
Brokers active in the Nagaur district, giving poor quality gypsum to farmers
नागौर. केन्द्रीय प्रवर्तित योजना के अंतर्गत क्षारिय भूमि सुधार एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन- तिलहन, दलहन एवं गेहूं में जिप्सम वितरण का पहली बार जिम्मा संभाल रहे राजस्थान राज्य माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) के अधिकारियों की ढिलाई के चलते जिले में दलाल सक्रिय होकर किसानों को घटिया क्वालिटी की जिप्सम महंगे दामों पर बेच रहे हैं। आरएसएमएमएल द्वारा समय पर जिप्सम की आपूर्ति शुरू नहीं करने का फायदा उठाकर जिले में पहले से सक्रिय दलालों ने किसानों को झांसे में लेकर निम्न गुणवत्ता की जिप्सम सप्लाई करना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि पूर्व के वर्षों में जिले सहित प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को दी जाने वाली जिप्सम की आपूर्ति का जिम्मा प्राइवेट कम्पनियों को दिया जाता था, जिसके चलते ठेकेदार गड़बड़ी करने लगे और किसानों को रेत के कट्टे भरकर देने लगे। इसकी शिकायत होने पर सरकार ने इस बार जिप्सम सप्लाई का जिम्मा आरएसएमएमएल को दिया है। साथ ही जिप्सम की समय-समय पर सैम्पलिंग भी की जाएगी, यदि गुणवत्ता में कमी पाई गई तो ठेकेदार का भुगतान रोक लिया जाएगा। लेकिन सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी करने में काफी समय लगा दिया। पहले तो टेंडर प्रक्रिया देरी से पूरी हुई और फिर आरएसएसएमएल ने जिप्सम की आपूर्ति देरी से शुरू की, जिसका फायदा उठाकर पहले से सक्रिय दलालों ने निम्न गुणवत्ता की जिप्सम गांवों में बेचना शुरू कर दिया। किसानों को पूरी जानकारी नहीं होने तथा मानसून सिर पर होने के कारण किसानों ने खराब जिप्सम को भी महंगे भाव में खरीदना शुरू कर दिया। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी इस सम्बन्ध में कार्रवाई की बात कह रहे हैं तथा साथ ही किसानों को जागरूक करने की बात कर रहे हैं।
50 किलो का कट्टा 70 रुपए में
सरकारी स्तर पर किसानों को अनुदान पर दी जाने वाली जिप्सम का 50 किलो का कट्टा 70 रुपए में दिया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दलाल इससे निम्न गुणवत्ता की जिप्सम 100 से अधिक रुपए में बेच रहे हैं। कृषि विभाग ने भारत सरकार से प्राप्त अनुमोदित कार्य योजना के तहत जिप्सम वितरण का लक्ष्य संशोधित किया है, जिसके तहत नागौर जिले में 30 हजार 136 हैक्टेयर में जिप्सम डालने का लक्ष्य दिया है।
किसानों की मजबूरी
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने जिप्सम सप्लाई का टेंडर करने में देरी कर दी। इधर, मानसून सिर पर आने के कारण किसानों ने महंगे दामों पर ही खराब जिप्सम खरीदना शुरू कर दिया। यदि सरकार समय रहते आपूर्ति शुरू करवाती तो किसानों को अधिक फायदा होता। गौरतलब है कि जिप्सम का उपयोग खेत में क्षारिय भूमि का सुधार करने के लिए किया जाता है। साथ ही तिलहन व दलहन की फसलें बोने वाले किसान भी खेत में जिप्सम डालते हैं।
कृषि को लिखवाएं जिप्सम की मांग
जिले में जिस किसी किसान को जिप्सम की आवश्यकता है, वे अपनी मांग कृषि विभाग कार्यालय में लिखवाएं। इस बार जिप्सम आपूर्ति की जिम्मेदारी आरएसएमएमएल को दी गई है, जबकि परिवहन का ठेका निजी कम्पनी को दिया है। इनके द्वारा सप्लाई की जाने वाली जिप्सम की भी सैम्पलिंग होगी और निम्न गुणवत्ता की पाए जाने पर भुगतान नहीं किया जाएगा।
- शंकरराम बेड़ा, उप निदेशक, कृषि विभाग, नागौर
Published on:
14 Jul 2021 11:06 am
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