
भागवत कथा मानव को बनाती है देव तुल्य
कुचेरा. भावला गांव में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन कथा प्रवक्ता संत हेतमराम ने कहा कि भागवत कथा मानव को देव बनाने के लिए है न कि दैत्य बनाने को। वर्तमान में लोग फैशन व व्यसन में लीन होकर इहलोक व परलोक दोनों बिगाड़ रहे हैं। उन्होनें कहा कि अवगुणों को त्यागकर महापुरुषों का सत्संग करें, जीवन महान बन जाएगा। संत ने द्वारिका की लीलाओं का वर्णन करते हुए कृष्ण -रूकमणी विवाह प्रसंग में कहा कि यह विवाह लौकिक नहीं आध्यात्मिक मिलन का प्रसंग है। उन्होंने सुदामा का त्याग एवं संतोषमय चरित्र सुनाया। इस मौके पर आओ आओ कन्हैया....., बता मेरे यार सुदामा रै घणां दिनां सूं आयो..... भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे । संत ने शुकदेव महाराज का राजऋषि परीक्षित को दिए गए अंतिम उपदेश मार्मिक ढंग से वर्णन किया और कहा कि भागवत श्रवण कर प्रेमाभक्ति व सत्कर्म का संकल्प करें, आपका जीवन धन्य हो जाएगा।

Published on:
24 Nov 2018 06:34 pm
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