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नागौर

केमिकल ग्रेड के लाइम स्टोन की मांग बढ़ी, सरकार की गलती पड़ रही भारी

नागौर, जोधपुर पाली में निकलता है देश का 95 प्रतिशत केमिकल ग्रेड का लाइम स्टोन
– पूरे भारत में उपलब्ध लाइम स्टोन का मात्र एक प्रतिशत केमिकल ग्रेड वाला लाइम स्टोन
– केमिकल ग्रेड को हाई ग्रेड लाइम स्टोन निर्धारित करने से हो सकता है समाधान, सरकार ने मांगी जानकारी

नागौरJun 23, 2024 / 11:03 am

shyam choudhary

lime stone
नागौर. सरकार की ओर से बिना सोचे समझे ‘केमिकल ग्रेड’ के लाइम स्टोन को प्रधान खजिन में शामिल करने से देश में पिछले तीन साल में इसका आयात 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ऐसे में अब सरकार की नींद उड़ी है और पिछले पांच-छह साल से मांग कर रहे खनिज उद्यमियों की बात पर गौर करते हुए राज्य सरकार से केमिकल ग्रेड के लाइम स्टोन को माइनर मिनरल में शामिल करने का प्रस्ताव भिजवाने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि पूर्व में चूने का मुख्य उपयोग भवन निर्माण, सफेदी एवं खाने (पान) में होता था, लेकिन बदलते परिवेश में चूना एक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा पदार्थ बन चुका है, इसके बिना देश के अति महत्वपूर्ण उद्योगों का चलना नामुमकिन सा हो गया है। नागौर जिले के खींवसर व गोटन क्षेत्र में निकलने वाला उच्च गुणवत्ता का लाइम स्टोन आज देश में दर्जनभर से ज्यादा उद्योगों की मूलभूत आवश्यकता बन गया है। यही वजह है कि कोरोना की प्रथम लहर के दौरान देशभर में लगाए गए लॉकडाउन में सबसे पहले खींवसर के लाइम स्टोन के खनन को मंजूरी दी गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले लाइम स्टोन (केमिकल ग्रेड) से बनने वाले चूने का उपयोग ही किया जा सकता है।
देश का 95 प्रतिशत लाइम स्टोन मारवाड़ में

उच्च गुणवत्ता वाला केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन सम्पूर्ण भारत में उपलब्ध लाइम स्टोन का मात्र लगभग एक प्रतिशत ही है। इसका भी करीब 95 प्रतिशत मुख्यत: पश्चिमी राजस्थान के नागौर जिले के गोटन, पुन्दलु, माणकपुर, ताडावास, बेरावास, भेड़, बेराथल, खींवसर, बासनी हरिसिंग, भावण्डा, चाडी, माडपुरा आदि एवं बहुत कम मात्रा में जोधपुर जिले के बोरून्दा, हरियाढ़ाना, रणसीगांव व पाली जिले के सोजत, रून्दिया, बरना आदि गांवों में ही उपलब्ध है।
कहां हुई गड़बड़

पूर्व में चूना पत्थर की खदान, अप्रधान एवं प्रधान खनिज के रूप में में आवंटित की जाती थी, लेकिन हाल ही में सभी प्रकार के चूना पत्थर को प्रधान मिनरल में आरक्षित कर दिया गया है एवं दो श्रेणी सीमेन्ट ग्रेड एवं स्टील ग्रेड में वर्गीकृत कर दिया है। इसके कारण केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन की उपलब्धता अत्यधिक प्रभावित हुई हैं। नए खान पट्टों का आवंटन चूना उद्योग के लिए रुक गया है। चूना पत्थर की उपलब्धता नहीं होने के कारण इस उद्योग के सामने कच्चे माल की विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। इस कारण चूना उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को अब चूना बाहर से आयात करना पड़ रहा है, जिसमें देश की बहुमुल्य विदेशी मुद्रा तो जा ही रही है उसके साथ-साथ यहां पर मिलने वाले रोजगार के अवसर भी कम होते जा रहे हैं।
इन उद्योगों में काम आता है केमिकल ग्रेड का लाइम स्टोन

केमिकल ग्रेड लाइम स्टोन से उत्पादित क्वीक लाइम एवं हाइड्रेटेड लाइम एक अत्यन्त ही महत्वपुर्ण कच्चा माल है, जिसका उपयोग देश के लगभग सभी प्रमुख उद्योगों में किया जा रहा है। हाई ग्रेड के क्वीक लाइम एवं हाइड्रेटेड लाइम के बिना इन इकाइयों में उत्पादन सम्भव नहीं है, जिनमें प्रमुख उद्योग जैसे शक्कर उद्योग, पेपर उद्योग, मेटल इण्डस्ट्रीज, स्टील उद्योग, सडक़ निर्माण व वायुयान रन-वे में, रसायन उद्योग, वाटर प्यूरिफिकेशन, परमाणु उद्योग, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट के लिए, इकोफ्रेंडली बिल्डिंग मेटेरियल के निर्माण में, कृषि उपयोग के लिए, चमड़ा उद्योग आदि में किया जाता है। इनके अलावा प्लास्टिक इण्डस्ट्रीज, रबर, पशु आहार, ग्लास, सेरेमिक इंसुलेशन, फार्मा इण्डस्ट्रीज आदि उद्योग भी उच्च गुणवता वाले चूने के बिना नहीं चल सकते।
पत्थर की उपलब्धता घटने बढ़ी परेशानी

जोधपुर, नागौर व पाली में अब तक करीब चूना पत्थर की लगभग 450 से 500 खानें अप्रधान खानों के रूप में आवंटित हैं, लेकिन उनमें से कुछ माइंस में पत्थर की उपलब्धता घटती जा रही है एवं कुछ में केमिकल ग्रेड (उच्च गुणवत्ता) का पत्थर उपलब्ध नहीं होने के कारण उत्पादित लाइम स्टोन सीमेंट उद्योगों को सप्लाई किया जा रहा है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले लाइम उत्पादन करने वाले उद्योग को कच्चे माल (लाइम स्टोन) की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कारण वो अपने उद्योग को उत्पादन क्षमता के अनुसार नहीं चला पा रहे हैं।
अप्रधान खनिज के रूप में आरक्षित करे सरकार

देश में चूने की महत्वता को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार को केमिकल ग्रेड के चूना पत्थर को सीमेन्ट ग्रेड में से हटाकर एक अलग नया ग्रेड बनाया जाना चाहिए। सीमेन्ट 60 प्रतिशत के लाइम स्टोन से बन जाती है, जबकि नागौर व जोधपुर का लाइम स्टोन 95-96 प्रतिशत वाला है, जो चीनी, स्टील, दवाइयां आदि बनाने में काम आता है। इसलिए इसको केवल अप्रधान खनिज के रूप में आरक्षित करना चाहिए।
– मेघराज लोहिया, अध्यक्ष, ऑल डणिडया लाइम मेन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन

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