11 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अनसुलझी पहेली को पल भर में सुलझा लेता है चिन्मय

रुबिक क्यूब पर हाथ के साथ तेजी से दौड़ता है दिमाग , हुनरमंदों से भरा है परिवार

2 min read
Google source verification
Chinmaya gets settled Unsolved puzzle in a moment

Chinmaya gets settled Unsolved puzzle in a moment

देवेन्द्र प्रताप सिंह/ नागौर. सातवीं कक्षा के छात्र के हाथों की कला व दिमागी कसरत को देखकर हर कोई अचंभित है। उसकी इस कला को एक बार देखने के बाद बार-बार देखने को मन करता है। वहीं जोश व उत्साह भरे अंदाज में यह बालक भी अपनी दिमागी कसरत को दिखाने से पीछे नहीं हटता है। शहर की प्रताप सागर कॉलोनी निवासी ११ साल के चिन्मय मित्तल की ‘रुबिक क्यूब’ गेम (खिलौना) की उलझी गुत्थी को छट से सुलझाने के हुनर की हर कोई दाद दे रहा है। पिता कैलाश मित्तल के साथ पत्रिका संवाददाता से मिले चिन्मय ने अपने हुनर के बारे में जानकारी दी। साथ ही चिन्मय ने संवाददाता को रुबिक क्यूब थमाकर उसे पूरी तरह बिगाडक़र देने को कहा। इसके बाद जो हुआ वो नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया। जितना वक्त रुबिक क्यूब को बिगाडऩे में लगा उससे कुछ ही कम समय में चिन्मय ने उस उलझी पहेली को सुलझा दिया।

सबके बस की बात नहीं
जानकारी अनुसार ‘रुबिक क्यूब’ दुनिया के उन चुनिन्दा खिलौनों में से एक है, जो कभी बिकना बंद ही नहीं हुए। बच्चे हों या बड़े, जिस किसी के हाथ में यह आ जाता है, वह लग जाते इसकी गुत्थी सुलझाने में। यह दिखने में भले एक सरल खेल लगता हो पर इसको हल करने में बड़े-बड़े फन्ने खां अपना माथा पकड़ लेते हैं। इस गेम को खेलने वाले नागौर जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में आपको बहुत कम लोग मिलेंगे। इनमें से कुछ ही इस गेम की पहेली को सुलझा पाते होंगे। इस गेम के बारे में बताया जाता है अर्नो रुबिक नाम के शिक्षक ने अपने स्टूडेंट्स को ज्योमेट्री सिखाने के लिए एक खिलौना बनाया था। तब उन्हें इसका आभास भी नहीं था कि वह किस चीज को जन्म देने वाले हैं। शुरुआत में लकड़ी और पेपर क्लिप से बने पहले ‘रुबिक क्यूब’ का नाम मैजिक क्यूब रखा गया था। रुबिक क्यूब को हल करना अपने आप में एक चुनौती था, इसलिए इस चुनौती को एक अलग मुकाम पर ले जाने के लिए रुबिक क्यूब हल करने की प्रतियोगिताएं शुरू की गई। ‘स्पीड क्यूबिंग’ नाम की ऐसी ही एक प्रतियोगिता काफी मशहूर हुई। इस प्रतियोगिता में देखा जाता है कि प्रतिभागी कितनी जल्दी इस क्यूब को हल कर सकता है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का दिमाग इस क्यूब को हल करते समय जितना तेज चलता है, उससे कही ज्यादा तेज उनके हाथ चलते हैं।

दोस्त से सीखा था थ्री इंटू थ्री क्यूब

चिन्मय बताता है कि उसने करीब महीने भर पहले अपनी कक्षा के दोस्त हर्षवर्धन सिंह चारण से थ्री इंटू थ्री रुबिक क्यूब बनाना सीखा था। शुरूआती दौर में कई बार दिमाग चकराया, लेकिन काफी प्रयास के बाद इसकी नवज हाथ में आ गई। फिर क्या था इसके बाद वह इसकी अनसुलझी गुत्थी को तेजी से सुलझा लेते हैं। इतना ही नहीं अब चिन्मय टू इंटू टू, फोर इंटू फोर, फाइव इंटू फाइव व मिरर क्यूब सहित कई अन्य रुबिक क्यूब की उलझी गुत्थी को सुलझाने में ‘मास्टर’ हो गया है। पढ़ाई व अन्य कार्यों से समय मिलते ही वो विभिन्न तरह के रुबिक क्यूब को लेकर माथा पच्ची करने बैठ जाता है।

पिता लिखते है उल्टा पढ़ा जाता है सीधा
चिन्मय के पिता कैलाश मित्तल भी कुछ कम हुनरमंद नहीं है। उनके हुनर को देखकर लोग रोमाङ्क्षचत हो जाते हैं। वो कागज पर जो लिखते हैं उसे हर कोई नहीं पढ़ सकता। लेकिन उस लिखे हुए कागज को पलटकर या फिर सीसे में देखा जाए तो वो बिलकुल सीधा पढ़ा जाता है।