
दस करोड़ से अधिक के घपले के आरोपी ठेकेदार अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाए हैं , जबकि जोधपुर हाईकोर्ट ने गत जनवरी में ही उनकी याचिका रद्द करते हुए साफ कह दिया था कि प्रथम दृष्ट्या मुकदमा तो बनता ही है, इसके चलते करीब एक साल से रुकी उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक हट गई।
नागौर. तकरीबन डेढ़ साल बाद भी नागौर डेयरी के दूध परिवहन में हुई अनियमितता का मामला सुलझ नहीं पाया है। दस करोड़ से अधिक के घपले के आरोपी ठेकेदार अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाए हैं , जबकि जोधपुर हाईकोर्ट ने गत जनवरी में ही उनकी याचिका रद्द करते हुए साफ कह दिया था कि प्रथम दृष्ट्या मुकदमा तो बनता ही है, इसके चलते करीब एक साल से रुकी उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक हट गई। बावजूद इसके मामला ज्यों का त्यों पड़ा है। इस बीच एक ठेकेदार ने पुलिस को हिसाब-किताब देकर दावा कर दिया कि डेयरी नहीं वो खुद उनसे बकाया मांगता है।
सूत्रों के अनुसार नवम्बर 2021 से यह मामला चल रहा है। गत जनवरी को हाईकोर्ट जोधपुर के आदेश के बाद भी ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई। डेयरी प्रबंधन दावा करता है कि वो इस बाबत बार-बार पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई की कह रहे हैं, जबकि एक ठेकेदार के नए दावे के बाद पुलिस-डेयरी प्रबंधन ही एक-दूसरे पर टालम-टोली करने लगे हैं। एक आरोपी ठेकेदार राजूराम ने कुछ रसीदें जांच अधिकारी को सौंपी, हिसाब-किताब में डेयरी के एक कर्मचारी पर संदेह जताया। इस बाबत जब पुलिस ने डेयरी प्रबंधन को पत्र लिखकर इन रसीदों का मिलान करने व संदिग्ध कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट करने को कहा तो डेयरी प्रबंधन ने साफ इनकार कर दिया। डेयरी प्रबंधन ने कहा कि पुलिस को इस बाबत पहले ही समस्त दस्तावेज पेश किए जा चुके हैं। पुलिस अपने स्तर पर यह अनुसंधान करे।
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे प्रकरण में डेयरी के कर्मचारी की मिलीभगत का भी संदेह जताया गया। इसके बाद भी ना तो डेयरी प्रबंधन ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की ना ही पुलिस आगे बढ़ी। ऐसे में डेयरी प्रबंधन अपने ही दस करोड़ की रकम वसूली नहीं कर पा रहा है।
पग-पग पर रही उलझन
विभाग से लेकर थाने फिर कोर्ट-कचहरी, कई जांच से यह मामला उलझा रहा। सितम्बर 21 में डेयरी तत्कालीन एमडी मदन बागड़ी ने पहले परिवाद, फिर मामला दर्ज करने के लिए ने हाईकोर्ट जोधपुर की शरण ली। मामला दर्ज हुआ तो जांच तेज करने के लिए फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जांच बदली, इससे पहले ठेकेदारों के चेक बाउंस होने के साथ एक मामला और दर्ज कराया। इधर, ठेकेदारों ने गिरफ्तारी पर रोक का आदेश अदालत से ले लिया। यही नहीं इससे पहले आरसीडीएफ की दो बार हुई जांच के बाद तो मामला दर्ज कराना तय किया गया। ठेकेदारों की गिरफ्तारी पर लगी रोक के कारण पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। गत जनवरी में इसका रास्ता भी साफ हो गया पर ना गिरफ्तारी हुई ना ही वसूली।
यह है मामला
नवंबर 2021 को कोतवाली में दर्ज इस मामले में ठेकेदार रामचंद्र चौधरी, लीला ट्रेडर्स के मालाराम, विजय चौधरी, रामनिवास चौधरी और राजूराम के खिलाफ धोखाधड़ी/गबन का मामला दर्ज किया गया। यह रकम करीब दस करोड़ से अधिक हो चुकी है। पहले कोतवाली के तत्कालीन एसआई बनवारीलाल ने जांच की तो बाद में हाईकोर्ट के दखल पर जांच सीओ विनोद कुमार सीपा को दी गई। दुग्ध परिवहन की गाड़ी को एक-दो दिन से अधिक उधार देने का नियम ही नहीं तो यह दो साल तक कैसे चला, यह सवाल अब तक बना हुआ है। इन पांचों ठेकेदारों की गाडिय़ां दूध परिवहन में लगी हुई थी और इन्होंने आंखों में धूप झोंककर कोरोना काल का फायदा उठाया। हाईकोर्ट से हरी झण्डी मिलने के बाद पुलिस ने इन पांचों ठेकेदारों की तलाश शुरू कर दी पर वे उसे अब तक नहीं मिल पाए हैं। संविदाकर्मी अनिल नामजद है, तो एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही।
इनका कहना
डेयरी प्रबंधन की ओर से समस्त दस्तावेज पहले ही पुलिस को दिए जा चुके हैं। अनुसंधान पुलिस के पास है, वे इसमें हर तरह का सहयोग करने को तैयार हैं। वैसे तो हर ठेकेदार यही कह रहा है कि उसने पूरा चुका दिया जबकि पुलिस को उनकी गिरफ्तारी करनी चाहिए।
-भरत सिंह चौधरी, एमडी, नागौर डेयरी।
Published on:
01 Jun 2023 09:35 pm
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