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नागौर में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया हाईटेक, अब सेंसर और एआई तय करेंगे पास-फेल

ऑटोमैटिक ट्रैक पर अनिवार्य ट्रायल, केवल दक्ष चालकों को ही मिलेगा लाइसेंस, ट्रैक पर सेंसर और कैमरे लगे, जो गाड़ी के हर मूवमेंट (मोड़, ब्रेक, यू-टर्न) को ट्रैक करेंगे, मानवीय हस्तक्षेप होगा खत्म, कंप्यूटर से जारी होगा परिणाम

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ऑटोमैटिक ट्रैक

ऑटोमैटिक ट्रैक

नागौर. जिले में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) के लिए अब आरटीओ में इंसानों की जगह हाईटेक सेंसर और एआई-आधारित ऑटोमैटिक ट्रैक पर ट्रायल देना अनिवार्य होने वाला है। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है, जहां सेंसर और कैमरे रियल-टाइम में ड्राइविंग कौशल को रिकॉर्ड करेंगे। फेल होने पर तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा, जिससे केवल कुशल चालकों को ही लाइसेंस मिलेगा। परिवहन विभाग की इस नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी अभ्यर्थी को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए हाईटेक सेंसर और एआई आधारित ट्रैक पर अपनी ड्राइविंग क्षमता साबित करनी होगी।

नई प्रणाली के लागू होने के साथ ही मानव आधारित निरीक्षण की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी। पहले जहां ड्राइविंग टेस्ट के दौरान अधिकारियों की निगरानी में मूल्यांकन किया जाता था, वहीं अब सेंसर और कैमरे वाहन के हर मूवमेंट को सटीकता से रिकॉर्ड करेंगे। ट्रैक पर लगे अत्याधुनिक उपकरण गाड़ी के मोड़, ब्रेक, यू-टर्न, रिवर्सिंग और पार्किंग जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण करेंगे। यदि वाहन निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता या गलत दिशा में चलता है, तो सिस्टम तुरंत उसे फेल घोषित कर देगा।

पहले आवेदक का फेस स्कैन होगा

परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का पूरा काम निजी कम्पनी को सौंपा है, जिसके नेटवर्क इंजीनियर प्रियांशु सैनी ने बताया कि बाइक या कार में एक व्यक्ति बैठ सकेगा, जिसका सबसे पहले फेस स्कैन होगा, इसके बाद ट्रेक पर लगा बेरियर ऊपर होगा। पूरे ट्रेक पर कुल 25 कैमरे लगाए गए हैं, जो हर गतिविधि (मूवमेंट) को सटीकता से रिकॉर्ड करेंगे। बाइक के ट्रेक पर जहां 90 सैकंड का समय रहेगा, वहीं कार के ट्रेक पर 120 सैकंड का समय रहेगा। हर जगह आवेदक का फेस स्कैन होगा, ताकि बीच में कोई दूसरा व्यक्ति वाहन नहीं चलाए। इसके साथ जब तक एक आवेदक का ट्रायल पूरा नहीं होगा, तब तक दूसरा आवेदक ट्रेक पर नहीं आ सकेगा। इसके अलावा भी रुकने, रिवर्स लेने, पैर टेकने जैसे कई नियम हैं, जो इस ट्रायल को और कठिन बनाएंगे।

सडक़ सुरक्षा को मजबूत करना मुख्य उद्देश्य

इस नई व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण फायदे होंगे। सबसे पहले, मानवीय हस्तक्षेप समाप्त होने से भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम हो जाएंगी। दूसरा, टेस्ट की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, क्योंकि हर अभ्यर्थी का मूल्यांकन एक समान मानकों के आधार पर किया जाएगा। परिवहन विभाग के निरीक्षक जगदीश चौधरी ने बताया कि यह पहल सडक़ सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अक्सर देखा जाता था कि बिना पर्याप्त ड्राइविंग कौशल के भी लोग लाइसेंस प्राप्त कर लेते थे, जिससे सडक़ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता था। अब इस नई तकनीक के जरिए केवल प्रशिक्षित और दक्ष चालकों को ही लाइसेंस मिलेगा, जिससे सडक़ पर अनुशासन और सुरक्षा दोनों में सुधार होने की उम्मीद है।

पूरी प्रक्रिया रियल-टाइम में मॉनिटर होगी

ऑटोमैटिक ट्रैक पर लिए जाने वाले टेस्ट में 8 अंक (८) के आकार का ट्रैक, रिवर्स ड्राइविंग और ‘एच’ पार्किंग जैसे महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं। इन परीक्षणों के माध्यम से चालक की संतुलन क्षमता, नियंत्रण और सडक़ पर व्यवहार का वास्तविक आकलन किया जाएगा। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया रियल-टाइम में मॉनिटर होगी है, जिससे किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही तुरंत सामने आ जाएगी।

जल्द चालू होगा ऑटोमैटिक ट्रैक

ऑटोमैटिक ट्रैक लगभग पूरी तरह तैयार हो गया है। अब इसे हाईटेक सिस्टम को एनआईसी के सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। इस इंटीग्रेशन के माध्यम से टेस्ट का पूरा डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड होगा, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अनियमितता की संभावना समाप्त हो जाएगी। परिणाम कंप्यूटर से स्वत: जनरेट किए जाएंगे, इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

- अवधेश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर