देकर अपने पति की लम्बी आयु व परिवार में सुख समृद्धि की कामना करेगी।
Published on:
02 Apr 2018 07:32 pm
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