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मानव का सबसे बड़ा दुर्गुण ईष्र्या: बजरंग दास

चेनार की बड़की बस्ती में भागवत कथा का आयोजन

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नागौर. 'मां बालक की प्रथम गुरु है, वह अपनी शिक्षा व संस्कार से किसी भी स्वरूप या पक्ष का उसमें निर्माण कर सकती है। वह पक्ष चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक। यह बात श्रीबालाजी सेवा धाम के महंत स्वामी बजरंगदास ने चेनार गांव की बड़की बस्ती में आयोजित श्रीमद्भगवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को प्रवचन करते हुए कही। महंत ने कहा कि श्रीकृष्ण ने मोर पंख का मुकुट लगा रखा है, जो लोग निष्काम है, वे भगवान के सिर पर मोरपंखी के समान विराजमान होते हैं। मानव को मुरली के समान होना चाहिए, जो कुछ है सामने है। मुरली कुछ नहीं छिपाती। छिद्र हैं दोष बताते हैं, लेकिन स्पष्ट दिखते हैं, वैसे ही आदमी अन्दर व बाहर एक समान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत सुनने का अधिकारी वह है, जो काम, क्रोध, मद, लोभ से परे हो। उन्होंने कहा जहां कामदेव है वहां राम नहीं बैठ सकते। भगवान भक्तों की कथा सुनने को आतुर रहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में राजनीति में लोग सम्बन्ध नहीं देखते। पिता-पुत्र व भाई-भाई आमने-सामने आ जाते हैं। मानव मन में सबसे बड़ा दुर्गुण ईष्र्या है।
उन्होंने कहा कि सभी में सर्वे भवन्तु सुखिन का भाव जरूरी है। हमारी प्राचीन परम्परा रही है कि भगवान मेरे पड़ौसी को भी सुखी रखे। उन्होंने कहा कि गृहस्थ को कठोर परिश्रम करके धन कमाना चाहिए। कथा के दौरान पंडित सुनील दाधीच, नवल किशोर, रूपाराम, हेतराव व देवानन्द ने भागवत कथा अनुष्ठा, धार्मिक पूजन व जप किया।

यह रहे मौजूद

कथा आयोजक परिवार के श्यामसुन्दर सोलंकी ने बताया कि कथा में मुख्य यजमान नगर परिषद सभापति कृपाराम सोलंकी के अलावा रिछपाल मिर्धा, पदमाराम कुलरिया, गरीबाराम मंडा, रामस्वरूप पंवार, भोजराज सारस्वत, हरिराम धारणिया, किशोर टाक , पूनाराम मेघवाल, गायक सतीश देहरा, दिव्या रानी, वीरेन्द्र कड़ेला, राजस्थानी अभिनेता राज जांगीड़, गोविन्दराम कुलरिया सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।