16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ई-मित्र संचालक ने फर्जी श्रमिक कार्ड बनाकर उठाई प्रसूति सहायता योजना

श्रम विभाग में भ्रष्टाचार की अमरबेल, फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों से उठाया सरकारी योजना का लाभ, सरकार को लगा रहे चूना

2 min read
Google source verification
E-Mitra operator made fake labor card in Nagaur

E-Mitra operator made fake labor card in Nagaur

नागौर. श्रम विभाग के माध्यम से श्रमिकों व उनके परिजनों को उपलब्ध करवाई जाने वाली विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्रों को कम और अपात्रों को ज्यादा मिल रहा है। गत दिनों मृतकों को जीवित बताने के बाद श्रमिक कार्ड बनाकर व वापस उन्हें मृतक बताकर उनके परिजनों के नाम दो-दो लाख की सहायता राशि जारी करने का खुलासा राजस्थान पत्रिका द्वारा करने का मामला अभी शांत भी हुआ कि अब प्रसूति सहायता योजना में फर्जीवाड़े से सहायता राशि उठाने के खुलासे हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पत्रिका के पास आया है, जिसमें जोशियाद के एक ई-मित्र संचालक ने फर्जी तरीके से श्रमिक कार्ड बनाकर प्रसूति योजना के तहत 21 हजार रुपए की सहायता राशि उठा ली। हालांकि इस प्रकार फर्जी दस्तावेजों से प्रसूति सहायता उठाने के कई प्रकरण हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने की बजाए टालमटोल कर रहे हैं।

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि जोशियाद में एक ई-मित्र संचालक ने अपना श्रमिक कार्ड बना कर प्रसूति सहायता उठा ली। इस सम्बन्ध में ई-मित्र संचालक संतोष से बात की तो उसने बताया कि ई-मित्र अब बंद है और श्रमिक के लिए केवल 90 दिन काम करना होता है। इस पर पत्रिका संवाददाता ने उसके ई-मित्र कोड से ऑनलाइन जांच की तो पता चला कि जिस समय (9 जुलाई 2019 से 16 नवम्बर 2019 तक 95 दिन) उसने ठेकेदार मघाराम के यहां मजदूर के रूप में काम किया, उसी समय उसके ई-मित्र से लेन-देन भी होता रहा। ऐसे में साफ है कि उसने श्रमिक कार्ड के लिए नियोजक का प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से बनाया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एक ई-मित्र संचालक नियमानुसार श्रमिक कार्ड नहीं बना सकता। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ई-मित्र संचालक ने और भी कई फर्जीवाड़े किए हैं, जिसकी विभाग स्तर पर जांच चल रही है।

कार्यालय में दलालों का राज
नागौर के श्रम विभाग कार्यालय में दलाल इतने हावी हो चुके हैं कि अब अधिकारियों को भी धमकाने लगे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दलाल तो न केवल अधिकारियों की आईडी का उपयोग कर रहे हैं, बल्कि अपने चहेतों व रिश्वत देने वालों को ही लाभान्वित कर रहे हैं। श्रम विभाग में भ्रष्टाचार का बार-बार खुलासा होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, इसके चलते भ्रष्टाचार की अमरबेल ऊपर तक पहुंच गई है।

एफआईआर दर्ज करवाएंगे
एक ई-मित्र संचालक श्रमिक के रूप में पंजीकरण नहीं करवा सकता। यदि किसी ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर विभाग से प्राप्त की गई सहायता राशि की वसूली भी की जाएगी।
- श्यामसुंदर सिखवाल, श्रम निरीक्षक, श्रम विभाग, नागौर