
Bite of neglect of the state government: After waiting for many years, now the facility of sleeper buses will also be available in Nagaur.
- स्लीपर बसों के अभाव में लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्री रोडवेज से नहीं करते सफर
- नागौर आगार की ओर से भेजे गए प्रस्तावों की स्वीकृति मिलने के संकेत, डेढ़ से दो माह में मिल सकती है स्लीपर बसों की सुविधा
नागौर. जिला मुख्यालय के केन्द्रीय बस स्टैंड पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवक-जावक होने के बाद भी नागौर आगार में बस स्टैंड की स्थापना काल से अब तक स्लीपर बसें नहीं चली हैं, लेकिन अब यात्रियों का यह इंतजार खत्म हो सकता है। नागौर आगार प्रशासन की ओर से स्लीपर बसों का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। आगार प्रशासन की माने तो मुख्यालय से नागौर आगार केा भी स्लीपर बसों दिए जाने के सकारात्मक संकेत मिले हैं। बमुश्किल डेढ़ से दो माह के अंतराल में नागौर आगार को भी स्लीपर बसें मिल जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि स्लीपर बसें मिलने पर यात्रियों को सफर के लिए न केवल रियायती दर पर बेहतर विकल्प मिल जाएगा, बल्कि विभागीय राजस्व में भी खासी बढ़ोत्तरी होगी। अभी फिलहाल यात्री स्लीपर बसों पर यात्रा करने के लिए प्राइवेट बस सेवाओं पर ही निर्भर हैं
80 से ज्यादा बसें, एक भी स्लीपर नहीं
नागौर आगार से वर्तमान में 80 से ज्यादा बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें विभिन्न क्षेत्रों से करीब 10 से 12 हजार यात्री सफर करते हैं। यहां से बसें कोटा, भीलवाड़ा, जयपुर, भीनमाल, अजमेर, सीकर एवं बीकानेर आदि क्षेत्रों में ही जाती है। पर्यटन एवं तीर्थटन की दृष्टि से महज एक बस हरिद्वार व व्यापारिक दृष्टि से एक ही बस दिल्ली के लिए जाती है। यह दोनो सेवाएं भी सामान्य बस सेवाओं की तर्ज पर ही है। इसमें एक भी रूट पर स्लीपर बस सेवा यानि की इनमें एक भी स्लीपर बस नहीं है, जबकि प्राइवेट स्लीर बसें एक दर्जन से ज्यादा की संख्या में इन्हीं रूटों पर जाती हैं। स्लीपर बसों में सफर करने की यात्रियों की बढ़ती दिलचस्पी से राजस्व भी प्रभावित हुआ है, नहीं तो फिर यही राजस्व रोडवेज को मिलता।
लंबी दूरी का सफर स्लीपर में ही बेहतर
केन्द्रीय बस स्टैंड पर मिले पांचाराम, रघुनाथराम, भियाराम से स्लीपर बसों की सुविधा के संबंध में बातचीत हुई तो उनका कहना था कि थोड़ी दूरी के लिए तो सामान्य बसों से यात्रा करने में कोई मुश्किल नहीं होती है, लेकिन लंबी दूरी के लिए स्लीपर बसें होनी चाहिए। अभी फिलहाल यह सुविधा नागौर बस स्टैंड पर नहीं मिलने के कारण या तो वह ट्रेन से सफर करते हैं या फिर स्लीपर बसों में बुकिंग कराते हैं। अजमेर जाने की बस का इंतजार कर रहे भगवानाराम ने कहा कि जिला मुख्यालय का केन्द्रीय बस स्टैंड होने के बाद भी स्लीपर बसों की सुविधा नहीं मिल पाती है। अभी भी रोडवेज में वही पुरानी सामान्य मॉडल की बसें चल रही हैं। यात्रियों की रायशुमारी का समर्थन रोडवेज अधिकारियों ने भी किया। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार उनकी ओर से भी इस संबंध में यात्रियों से बातचीत करने के साथ अन्य लोगों से भी पहले ही फीडबैक लिया जा चुका है। इसमें ज्यादातर यात्रियों ने स्पष्ट तौर पर लंबी दूरी के सफर के लिए स्लीपर बसों को पहली पसंद बताया।
यात्रियों को बेहतर विकल्प मिल जाएगा
सीमावर्ती जिलों में जोधपुर, जयपुर एवं अजमेर आदि क्षेत्रों में स्लीपर बसें लंबे समय से चल रही है। ऐसे में नागौर आगार को भी स्लीपर बसें मिल जाने की स्थिति में न केवल यहां के राजस्व में इजाफा बढऩे की उम्मीद है, बल्कि यात्रियों का भी लंबा सफर करने में सहजता हो सकेगा। विशेषकर पर्यटन एवं व्यापारिक की दृष्टि से भी आगार में स्लीपर बसों की मांग लंबे से की जाती रही है। अब स्वीपर बसें मिली तो फिर यात्रियों को प्राइवेट से रियायती दरों पर स्लीपर बसों की सुविधा मिल सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि स्लीपर बसें मिलने पर दिल्ली, अहमदाबाद एवं गुजरात आदि सहित यात्री भार वाले रूटों पर चलाई जाएगी। ताकि यात्रियों को सुविधा मिलने के साथ ही विभाग को भी खासा राजस्व मिल सके।
इनका कहना है...
स्लीपर बसों का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। इस बार प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने के साथ ही नागौर आगार को स्लीपर बसें मिलने की पूरी उम्मीद है। डेढ़ से दो माह में स्वीपर बसें नागौर आगार को मिलने की संभावना है।
राजेश फरड़ौदा, मुख्य प्रबंधक नागौर आगार
Published on:
02 Aug 2023 09:49 pm
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