
Celebration of Dashami celebrated with joy in nagaur
नागौर.विजयादशमी का पर्व शनिवार को पूरे जिले में हर्षोल्लास से मनाया गया। अहंकारी दशानन के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई ने जीत हासिल की। रंगीन आतिशबाजी के बीच खुशियां चहुंओर थी। भगवान श्री राम के जयकारों की भी गूंज रही। मेलों ने उत्साह दूना किया। देर रात तक रामलीलाओं के मंचन में भी रावण का वध किया गया। इस तरह नवरात्रा के समापन पर दशमी का उत्सव छाया रहा। जिला स्टेडियम में रावण के दहन को देखने के लिए बच्चे ही नहीं बड़े बूढ़े भी उत्साहित नजर आए। रंग बिरंगी आतिशबाजी के साथ हर वर्ष की तरह असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया। जिले में कई जगह रावण तो कुछ स्थानों पर रावण सहित उसके पुत्र मेघनाथ व भाई कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। स्टेडियम में शाम करीब 6 बजकर 37 मिनट पर नगर परिषद की ओर से तैयार करवाए गए 40 फीट ऊंचे दशानन के पुतले का दहन किया गया।
इन्होंने सजाई झांकी
विभिन्न संगठनों व स्कूलों द्वारा सजाई गई सजीव झांकियां शहर के नए दरवाजा से रवाना होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए स्टेडियम पहुंची। इस दौरान बच्चों ने वानर, राम, लक्ष्मण, रावण, कुम्भकरण, मेघनाथ आदि रामायण के पात्रों के रूप धारण किए हुए थे। साथ ही इस दौरान विश्व हिन्दू परिषद की ओर से वाहन रैली निकाली गई। श्रद्धालु हाथों में केसरिया पताका लिए जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए स्टेडियम पहुंचे। झांकी सजाने वालों में साहित्य धर्म कला साहित्य संस्कृति की ओर से रावण के कुनबे की झांकी सजाई गई। इसके अलावा महाराणा प्रताप बाल संस्कार केन्द्र, सेवा भारती, हाथीचौक स्थित भगवानराम मंदिर, स्वामी विवेकानंद कॉलेज, महर्षि जर्नादनगिरी पुष्टिकर स्कूल, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, मारूतनंंदन शारदा बाल निकेतन विद्यालय आदि ने भाग लिया। इस मौके पर विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारियों को उत्कृष्ट कार्य करने पर प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
राम-लक्ष्मण की सवारी...
शहर के हाथी चौक स्थित प्राचीन राम मंदिर से शनिवार को रावण दहन की परंपरा के लिए भगवान राम-लक्ष्मण की सवारी गाजे बाजे के साथ निकाली गई। दशकों से चली आ रही इस परंपरा को निभाने में ना सिर्फ मंदिर के पुजारी बल्कि श्रद्धालु भी पीछे नहीं रहे। शहरभर से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बच्चे व युवा शोभायात्रा में शामिल हुए। जानकारों का कहना है कि यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस मंदिर में राम रथ निकाली जाने की परंपरा राजा रजवाड़ों के समय से शुरु की गई थी। यह शोभायात्रा दशहरा पर्व का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है। इसमें नगर परिषद व जिला प्रशासन का भी सहयोग रहता है। रामजी की सवारी लकड़ी की आकर्षक कलाकारी से बनाई गई। राम-लक्ष्मण की मूर्तियों के दर्शन के लिए शहर भर से बड़ी संख्या में लोग उमड़े। यह मूर्तियां भी युद्ध मुद्रा में बनी हुई है जो राम-रावण के युद्ध का आभासस
कराती है।
समस्या का सामना करना पड़ा
जिला स्टेडियम में विजय दशमी पर रावण दहन देखने के लिए पहुंचे लोगों को अंधेरे के चलते बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। आलम ये था कि स्टेडियम में नाम मात्र के लिए 4-6 लाइटें ही जल रही थीं। जैसे-जैसे शाम ढलती गई वैसे ही स्टेडियम में अंधेरा छाने लगा। जिससे लोगों को परेशानी होने लगी। मौके पर मौजूद लोगों में से किसी ने नगर परिषद आयुक्त से ही कह दिया कि आज तो सभी अधिकारी भी मौजूद हैं फिर लाइटों की व्यवस्था नहीं करवाई गई है। इस पर उसी समय आयुक्त श्रवणराम ने खानापूर्ति के लिए ठेकेदार को लाइटों के नहीं जलने की सूचना देकर लाइटों की मरम्मत करवाने की बात कही।
Published on:
01 Oct 2017 10:55 am
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