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तुलसीराम हत्याकांड : चतरसिंह की रिपोर्ट नहीं आई काम, सात महीने बाद भी पुलिस खाली हाथ

Tulsiram murder case : नागौर के सदर थाना इलाके के अमरपुरा गांव स्थित एक खेत पर बने कमरे की छत पर सो रहे खेत मालिक तुलसीराम भाटी (50) की हत्या की गुत्थी करीब सात माह बाद भी अनसुलझी है।

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Tulsiram murder case : नागौर। करीब सात माह पूर्व सदर थाना इलाके के अमरपुरा गांव स्थित एक खेत पर बने कमरे की छत पर सो रहे खेत मालिक तुलसीराम भाटी (50) की हत्या की गुत्थी अब भी अनसुलझी है। नार्को टेस्ट के जरिए वारदात का खुलासा करने के भरोसे बैठी पुलिस को एक और झटका लगा है। शेष रहे दो संदिग्धों का नार्को टेस्ट भी गुजरात के गांधी नगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में मई में होगा। अब तक एक ही संदिग्ध का नार्को हुआ, जिसकी रिपोर्ट पुलिस के किसी काम की नहीं जबकि दूसरे को नार्को टेस्ट के लिए फिट ही नहीं माना गया।

सूत्रों के अनुसार दस-ग्यारह अगस्त की मध्य रात्रि में छत पर सो रहे तुलसीराम व पडौस के सुरेश मेघवाल पर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें तुलसीराम की जान चली गई, जबकि सुरेश मेघवाल लम्बे उपचार के बाद बच गया। पुलिस की लम्बी-चौड़ी फौज ने मशक्कत तो की, लेकिन कोई ठोस सुराग अब तक हाथ नहीं आया। जैसे-तैसे अदालत की इजाजत के बाद चार संदिग्ध के नार्को टेस्ट की पुलिस ने इजाजत ली। खास बात यह कि पुलिस ने इन चारों से गहनता से पूछताछ तक नहीं की। दिसम्बर में सुरेश व चतरसिंह को नार्को के लिए भेजा गया था, जहां सुरेश का नार्को करने से मना कर दिया गया। चतरसिंह का नार्को हुआ और इसकी रिपोर्ट भी मिली पर इसके लिए लम्बी कवायद का कुछ भी परिणाम नहीं आया। बताया जाता है कि इस टेस्ट से तुलसीराम की हत्या के बारे में पुलिस को रत्तीभर भी सुराग नहीं मिला।



सूत्र बताते हैं कि अब सुरेश मेघवाल के भाई गुमानाराम व मृतक तुलसीराम के रिश्ते में भाई सुखवीर सिंह का नार्को होना बाकी है। सुखवीर सिंह स्टॉम्प वेंडर है, वह तुलसीराम के कुटुम्ब का ही है। जमीन से जुड़े किसी मामले को लेकर हुई तनातनी अथवा बिकवाली के चलते इस पर पुलिस का शक गहराया हुआ है। पुलिस का मानना है कि चारों संदिग्ध का नार्को कराना पुलिस की प्राथमिकता पर है। कहा यह भी जा रहा है कि चारों का नार्को भी यदि पुलिस की कोई मदद नहीं कर पाया तो फिर गुत्थी सुलझेगी कैसे? मई में इन दोनों का नार्को होगा तो रिपोर्ट आने में एक-दो महीने लगेंगे। इसके अलावा अभी सुरेश का नार्को होना बाकी है। ऐसे में सालभर होने के बाद पुलिस क्या रास्ता अपनाएगी।

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तुलसीराम हत्याकांड के आरोपियों को गिरफ्तार करने तक शव नहीं उठाने की चेतावनी देने वाले सामाजिक ही नहीं राजनीतिक संगठन के दर्जनों पदाधिकारी पूरी तरह भूमिगत हो चुके हैं। विधानसभा चुनाव खत्म हो गया और अब लोकसभा चुनाव आने को है, संगठनों के जिम्मेदार अब इसे भुला चुके हैं। केवल तुलसीराम की पत्नी और उसके बच्चे ही आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। बिजली मरम्मत करने वाला तुलसीराम नागौर के नया दरवाजा में अपने परिवार के साथ रहता था। उसका अमरपुरा में खेत है। दस अगस्त की रात तुलसीराम ने पहले तो सुरेश के घर खाना खाया और फिर उसे साथ लेकर रात करीब दस बजे अपने कमरे की छत पर सोने आ गए। सुबह दोनों लहूलुहान मिले।

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