
Controversy over inscription in Dadhimati Mataji temple of Nagaur
नागौर. नागौर जिले के गोठ मांगलोद स्थित दधिमती माताजी मंदिर के पास धर्मशाला में एक शिलालेख को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंदिर परिसर में स्थित मूर्ति को नहीं हटाने की मांग को लेकर दो दिन पहले ग्रामीणों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के बाद बुधवार को दधिमती माताजी मंदिर प्रन्यास के प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव को ज्ञापन सौंपकर जिला सतर्कता समिति की बैठक में लिए गए निर्णय की अनुपालना कराने की मांग की। प्रतिनिध मंडल ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि भवन में पड़े शिलालेख के कारण तनाव की स्थिति पैदा हो रही है, जिसका निस्तारण करवाया जाए।
दधिमती माता मंदिर प्रन्यास के महामंत्री अविनाश जोशी, विनेश शर्मा आदि ने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग समाज द्वारा बनवाई गई धर्मशाला पर कब्जा करने की नियत से जानबूझकर इस मामले को तूल दे रहे हैं। समाज द्वारा बनवाई गई धर्मशाला पर शिलालेख को धार्मिक आस्था से जोडकऱ समाज में उन्माद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में शिलालेख का प्राचीन भाषा संस्थान जोधपुर से अनुवाद करवाया गया है, उसके अनुसार यह शिलालेख मारवाड़ के राजा सूर सिंह के समय का है, जो किसी वीर का है। अनुवाद के अनुसार दक्षिण के युद्ध में योद्धा ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, उसी की याद में संवत् 1664 में यह शिलालेख बनवाया गया है। प्रन्यास के प्रतिनिधियों ने कहा कि शिलालेख से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि यह किसी ग्वाला की मूर्ति नहीं है। बल्कि एक सैनिक का शिलालेख है।
उन्होंने बताया कि सैनिक ही घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लेकर लड़ते थे, जबकि ग्वाला तो पैदल ही हाथ में लकड़ी लेकर गाय चराया करते थे। उन्होंने कलक्टर से कहा कि आपके द्वारा इस प्रकरण में जिला सर्तकता समिति की बैठक में निर्णय कर जायल उपखण्ड अधिकारी को पुलिस की मदद से इस शिलालेख को पुरातत्व विभाग अजमेर के संग्रहालय में भेजने के आदेश दिए, लेकिन काफी समय गुजर जाने के बाद भी इस आदेश की पालना नहीं हुई है, जिसके कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रन्यास की ओर से मांग की गई है कि सतकर्ता समिति के आदेश की पालना में शिलालेख अजमेर संग्रहालय को भेजा जाए।
Published on:
10 Oct 2019 05:19 pm

बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
