
Millet
नागौर. मारवाड़ में आज भी 80 प्रतिशत लोगों की पहली पसंद बाजरा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग तो बारह महीने बाजरा खाते हैं। एक प्रकार से विषम परिस्थितियों के बावजूद यहां लोग यदि स्वस्थ रहते हैं तो इसकी प्रमुख वजह भी बाजरा ही है, जो उनका प्रमुख भोजन है। वर्तमान में बढ़ रही बीमारियों को देखते हुए विशेषज्ञों ने मिलेट्स पर जोर देना शुरू किया है, लेकिन मारवाड़ के लोग इस बात को शुरू से ही जानते थे, इसलिए उन्होंने बाजरा को ही प्रमुख खाद्यान्न के रूप में उपयोग किया। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजरे में चावल से 10 गुना और गेहूं से डेढ़ गुना अधिक आयरन होता है।
पश्चिमी राजस्थान में बाड़मेर सबसे अधिक बुआई वाला जिला
राजस्थान में बाजरा का उत्पादन 28 लाख मैट्रिक टन है तथा उत्पादन के हिसाब से राजस्थान में अलवर प्रथम तथा बाड़मेर क्षेत्रफल के हिसाब से प्रथम स्थान पर है, जहां 9.9 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुआई होती है। दूसरे स्थान पर जोधपुर में 4.5 लाख हैक्टेयर, नागौर में तीन लाख हेक्टेयर में बाजरे की बुआई हो रही है। नागौर जिले में मूंग (छह लाख हैक्टेयर) के बाद यदि किसी फसल की बुआई सबसे अधिक होती है तो वह बाजरा है। भारत में भी राजस्थान मिलेट्स उत्पादन में 32 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। यदि विश्व की बात करें तो भारत एशिया का 80 प्रतिशत उत्पादन करता है तथा विश्व का 20 प्रतिशत।
पोषण का खजाना मारवाड़ का बाजरा
बाजरा स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है, क्योंकि मधुमेह में लाभदायक, हृदय के लिए लाभकारी व हड्डियों को मजबूत करता है। 100 ग्राम बाजरा में यदि पोषक तत्वों की बात करें तो आयरन 16.9 मिली ग्राम, केल्सियम 38 मिली ग्राम, मिनरल्स 2.3 ग्राम, प्रोटीन 10.6 ग्राम व पाचक रेशे 1.3 ग्राम पाए जाते हैं।
इसलिए खाया जाता है बाजरा
- पोषणीय आधार पर अन्य खाद्यान्न की अपेक्षा बेहतर।
- कम ग्लायसेमिक इंडेक्स व ग्लूटन मुक्त।
- पाचक रेशों की प्रचुर मात्रा।
- बाजरे में चावल से 10 गुना और गेहूं से डेढ़ गुना आयरन।
- गेहूं से 3.5 गुना ओमेगा-3
- मोटापा, हृदय रोग, मधुमेह आदि से बचाव में सहायक।
नागौर में बाजरा की बुआई का क्षेत्रफल व उत्पादन
वर्ष - क्षेत्रफल - उत्पादन
2018-19 - 2,71,484 - 2,42,225
2019-20 - 2,99,715 - 3,28,385
2020-21 - 3,01,681 - 2,87,629
2021-22 - 2,97,239 - 2,62,057
2022-23 - 3,13,574 - 2,97,574
2023-24 - 3,01,973 - 3,04,838
औसत - 2,96,699 - 2,83,574
- बुआई क्षेत्रफल हैक्टेयर में और उत्पादन मैट्रिक टन में है।
मारवाड़ में बाजरा खाने के साथ चारे के लिए उपयोगी
राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बाजरा जैसे मोटे अनाज का उत्पादन बहुत आवश्यक हो जाता है, क्योंकि राजस्थान की 28 प्रतिशत कृषि जीडीपी में से 40 प्रतिशत पशुपालन की हिस्सेदारी है। इसलिए चारा के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बाजरे तथा ज्वार का उत्पादन ज़रूरी हो जाता है। बाजरे में अनाज तथा चारा का अनुपात 1:2.5 है, जबकि गेहूं में 1:1 तथा चावल में 1:1.3 ही है। साथ ही राजस्थान में बारिश कम होने की वजह से बाजरा आसानी से उत्पादित किया जा सकता है। एक किलोग्राम बाजरे के उत्पादन में 400 लीटर पानी की ज़रूरत पड़ती है, जबकि एक किलोग्राम गेहूं के उत्पादन में 2000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, वहीं पर एक किलोग्राम चावल के उत्पादन के लिए 4000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
अब गुणवत्ता व न्यूट्रीशनल वैल्यू पर ध्यान देना
बाजरा ग्लूटेन फ्री होने की वजह से कई सारे रोगों से बचा जा सकता है एवं इसके न्यूट्रीशनल मूल्यों से खुद को लाभान्वित किया जा सकता है। पेट का अल्सर, कैंसर के रिस्क कम, ब्लड शुगर कंट्रोल, पाचन तंत्र में सुधार, सीलिएक रोग में तथा हृदय के स्वास्थ्य में भी लाभदायक है। जब देश आजाद हुआ तब 1950-51 में 36.10 करोड़ जनसंख्या के लिए 50.82 मिलियन टन का उत्पादन हो रहा था, वहीं पर आज 141 करोड़ जनसंख्या के लिए कुल अनाज 323.5 मिलियन टन पर पहुंच गया। आज उत्पादन में हम आत्मनिर्भर हो चुके हैं, ऐसे में अब जरूरत है कि हम गुणवत्ता तथा न्यूट्रीशनल वैल्यू पर ध्यान दें।
- डॉ विकास पावडिय़ा, कृषि अर्थशास्त्री, कृषि महाविद्यालय, नागौर
बीमारियों का घर है गेहूं
गेहूं खाने से हार्ट, शुगर, बीपी सहित अन्य बीमारियां हो रही हैं। अमेरिका के कार्डियोलॉजिस्ट विलियम डेविस ने वीट बैली (गेहूं की तोंद) किताब लिखी, जिसमें उन्होंने गेहूं के दुष्प्रभाव बताए हैं। इसको देखते हुए मैंने लगभग गेहूं खाना बंद कर दिया है। मैं अमूमन बाजरा सहित अन्य मोटे अनाज की रोटी ही खाता हूं।
- डॉ. रणवीर चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सक, नागौर
Published on:
26 Oct 2024 11:19 am
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